|
بعثــت
لجيــران
العقيــق
تحيــتي
|
وأودعتهــا
ريـح
الصـبا
حيـن
هبـت
|
|
ســحيراً
وقــد
مــرت
علــى
فحركـت
|
فــؤادي
كتحريـك
الغصـون
الرطيبـة
|
|
وأهـــدت
لروحــي
نفحــة
عنبريــة
|
مــن
الحـي
فاشـتاقت
لقـرب
الأحبـة
|
|
وحنـت
لتـذكار
الليـالي
الـتي
خلت
|
لنـا
بيـن
هاتيـك
الربـوع
الأنيسـة
|
|
وإخـوان
صـدق
أوحـش
القلـب
بعـدهم
|
فلِلَــه
مــا
لقيــت
مـن
حـر
فرقـة
|
|
ديــار
نــأت
عـن
دورهـم
وتباعـدت
|
منازلنــــا
لا
عـــن
قلاء
وجفـــوة
|
|
علـي
الحـرص
منـي
أن
أراهـم
ومنهم
|
فمـا
سـمحت
يمنـى
الزمـان
بمنيـتي
|
|
ومـا
بعـدهم
عنـي
ولا
البعـد
عنهـم
|
بحــال
اختيــار
بــل
بقهـر
مشـية
|
|
وحكـــم
إلـــه
العــالمين
منفــذ
|
علـي
كـل
حـال
والرضـا
خيـر
قنيـة
|
|
بـه
تنجلـي
عنـا
الهمـوم
إذا
طـرت
|
وتســري
بـه
عنـا
الغمـوم
الملمـة
|
|
وكـم
حـادث
قـد
ضـاق
متسـع
الفضـا
|
علــى
بــه
فــانزاح
منــه
بخطـرة
|
|
أحبــة
قلــبي
هــل
لأيامنـا
الـتي
|
تقضــت
بــذات
البــان
إذن
برجعـة
|
|
فقـد
طـال
هـذا
البعـد
وامتد
وقته
|
وطــال
انتظــار
حجــة
بعــد
حجـة
|
|
تــرى
تجمـع
الأيـام
بينـي
وبينكـم
|
وأحظـى
بكـم
مـن
قبـل
تـأتي
منيتي
|
|
فـوا
أسـفي
إن
مـت
مـن
قبل
أن
أرى
|
وجوهــاً
عليهـا
نـو
ر
علـم
وخشـية
|
|
وجلــــوة
إخلاص
وصــــدق
وقربـــة
|
وإيثـار
كشـف
الغيـب
عـن
ذوق
خبرة
|
|
وأســمع
منهــم
كــل
علــم
مقــدس
|
عـن
الحـس
والأوهـام
مـن
فتـح
حكمة
|
|
وأنشــق
مــن
أريــاحهم
كــل
طيـب
|
ذكــي
تطيــب
الــروح
منــه
بشـمة
|
|
وأمسـى
بهـم
فـي
موقف
الشرع
سالكاً
|
طريقـــة
حـــق
واصـــلا
للحقيقــة
|
|
فلِلَــه
أقــوام
نـأى
البعـض
منهـم
|
عـن
البعـض
إيثـار
المقصـود
خلـوة
|
|
وأنســـا
بمــولاهم
وشــغلا
بــذكره
|
وخــدمته
فــي
كــل
حيــن
وحالــة
|
|
وحرصــاً
علــى
هــذا
الحمـول
فـإن
|
أمــان
لأهــل
اللَـه
مـن
شـر
شـهرة
|
|
وحــب
انقطــاع
واعـتزال
فـان
فـي
|
همـا
طيـب
عيـش
فـي
زمـان
البليـة
|
|
فمنهــم
مقيــم
فــي
الأنـام
وإنـه
|
لمتــور
عنهــم
تحـت
أسـتار
غيـرة
|
|
يــراه
الــورى
إلا
القليـل
كغيـره
|
مـن
الغـافلين
التـاركين
اسـتقامة
|
|
ومنهـــم
رجــال
يــؤثرون
ســياحة
|
وســكنى
مغــارات
الجبــال
وقفـرة
|
|
يســيحون
مـن
شـعب
إلـى
بطـن
وادي
|
وكــل
خــراب
والفيــافي
الخليــة
|
|
ومنهـــم
رجــال
ظــاهرون
بــأمره
|
لإرشـاد
هـذا
الخلـق
نهـج
الطريقـة
|
|
لهـم
همـة
فـي
دعـوة
الخلـق
جملـة
|
إلـى
اللَـه
عـن
نصـح
ولطـف
ورحمـة
|
|
فهـــم
حجـــة
للمــؤمنين
بربهــم
|
وفيهـم
لمرتـاد
الهـدي
خيـر
قـدوة
|
|
وحتــف
علــى
