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مـرت
لنـا
بالحمى
المأنوس
أعياد
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مـع
الأحبـة
لـو
عـادت
ولو
عادوا
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كنـا
قضـينا
بهـا
الأوطار
في
دعة
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وطيـب
عيـش
فمـا
كادت
وما
كادوا
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إنــي
وقـد
حلـت
الأقـدار
دونهـم
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فـالهم
مجتمـع
والقـوم
قد
بادوا
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هـذا
الزمـان
وهـذا
الدهر
عادته
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فينـا
وفـي
غيرنـا
بيـن
وأنكـاد
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إن
الحــوادث
لا
تبقـى
علـى
أحـد
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وللكريـــم
قنــاة
ليــس
تنــآد
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تجلـد
واصـطبار
كـان
وراثـه
الأب
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نــاء
مــن
قبــل
الآبـا
وأجـداد
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تمضـي
علـى
سبل
كانوا
لها
سلكوا
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أســـلافنا
فهـــم
للَــه
أجنــاد
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ممـا
زعزعتهـم
يد
الأيام
حين
سطت
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وكــــف
لا
وهـــم
للأرض
أطـــواد
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نبينـــا
وعلـــي
والحســين
وزي
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ن
العابدين
بهذا
في
الورى
سادوا
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لنـا
بهـم
أسـوة
إذ
هـم
أثمتنـا
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ونحــن
للقــوم
أبنــاء
وأحفـاد
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والصـبر
يـا
نفـس
خيـر
كلـه
وله
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عـــواقب
كلهــا
نجــح
وإمــداد
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فاصـبر
هـديت
فـإن
الأمـر
مشـترك
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بيــن
الأنــام
وإن
طـاولن
آمـاد
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والنــاس
فـي
غفلات
عـن
مصـارعهم
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كـــأنهم
وهــم
الأيقــاظ
رقــاد
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دنيــا
تغــر
وعيــش
كلــه
كـدر
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لـولا
النفـوس
الـتي
للوهم
تنقاد
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كنـا
عـددنا
لهـذا
المـوت
عـدته
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قبـل
الوفـاة
وأن
يحفـرن
ألحـاد
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فالـدار
مـن
بعد
هذا
الدار
آخرة
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تبقـى
دوامـاً
بهـا
حشـر
وميعـاد
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وجنـــة
أزلفـــت
للمتقيــن
وأه
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ل
الحـق
والصـبر
أبـدال
وأوتـاد
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فاعمـل
لنفسك
من
قبل
الممات
ولا
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تعجـز
وتكسـل
فـإن
المـرء
جهـاد
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لا
ينفــع
العبــد
إلا
مـا
يقـدمه
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فبـادر
الفـوت
واصـطد
قبل
تصطاد
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يـا
صـاحبي
إن
قلبي
اليوم
مكتئب
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قـد
كـان
عـاوده
مـا
كـان
يعتاد
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تــذكر
لأصــيحاب
قــد
انــتزحوا
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عنــا
تنـاءى
بهـم
غـور
وأنجـاد
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مشـــتتون
بــأطراف
البلاد
علــى
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رغــم
الأنـوف
كمـا
تهـواه
حسـاد
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بيــن
الأباعـد
لا
تـدري
أمثـالهم
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مــا
حقهــم
وهــم
جمـع
وأحشـاد
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فهفـي
على
غرباء
الدار
حين
نووا
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ولــم
يطيفـوا
بهـم
أهـل
وعـواد
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مـن
آل
طه
وآل
المرتضى
ومن
الزه
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را
البتـول
لقصر
المجد
قد
شادوا
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أعـزة
فـي
الذرا
من
هاشم
وعن
ال
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كتـاب
والسـنة
الغـراء
ما
حادوا
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ممـوت
ميتهـم
مـن
حيـث
شـاء
فأر
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ض
اللَــه
واحـدة
والقـوم
أمجـاد
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أبكيهــم
بــدموع
علــيَّ
سـائلها
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يبــل
مـن
جمـرات
القلـب
إيقـاد
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تحســـر
وشـــجون
كلمــا
لمعــت
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بــروق
كاظمــة
تنمــو
وتــزداد
|
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وكلمـا
نـاحت
الورقـا
علـي
غصـن
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وكلمــا
خفقــت
بــالواد
أنـواد
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فيـا
بعيـد
يـد
بشار
البشائر
هل
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وافـت
علـى
اليمـن
إخـوان
وأولاد
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أرواحهــم
ونفــوس
كـان
فارقهـا
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بــالقبض
للَــه
أجســام
وأجسـاد
|
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بـأنواعن
الأهـل
والأوطـان
من
زمن
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وكـان
مـن
ودهـم
لـو
أنهم
عادوا
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فعــــوقتهم
مقـــادير
مقـــدرة
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محتومهــا
مــاله
دفعــت
ولا
راد
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مثـل
القريـب
وابـن
العم
في
زمر
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طــابت
خلائقهـم
والسـعي
والـزاد
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مـن
الـذين
بعلـم
اللَه
قد
عملوا
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واســـتغرفتهم
عبـــادات
وأوراد
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دعــاة
خيـر
هـداة
مهتـدين
رضـى
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مـن
سادة
ما
لهم
في
الفضل
أنداد
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حـدا
بهـم
هاذم
اللذات
فانطلقوا
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إلــى
مصــير
بــه
فـوز
وإسـعاد
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برازخ
النور
دهليز
الجنان
من
ال
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فـردوس
والعـدن
بـاللَه
ما
فادوا
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فــالموت
للمــؤمن
الأواب
تحفتـه
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وفيــه
كـل
الـذي
يبغـي
ويرتـاد
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لقـي
الكريـم
تعـالى
مجـده
وسما
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مـع
النعيـم
الـذي
ما
فيه
أنكاد
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فضــل
مـن
اللَـه
إحسـان
ومرحمـة
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فالفضــل
للَــه
كــالأزال
آبــاد
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فــالظن
بــاللَه
مولانـا
وسـيدنا
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ظــن
جميــل
مـع
الأنفـاس
تـزداد
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نرجــوه
يرحمنـا
نرجـوه
يجبرنـا
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فهـو
الجـواد
الـذي
بالجود
عواد
|
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نرجــوه
ينظرنـا
نرجـوه
يسـترنا
|
فمنــه
للكــل
إمــداد
وإيجــاد
|
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نــدعوه
نســأله
عفــواً
ومغفـرة
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مــع
حسـن
خاتمـة
فـالعمر
نفـاد
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وقـد
رضـينا
قضـاء
اللَه
كيف
قضى
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واللطـف
نرجـو
وحسن
الصبر
إرشاد
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ثـم
الصـلاة
علـى
الهـادي
وعترته
|
محمـد
مـا
انثنـت
بالريـح
أعواد
|
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ومـا
تغنـت
حمـام
الأيـك
فـي
سحر
|
فكـان
منهـا
لحـر
الشـجو
إبـراد
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