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أشــرقت
فــي
سـماء
أنـس
شموسـي
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بــك
يــا
شــافعي
إلـى
القـدوس
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وصــفا
القلـب
مـن
كـدورات
نفـس
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أوقتنــي
فــي
مهمــه
التهــويس
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أنــا
ضـيف
ولـي
انتسـاب
إليكـم
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جـــامع
المعنـــوي
والمحســـوس
|
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كيــف
لا
يعتلــي
مقــامي
ويسـمو
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مشــهدي
فــي
العلا
وتصـفو
كؤسـي
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حـق
لـي
فـي
الأنـام
أنشـد
جهـراً
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راق
أنســى
لا
عطــر
بعــد
عـروس
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وانجلـى
مـا
اختفـى
لعيني
عيانا
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وانجلـى
الهـم
في
الحمى
المأنوس
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أبشــرن
بالنجـاة
يـا
فلـك
قلـب
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حيـث
فـي
بحرهـم
طرحـت
البروسـي
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يـا
أخـا
البشر
والعطا
والمعالي
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حســن
ظنــي
بكــم
أزاح
عبوســي
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وبـــدانا
شــدا
بمــا
يرتجيــه
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فالغيــاث
الغيـاث
فبـل
النكـوس
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قــد
تمنيــت
بــالمراد
عليكــم
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يــا
كريمــاً
علا
عــن
التقييــس
|
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الغيــاث
الغيـاث
يـا
خيـر
شـهم
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فــي
فنـاه
الرحيـب
حطيـت
عيسـى
|
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نجــــدة
نجــــدة
لــــراج
ولاج
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عطفــة
عطفــة
علــى
العيدروسـي
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عطفـــة
عطفـــة
فــداك
جميعــي
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حبـذا
أن
قبلـت
يـا
ابـن
الهموس
|
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أمــن
القلــب
مــن
زمــان
خـون
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وانتقــدني
مــن
حـاله
المعكـوس
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كــم
كريــم
لــه
يعـادي
ويقلـي
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ولئيـــم
لـــه
يــوالي
ويوســي
|
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إن
هــذا
الحــديث
فيــه
قــديم
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يــا
لحــاه
الالــه
مــن
مطمـوس
|
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شــرفوا
رقكــم
فمــا
ثــم
غيـر
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منقــذي
مــن
عــذاب
دهـر
بئيـس
|
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ضـاق
حـالي
الضـعيف
من
بعد
وسعي
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يــا
قــوي
الأنجــاد
والتنفيــس
|
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جـن
عقلـي
وضـقت
مـن
بعـد
ما
قد
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كنــت
قـد
مـا
حليـف
كيـس
وكيـس
|
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نجـــده
نجـــدة
لضـــيف
غيــرب
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دائم
الاضـــــطراب
والتهجيــــس
|
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حــائر
الأمـر
نـازح
الـدار
خـال
|
عــن
كمــال
الرئيــس
والمــرؤس
|
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لـم
أزل
فـي
جميـع
يـومي
وليلـى
|
مـن
بحـور
العنـا
حليـف
الغطـوس
|
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كنـت
أرجـو
النجـاة
لو
كان
عندي
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مــال
قــارون
أو
علـوم
الطوسـي
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يــا
ملاذي
لــديك
أوضــحت
حـالا
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ليــس
يخفـاك
يـا
أخـا
التقـديس
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يـا
إمـام
الأئمـة
الغر
وابن
الأر
|
وع
المعتلـــي
الـــذكا
إدريــس
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هـــذه
علـــتي
وأنـــت
طبيــبي
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هـــذه
وحشـــتي
وأنــت
أنيســي
|
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فالـــدوا
منــك
إن
تعــاظم
داء
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والشــفا
منــك
لاشــفاء
الرئيـس
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طبــك
الطـب
كـم
شـقى
فـي
عضـال
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مــــدلهم
لا
طــــب
جــــالينوس
|
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فكـــر
أماتــك
العظــام
وأنــى
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لأخـي
العـزم
حصـرها
فـي
الطـروس
|
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بــدلوا
عســرتي
بيســر
وراعـوا
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مــن
بهــم
فـي
العلا
علا
ناموسـي
|
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ليـس
يخفـا
الضـحال
أهلـي
الإجلا
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وارتقــاهم
أعلــى
محــل
نفيــس
|
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ســـركم
واحــد
وأنتــم
جيمعــا
|
فيضــكم
مــن
هبـات
تـاج
الـرؤس
|
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جــدكم
أحمــد
رفيــع
المزايــا
|
ســـيد
الأنبيــا
مزيــل
البــوس
|
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يــا
لكـم
مـن
فـروع
أصـل
عظيـم
|
حصــنوا
مــن
شــوائب
التــدنيس
|
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حبكــــم
مـــذهبي
وعقـــد
ولائي
|
حبكـــم
شــافعي
إلــى
القــدوس
|
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أنــا
فيــه
خلعــت
ثـوب
عـذاري
|
وبــه
قــد
كســيت
أبهــى
لبـوس
|
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أنـــا
مســتهتر
بــذاك
جهــارا
|
غيـــر
مصــغ
لزخــرف
التــدليس
|
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كــل
جــزء
مــن
كلــه
باتفــاق
|
مــن
أولــى
الاجتهــاد
والـدريس
|
|
غــارة
غــارة
فقــد
حـال
حـالي
|
بعـــد
ذاك
الســرور
والتــأنيس
|
|
لا
تزيـــل
الهمــوم
الأســميا
ال
|
غــوث
منكــم
لا
خمــرة
القســيس
|
|
يــا
حمـاة
الحمـى
علام
التـواني
|
حمــى
اليــوم
مـن
زمـان
وطيسـي
|
|
ها
حمامي
قد
آن
لولا
احتساء
النف
|
سِ
مـــن
راح
حرقـــة
التنفيـــس
|
|
يـــا
إلهـــي
بأحمـــد
وبنيــه
|
جــد
برفعــي
مـن
هـوة
التنكيـس
|
|
وارحمـن
غربـتي
وكـن
لـي
معينـا
|
وأزح
بالســـعود
عنـــي
نحـــوس
|
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أنــت
عــودتني
الجميــل
وظنــي
|
أننـــي
لا
أزال
فـــي
ملبوســـي
|
|
وشـفيعي
مـن
قـد
ذكـرت
فهـب
لـي
|
فــوق
سـؤلي
يـا
راحـم
المرمـوس
|
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وعلــى
المصـطفى
أمـام
البرايـا
|
شــافع
العــالمين
يـوم
العبـوس
|
|
وعلـــى
آلــه
كــرام
الســجايا
|
وعلــى
الصــحب
أزكيـاء
النفـوس
|
|
صــل
يــا
ذا
الجلال
مـا
لاح
فجـر
|
أو
تغنــى
الحـداة
فـي
التغليـس
|
|
أو
شـــدا
قــائلاً
نزيــل
كــرامٍ
|
أشــرقت
فــي
سـماء
أنـس
شموسـي
|