أهــل
الضــلال
وحجـة
|
تقــوم
علــى
أهـل
الشـقاق
بشـقوة
|
|
وكـل
علـى
نهـج
السـبيل
السوي
لمن
|
يخــالف
أمــراً
آخــذاً
بالشــريعة
|
|
فـإن
الـذي
لا
يتبـع
الشـرع
مطلقـا
|
علــى
كــل
حـال
عبـد
نفـس
وشـهوة
|
|
صــريع
هــوى
يبكــي
عليــه
لأنــه
|
هـو
الميـت
ليس
الميت
ميت
الطبيعة
|
|
ومـا
فـي
طريـق
القوم
يدعوك
لاِنتها
|
مخالفــة
للشــرع
فاســمع
وانصــت
|
|
وخـــل
مقـــالات
الــذين
تخبطــوا
|
ولا
تـــك
إلا
مـــع
كتـــاب
وســنة
|
|
فتـم
الهـدى
والنـور
والأمن
من
ردا
|
ومــن
بدعــة
تخشــى
وزيـغ
وفتنـة
|
|
ومتبعـــو
حكـــم
الكتــاب
وســنة
|
هــم
المفلحــون
الفــائزون
بجنـة
|
|
عليهـم
مـن
الرحمـن
رضـوانه
الـذي
|
هــو
النعمـة
العظمـى
وأكـبر
منـة
|
|
ومـن
حـاد
عـن
علـم
الكتـاب
وسـنة
|
فبشــره
فــي
الـدنيا
بخـزي
وذلـة
|
|
وبشــره
فـي
العقـبى
بسـكنى
جهنـم
|
وحرمــان
جنــات
الخلــود
ورؤيــة
|
|
ألا
مــا
لقلـبي
كلمـا
ذكـر
الحمـى
|
وأهـل
الحمـى
مـن
خيـر
عـرب
وجيرة
|
|
بهيــج
بــه
وجــد
وشــوق
ولوعــة
|
شـجون
لهـا
تجـرى
علـى
الخـد
دمعة
|
|
ومــا
لفــؤادي
قــد
تـوطنه
الأسـى
|
أحســن
بــه
مــن
حـره
لفـح
جمـرة
|
|
تعــود
تــذكار
الخيــام
وأهلهــا
|
إلــى
أن
غـدا
مـن
شـوقه
كـالمفتت
|
|
وللَـــه
روح
خــالط
الحــب
كلهــا
|
ومــا
زجهــا
حــتى
صـبت
للصـبابة
|
|
وخامرهــا
خمــر
الغــرام
فأصـبحت
|
وأمســت
علــى
حـب
الحـبيب
مقيمـة
|
|
يظـن
بهـا
مـن
ليـس
يـدري
بشـأنها
|
بــأن
بهــا
سـكر
الخمـور
الأثيمـة
|
|
لهــا
أبـداً
شـوق
إلـى
خيـر
معهـد
|
بـه
خيـر
عهـد
فـي
العصور
القديمة
|
|
يــذكرها
العهــد
القـديم
سـماعها
|
لتجيــع
تــال
للمثــاني
الكريمـة
|
|
ورنـــة
أذكـــار
وصـــوت
مســـبح
|
ونغمــة
حــاد
بالمطايــا
المجـدة
|
|
وتغريــد
ورق
فــوق
أغصــان
دوحـة
|
وتلحيــن
شــاد
بالأغـاني
الرقيقـة
|
|
وكــل
نســيم
هــب
أو
بــارق
سـري
|
وأشـيا
أرى
فـي
سـترها
حفـظ
حرمـة
|
|
جـــذار
غـــبي
أو
حســـود
مولــع
|
بإنكــار
أسـرار
العلـوم
الدقيقـة
|
|
فقـد
سـتروا
أهـل
الطريـق
وأخملوا
|
أمــوراً
مــن
التحقيــق
تـى
تغطـت
|
|
لئلا
يراهــا
المنكــرون
فيحســروا
|
بإنكارهـــا
لا
عــن
دليــل
وحجــة
|
|
كمـا
أنكـر
قـوم
وعلـى
بعض
من
مضى
|
مـن
العـارفين
أهل
الهدى
والبصيرة
|
|
ويســمعها
قــوم
وليـس
مـن
أهلهـا
|
فيرتكبـــوا
فيهــا
بجهــل
وغــرة
|
|
كمــا
ضــل
أقــوام
بهـا
وتخبطـوا
|
ومـالوا
عـن
الـدين
القـويم
وشرعة
|
|
وغـن
الـذي
أبـدى
من
القوم
ما
سبي
|
لــه
الســتر
مغلــوب
بحـال
قويـة
|
|
يفــارقه
التمييــز
عنــد
ورودهـا
|
عليــه
وإن
أخطــأ
فليــس
بمعنــت
|
|
وكــم
مــن
قريــب
بعــدته
عبـارة
|
عـن
الفهـم
فاستمسـك
بحبل
الشريقة
|
|
وســلم
لأهــل
اللَـه
فـي
كـل
مشـكل
|
لـــديك
لـــديهم
واضــح
بالأدلــة
|
|
خليلـي
هـل
مـن
مسـعد
منكمـا
علـى
|
ســــلوك
ســــبيل
دارس
وخفيــــة
|
|
تــأخر
عنهــا
الأكــثرون
فأعرضـوا
|
لمـا
علمـوا
فـي
قطعهـا
مـن
مشـقة
|
|
رياضـــة
نفــس
واعــتزال
عوايــد
|
وقمـــع
حظـــوظ
للقلــوب
مميتــة
|
|
وتــرك
الأمــاني
والمـرادات
كلهـا
|
وكــل
اختيــار
والتــدابير
جملـة
|
|
وكنـس
ضـمير
القلـب
كـي
يبق
فارغاً
|
مـن
الحـب
للـدنيا
الغـرور
الدنية
|
|
وتطهيـره
سـبعاً
عـن
الميـل
للسـوى
|
بمــاء
الفنـا
بـاللَه
عنـه
وغيبـة
|
|
وجمـع
علـى
المولى
الكريم
بترك
ما
|
عـن
الـذكر
يلهـى
والتزام
العبادة
|
|
فــإن
تسـعداني
بالوفـاق
فـإن
لـي
|
بــه
بعــض
أنــس
وارتيــاح
وقـوة
|
|
وإلا
فـــأمر
اللَــه
عنــدي
معظــم
|
وعنــدي
بحمـد
اللَـه
يـا
رب
رغبـة
|
|
وكــم
تحفــة
كـم
طرفـة
كـم
عطيـة
|
بــه
دونهـا
بسـطى
وروحـي
وراحـتي
|
|
أطــالع
أمـر
القبضـتين
فقبضـة
ال
|
يميــن
وأخــرى
لليميــن
الأخيــرة
|
|
فســـبق
ســـعادات
وســبق
شــقاوة
|
بمحــض
اختيــار
دون
ســعي
وحيلـة
|
|
واعمــالهم
تجـري
علـى
وفـق
سـابق
|
لهــم
عنـده
والختـم
عنـد
الأوليـة
|
|
ومســح
يــد
الرحمــن
ظهــر
صـفيه
|
فــأخرجهم
كالــذر
يــوم
الشـهادة
|
|
فأشـــهدهم
والكــل
منهــم
مســبح
|
هنــاك
وبعــد
الأمــر
نـاف
ومثبـت
|
|
وسـرا
خفيـا
حـار
فيـه
أولو
النهى
|
علـــى
صـــورة
للصــورة
الآدميــة
|
|
فنــزه
إلــه
العــالمين
وقـد
سـن
|
عــن
الصــورة
الحســية
البشــرية
|
|
وغــص
فــي
بحــار
الســر
إن
كنـت
|
عارفـاً
بسـاحاته
الدريـة
الجوهرية
|
|
وكــن
فـي
أحـاديث
الصـفات
وآيهـا
|
علــى
مــذهب
الأسـلاف
حيـث
السـلامة
|
|
واشــهد
لطـف
الفضـل
فـي
كـون
آدم
|
مـن
الطيـن
مخلـوق
اليدين
النزيهة
|
|
فســواه
والنفــخ
الكريــم
معقــب
|
بــه
ثـم
بعـد
النفـخ
أمـر
بسـجدة
|
|
وإبليــس
لــم
يســجد
فأسـخط
ربـه
|
وحلــت
بــه
مــن
مقتـه
شـر
لعنـة
|
|
لـــذلك
احتـــال
الصــفيَّ
وزوجــه
|
بحيلتــه
فــي
حيــن
كانــا
بجنـة
|
|
وقـال
كلا
مـن
شـجرة
النهـى
مطمعـا
|
لــه
ولهــا
ف
الخلــد
والملكيــة
|
|
فلمــا
ألمــا
بــالخطيئة
أهبطــا
|
مـن
الجنـة
العليـا
إلـى
دار
وحشة
|
|
وحــل
بهــم
كــرب
عظيــم
وحســرة
|
وخــوف
مقيــم
فـي
انقطـاع
وغربـة
|
|
إلـــى
أن
تلقــى
آدم
مــن
إلهــه
|
مــن
الكلمــات
الموجبــات
لتوبـة
|
|
فتـــاب
عليـــه
فاجتبــاه
وخصــه
|
وأكرمـــه
فضـــلاً
بــأمر
الخلافــة
|
|
وأسـرار
أمـر
اللَـه
نوحـاً
وقَد
دعا
|
علــى
قـومه
أن
يغرقـوا
بالسـفينة
|
|
ليركبهـــا
والمؤمنـــون
وأهلـــه
|
وزوجــان
مــن
كـل
الوجـود
لحكمـة
|
|
وللَـــه
فــي
آل
الخليــل
ســرائر
|
تجــل
عــن
الإحصــاء
عــدا
لكـثرة
|
|
رأى
كواكبـاً
فـي
أول
الأمـر
فانتهى
|
بـه
الحـال
تـدريجيا
لإفـراد
وجهـة
|
|
وكســـر
إبراهيــم
أصــنام
قــومه
|
وأبقـى
كـبيراً
كـي
يروحـوا
بخزيـة
|
|
إذا
مـا
أحيلوا
في
السؤال
عليه
لم
|
يـــرد
وأنــي
مــن
جمــاد
وميــت
|
|
فقـــامت
عليـــه
حجـــة
أي
حجــة
|
فكــادوا
لــه
كيـداً
بنـار
عظميـة
|
|
لــه
أوقـدوها
ثـم
ألقـوه
فـانثنت
|
عليـه
بـأمر
اللـه
فـي
مثـل
روضـة
|
|
وفــي
قصــة
الأطيــار
وهـي
عجيبـة
|
وكـم
مـن
أمـور
فـي
الوجـود
عجيبة
|
|
كأســرار
موســى
حيـن
ألقتـه
أمـه
|
رضـيعاً
بـأمر
اللَـه
فـي
وسـط
لجـة
|
|
فجـاءت
بـه
الأقـدار
حـتى
أتـت
بـه
|
عــدواً
هـو
المخشـي
فـي
أصـل
قصـة
|
|
فربـاه
حـتى
كـان
مـا
كـان
وانتهى
|
نهـــايته
فــاعجب
لأســرار
قــدرة
|
|
وحيــن
رأى
نــاراً
فــأمكث
أهلــه
|
وجــاء
إليهــا
للهــدى
أو
لجـذوة
|
|
فنـودي
من
الوادي
أنا
اللَه
فاستمع
|
لمــا
أنــا
مـوح
وانطلـق
برسـالة
|
|
وكلمـــه
ســـبحانه
بعـــد
هـــذه
|
علــى
طــور
سـينا
مـرة
بعـد
مـرة
|
|
وكـم
فـي
العصـا
واليد
من
سر
قدرة
|
كتكــذيب
فرعــون
وإيمــان
ســحرة
|
|
وعيسـى
مـن
الآيـات
فـي
أصـل
كـونه
|
بـــدون
أب
عـــن
نفحـــة
قدســية
|
|
وقـد
كـان
يحيـى
الميت
عن
إذن
ربه
|
ويــبرئ
بـإذن
اللَـه
مـن
كـل
علـة
|
|
ويخلـــق
مــن
طيــن
كهيئة
طــائر
|
فيحيــا
بســر
منـه
مـن
سـر
نفخـة
|
|
وإن
لــه
فــي
آخـر
الـوقت
مهبطـاً
|
إلــى
الأرض
بيــن
الأمــة
الأحمديـة
|
|
وعــن
آل
إســرائيل
حــدث
ففيهــم
|
أعـــاجيب
نــص
الســنة
النبويــة
|
|
وقــد
جمــع
الأســرار
والأمـر
كلـه
|
محمـــد
المبعــوث
للخلــق
رحمــة
|
|
بــه
ختــم
اللَـه
النبـوة
وابتـدا
|
فللَـــه
مــن
ختــم
بــه
وبدايــة
|
|
وإن
رســول
اللــه
مـن
غيـر
مريـة
|
إمــام
علــى
الإطلاق
فـي
كـل
حضـرة
|
|
وجيـه
لـدى
الرحمـن
فـي
كـل
مـوطن
|
وصــدر
صــدور
العــارفين
الأئمــة
|
|
أتـاه
أميـن
اللَـه
بـالوحي
في
حرا
|
وكــان
بــه
فـي
حـال
نسـك
وخلـوة
|
|
فقــال
لـه
اقـرأ
قـال
لسـت
فغطـه
|
وأرســــله
حــــي
الثلاث
فتمــــت
|
|
وفــي
طــي
هــذا
ســر
علـم
محجـب
|
لـه
يهتـدي
أهـل
القلـوب
المنيـرة
|
|
وكـان
بـه
الإسـراء
مـن
خيـر
مسـجد
|
إلـى
المسـجد
الأقصـى
إلى
أوج
ذروة
|
|
مـن
المسـتوى
والقـاب
قوسـين
قربه
|
مــن
اللَــه
أو
أدنـى
وخـص
برؤيـة
|
|
وأوحــى
الــذي
أوحـى
إليـه
إلهـه
|
علومــاً
وأسـراراً
وكـم
مـن
لطيفـة
|
|
وشـــاهد
جنــات
ونــاراً
وبرزخــاً
|
وأحـــوال
أملاك
وأهـــل
النبـــوة
|
|
وصــلى
وصـلوا
خلفـه
فـإذا
هـو
ال
|
مقــدم
وهـو
الـرأس
لأهـل
الرياسـة
|
|
حــبيب
خليــل
عظــم
اللَــه
قـدره
|
جميـــل
جليــل
ذو
بهــاء
وهيبــة
|
|
له
الدعوة
العظمى
كذا
الرتب
العلا
|
لــه
الملــة
الغـرا
وخيـر
بسـطوة
|
|
وقــد
قــرن
المحمــود
اسـم
محمـد
|
مــع
اسـمه
والـذكر
فـاعزز
برفعـة
|
|
وآيــة
حــب
اللَــه
منــا
اتبـاعه
|
بــه
وعــد
الغفـران
بعـد
المحبـة
|
|
ومــن
يطــع
الهــادي
أطـاع
إلهـه
|
ومــن
يعصــه
يعــص
الإلــه
ويمقـت
|
|
ومــن
بــايع
المختـار
بـايع
ربـه
|
يـد
اللَـه
مـن
فـوق
الأيادي
الوفية
|
|
وآل
رســـول
اللَـــه
بيــت
مطهــر
|
محبتــــه
مفروضــــة
كــــالوارد
|
|
هــم
الحـاملون
السـر
بعـد
نـبيهم
|
ووراثــه
أكــرم
بهــا
مـن
وراثـة
|
|
وأصــحابه
الغــر
الكــرام
أثمــة
|
مهـــاجرهم
والقـــائمون
بنصـــرة
|
|
نجـوم
الهـدى
أهـل
الفضائل
والندى
|
لقـد
أحسـنوا
فـي
حمـل
كـل
أمانـة
|
|
ومتبـــوعهم
فــي
ســلوك
ســبيلهم
|
إلـى
اللَـه
عـن
حسـن
انتفاء
وأسوة
|
|
أولئك
قـوم
قـد
هـدى
اللَـه
فاقتده
|
بهــم
واســتقم
والــزم
ولا
تنفلـت
|
|
ولا
تعـد
عنهـم
إنهـم
مطلـع
الهـدى
|
وهـم
قـد
بلغـوا
علـم
الكتاب
وسنة
|
|
فـذو
القـدح
فيهـم
هـاذم
أصل
دينه
|
ومقتحــم
فــي
لــج
زيــغ
وبدعــة
|
|
فمــا
بعـد
هـدي
المصـطفى
وصـحابه
|
هـدى
ليسـى
بعـد
الحـق
إلا
الضـلالة
|
|
أبـان
كتـاب
اللـه
فيمـا
ابـان
عن
|
مســـالك
فقــه
واعتبــار
وعــبرة
|
|
وأحـوال
مـن
يـأتي
وأحـوال
من
مضى
|
وأنبــاء
ترغيــب
وانبــاء
رهبــة
|
|
ومنشــور
أحكــام
ومــأثور
حكمــة
|
ومســتور
أسـرار
العلـوم
الدقيقـة
|
|
وعـن
كـل
مـا
يحتـاجه
الخلـق
كلهم
|
بــدين
ودنيـا
فـي
اجتمـاع
ووحـدة
|
|
وشــرح
الصــراط
المسـتقيم
وحثهـم
|
عليــه
وأحــوال
المعــاد
ورجعــة
|
|
وعــن
كـل
فـرض
أوجـب
اللَـه
تركـه
|
ومـا
جـازه
الأشـكال
مـن
شـأن
شبهة
|
|
وحفـظ
قـوانين
المعـاش
ومـا
به
ال
|
قــوام
وضــب
الكـل
تحـت
السياسـة
|
|
وأحــوال
أربــاب
الرسـالة
والـذي
|
بــه
أيــدوا
مــن
معجـزات
جليلـة
|
|
وأحــوال
مــن
رد
الهــدى
فتعجلـت
|
لـه
قبـل
يـوم
الحشـر
بعض
العقوبة
|
|
ومعرفــة
الــذات
العلــي
علاؤهــا
|
بمــا
لا
خفـا
فيـه
علـى
ذي
بصـيرة
|
|
ومعرفــة
الأوصـاف
فـي
عظـم
شـأنها
|
وجملـــة
أوصـــاف
الإلــه
عظيمــة
|
|
ســـماء
وأرض
والجبـــال
وأبحـــر
|
وريــح
ونبــت
والســحاب
المظلــة
|
|
وعـــرش
وكرســي
أو
شــمس
وظلمــة
|
ونـــور
وأملاك
الطبــاق
الرفيعــة
|
|
وجـــن
وإنــس
والجمــادات
كلهــا
|
وطيـــر
وأســـماك
وكـــل
بهيمــة
|
|
وكــم
غيــر
هــذا
والجميـع
مسـبح
|
لخــــالقه
ســـبحان
رب
البريـــة
|
|
تبــارك
مــن
عــم
الـووى
بنـواله
|
وأوســـعهم
فضــلاً
باســباغ
نعمــة
|
|
وقـــدر
أرزاقــاً
لهــم
ومعايشــاً
|
ودبرهــم
فــي
كــل
طــور
ونشــأة
|
|
أحــاط
بهـم
علمـا
وأحصـى
عديـدهم
|
وصـــرفهم
عــن
حكمــه
والمشــيئة
|
|
وللَـــه
بيــن
المــؤمنين
ومنهــم
|
بكــل
زمــان
كــم
منيــب
ومخبــت
|
|
وكــم
ســالك
كــم
ناســك
متعبــد
|
وكــم
مخلــص
فـي
غيبـه
والشـهادة
|
|
وكــم
صــابر
كــم
صــادق
متبتــل
|
إلـى
اللَـه
عـن
قصـد
صـحيح
وعزمـة
|
|
وكـم
قـانت
قـوام
فـي
غسـق
الـدجى
|
مــن
الخـوف
محشـو
الفـؤاد
ومهجـة
|
|
ينـــاجي
بآيــات
القــرآن
إلهــه
|
بصــوت
حزيــن
مــع
بكــاء
بعـبرة
|
|
وكــم
ضـامر
الأَحشـاء
يطـوي
نهـاره
|
بحـــر
هجيـــر
ماتهنـــا
بشــربة
|
|
وكــم
مقبــل
فــي
ليلــه
ونهـاره
|
علــى
طاعــة
المــولى
يجـد
وهمـة
|
|
وكـم
زاهـد
فـي
هـذه
الـدار
معـرض
|
ومقتصــر
منهــا
علــى
حــد
بلغـة
|
|
تزينـــت
الــدنيا
لــه
وتزخرفــت
|
فغــض
ولــم
يغــتر
منهــا
بزينـة
|
|
وكـم
معـرض
عـن
صـحبة
الخلـق
موثر
|
لوحــــدته
والانقطــــاع
وعزلـــة
|
|
وكـم
عـالم
بالشـرع
نـاه
عن
الردى
|
بمــوجبه
فــي
حــال
يســر
وعسـرة
|
|
وكـم
آمـر
بالشـرع
نـاه
عـن
الردى
|
سـريع
إلـى
الخيـرات
مـن
غير
فترة
|
|
وكـــم
مــن
ولــي
للإلــه
بأرضــه
|
وكــم
عــارف
مسـتهتر
فـي
المحبـة
|
|
وكــم
مــن
أميــن
حامــل
لأمانــة
|
مــن
السـر
لا
تفشـي
لأهـل
الخيانـة
|
|
وصــاحب
كشـف
قـد
تجلـت
لقلبـه
ال
|
حقــائق
فــي
أطوارهــا
العلويــة
|
|
فأبـــدالهم
أوتـــادهم
نقبــاؤهم
|
مـع
النجبـا
والقطـب
رأس
العصـابة
|
|
أولئك
أبــدال
النــبيين
أبــرزوا
|
لفضــل
رسـول
اللَـه
فـي
خيـر
ملـة
|
|
عبــاد
كــرام
آثـروا
اللَـه
ربهـم
|
فــــآثرهم
واختصـــهم
بالولايـــة
|
|
وآســهم
بــالقرب
منــه
وبالرضــا
|
حبــاهم
وأســقاهم
بكــاس
المـودة
|
|
بهـم
يـدفع
اللَه
البلايا
ويكشف
الرَ
|
زايــا
ويبــدي
كــل
خيــر
ونعمـة
|
|
ولـــولاهم
بيــن
الأنــام
لدكــدكت
|
جبـــال
وأرض
لارتكـــاب
الخطيـــة
|
|
أيـا
صـاحبي
والنصـح
دأبـي
ومذهبي
|
علــى
بــه
أخــذ
العهـود
الأكيـدة
|
|
ألا
فـالق
سـمعاً
واعيـاً
لقبـول
مـا
|
أشــير
بــه
تحمــد
أخــي
مشـورتي
|
|
عليـك
بتصـحيح
الأسـاس
الـذي
هو
ال
|
يقيـن
وروح
الـدين
مـن
غيـر
مرية
|
|
فمــن
علمــه
إن
صــح
صـحت
لـك
ال
|
حقيقـــة
مــن
إيمانــك
العلميــة
|
|
ومــن
حقــه
أن
حــق
حقــت
لـك
ال
|
حقيقــة
مــن
إحســانك
المعنويــة
|
|
مقامـــاته
تســع
عليــك
بحفظهــا
|
وأحكامهــا
وأبــدأ
بتصـحيح
توبـة
|
|
وخــوف
ونعـم
الخـوف
للعبـد
سـائق
|
ونعــم
الرجـا
مـن
قـائد
للسـعادة
|
|
وصـــبر
جميــل
عنــد
كــل
بليــة
|
وأمـــر
ونهــي
أو
ركــون
لشــهوة
|
|
وشــكر
علـى
النعمـى
برؤيـة
منعـم
|
وصـرف
الـذي
اسـداه
فـي
سـبل
طاعة
|
|
وصـحح
مقام
الزهد
فهو
العماد
والت
|
وكــل
وهـو
الـزاد
فـي
خيـر
رجلـة
|
|
وحــب
إلــه
العـالمين
مـع
الرضـا
|
بكــل
الـذي
يقضـيه
فـي
كـل
جالـة
|
|
وجاهـد
تشـاهد
واغنم
الوعد
بالهدى
|
هــدى
نصــه
فــي
العنكبـوت
بآيـة
|
|
وحـافظ
علـى
المفـروض
مـن
كل
طاعة
|
وأكـثر
مـن
النفـل
المفيـد
لقربـة
|
|
بكنـت
لـه
سـمعاً
إلـى
آخـر
النبـا
|
عـن
اللَـه
فـي
نـص
الرسـول
المثبت
|
|
وجـانب
هـديت
النهـى
مـن
كـل
جانب
|
ونطــق
علــى
حــد
اقتصــار
وقلـة
|
|
وجـالس
كتـاب
اللـه
واحلـل
بسـوحه
|
وكـن
ذاكـراً
فالـذكر
نـور
السريرة
|
|
عليــك
بــه
فــي
كـل
حيـل
وحالـة
|
وبــالفكر
إن
الفكـر
كحـل
الصـيرة
|
|
وكــن
أبــداً
فــي
رغبــة
وتضــرع
|
إلـي
اللَـه
عـن
صـدق
افتقار
وفاقة
|
|
ووصــف
اضــطرار
وانكســار
وذلــة
|
وقلــب
طفــوح
بــالظنون
الجميلـة
|
|
وحقـق
طريـق
القـوم
واعلـم
أصولهم
|
وكــل
اصـطلاح
بينهـم
فـي
الطريقـة
|
|
كفـــرق
وجمــع
والحضــور
وغيبــة
|
وصـــحو
ومحــو
وانفصــال
ووصــلة
|
|
ولا
بــد
مــن
شــيخ
تســير
بسـيره
|
إلـى
اللَـه
مـن
أهل
القلوب
الزكية
|
|
مــن
العلمــاء
العــارفين
بربهـم
|
فـإن
لـم
تجـد
فالصـدق
خيـر
مطيـة
|
|
وبعــد
فــإن
الحــق
أفضــل
مسـلك
|
ســلكت
وتقــوى
اللَـه
خيـر
بضـاعة
|
|
ومــن
ضـيع
التقـوى
وأهمـل
أمرهـا
|
تغشـته
فـي
العقـبى
فنـون
الندامة
|
|
ومـن
كـانت
الـدنيا
قصـارى
مـراده
|
فقـد
بـاء
بالخسـران
يـوم
القيامة
|
|
ومـن
لـم
يكـن
فـي
طاعة
اللَه
شغله
|
علــي
كــل
حــال
لا
يفــوز
ببغيـة
|
|
ولا
ينشـق
الفيـاح
مـن
طيب
حضرة
ال
|
وصــال
إذا
هبــت
نصــيم
العنايـة
|
|
ومـن
أكـثر
العصـيان
مـن
غير
توبة
|
فــذاك
طريـح
فـي
فيـافي
الغوايـة
|
|
بعيـد
عـن
الخيـرات
حـل
بـه
البلا
|
وواجهــه
الخــذلان
مــن
كـل
وجهـة
|
|
عجيــب
لمــن
يوصــي
ســواه
وإنـه
|
لأجـــدر
منـــه
باتبــاع
الوصــية
|
|
يقـــول
بلا
فعــل
ويعلــم
عــاملاً
|
علـى
ضـد
علـم
يـا
لهـا
مـن
خسارة
|
|
علــوم
كأمثــال
البحــار
تلاطمــت
|
وأعمــاله
فــي
جنبهـا
مثـل
قطـرة
|
|
وقـد
أنفـق
الأيـام
فـي
غيـر
طـائل
|
كمثــل
الليــالي
إذا
تقضـت
وولـت
|
|
علـى
السـوف
والتسـويف
شـر
مصـاحب
|
وقــول
عســى
عــن
فــترة
وبطالـة
|
|
ينكــب
عجــزاً
عــن
طريــق
عزيمـة
|
ومـــالٌ
لتأويـــل
ضــعيف
ورخصــة
|
|
يهـــم
بلا
جـــد
وليـــس
بنـــاهض
|
علـى
قـدم
التشـمير
مـن
فـرط
غفلة
|
|
وقـد
سـار
أهـل
العـزم
وهـو
مثبـط
|
وقـد
ظفـروا
بـالقرب
مـن
خير
حضرة
|
|
وقــد
نـالوا
المطلـوب
وهـو
مقيـد
|
بقيــد
الأمـاني
والحظـوظ
الخسيسـة
|
|
ولـم
نتهـز
مـن
فـائت
العمـر
فرصة
|
ولــم
يغتنــم
خــالي
فـراغ
وصـحة
|
|
ولــم
يخــش
أن
يفجـأه
مـوت
مجهـز
|
فــإن
مجيــء
المــوت
غيــر
مـؤقت
|
|
ولـــم
يتـــأهب
للرجـــوع
لربــه
|
ولــم
يــتزود
للطريــق
البعيــدة
|
|
وبيـن
يـديه
المـوت
والقبر
والبلا
|
وبعــث
وميــزان
وأخــذ
الصــحيفة
|
|
وجســر
علــى
متـن
الجحيـم
وموقـف
|
طويــل
وأهــوال
الحسـاب
المهولـة
|
|
ولكنــه
يرجــو
الــذي
عــم
جـوده
|
وإحســانه
والفضــل
كــل
الخليقـة
|
|
إلـــه
رحيـــم
محســـن
متجـــاور
|
إليــه
رجــوعي
فـي
رخـائي
وشـدتي
|
|
غيــاثي
إذا
ضــاقت
علــيَّ
مـذاهبي
|
ومنــه
أرجــى
كشــف
ضــري
وشـدتي
|
|
وحســـبي
كفــاني
علمــه
واطلاعــه
|
علـى
مـا
بقلـبي
والفـؤاد
وجملـتي
|
|
هربــت
بتقصــيري
وفقــري
وفـاقتي
|
إليــه
وعــذري
راجيـاً
نيـل
رحمـة
|
|
ووجهـــت
وجهــي
قاصــداً
لغنــائه
|
علــى
رغبــة
منــي
بإعطـاء
رغبـة
|
|
فيــا
نفحــات
اللَــه
يـا
عطفـاته
|
ويــا
جــذبات
الحـق
جـودي
بـزورة
|
|
ويــا
نظــرات
اللَــه
يـا
لحظـاته
|
ويــا
نســمات
القــرب
أمـي
بهبـة
|
|
ويــا
غــارة
الرحمـن
جـدي
بسـرعة
|
إلينــا
وحلــى
عقــد
كــل
ملمــة
|
|
ويــا
رحمـة
الـرب
الرحيـم
تـوجهي
|
وأحيــي
بــروح
الفضـل
كـل
رميمـة
|
|
ويــا
كــل
أبـواب
القبـول
تفتحـي
|
فــإن
مطايــا
القصــد
نحـوك
أمـت
|
|
ويــا
ســحب
الجـود
الإلهـي
أمطـري
|
فــإن
أكــف
المحــل
تلقــاك
مـدت
|
|
بحرمــة
هادينــا
ومحيــي
قلوبنـا
|
ومرشــدنا
نهــج
الطريـق
القويمـة
|
|
دعانـــا
إلــى
حــق
بحــق
منــزل
|
عليــه
مــن
الرحمــن
أفضـل
دعـوة
|
|
أجبنـــا
قبلنــا
مــذعنين
لأمــره
|
ســمعنا
أطعنــا
عـن
هـدى
وبصـيرة
|
|
فيـا
رب
ثبتنـا
علـى
الحـق
والهدى
|
ويــا
رب
اقبضــنا
علـى
غيـر
ملـة
|
|
وعـــم
أصـــولاً
والفــروع
برحمــة
|
وأهلاً
وأصــــحاباً
وكـــل
قرابـــة
|
|
وسـائر
أهـل
الـدين
مـن
كـل
مسلم
|
أقـام
لـك
التوحيـد
مـن
غيـر
ريبة
|
|
وصــل
وســلم
دائم
الــدهر
سـرمداً
|
علــى
خيـر
مبعـوث
إلـى
خيـر
أمـة
|
|
محمــد
المبعــوث
منــك
بفضـلك
ال
|
عظيــم
وإنــزال
الكتــاب
وحكمــة
|