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تعالى
شأن
ذي
العرش
المجيد
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وجلـت
حكمـة
الملـك
الحميد
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مليــك
عـز
سـلطانا
وقهـرا
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فــذلل
كــل
جبــار
عنيــد
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ومـد
علـى
البسيطة
منه
ظلا
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فيــا
للــه
مـن
ظـلِّ
مديـد
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إلـى
أعتـابه
مـن
راح
يأوى
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فقــد
آوى
إلـى
ركـن
شـديد
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وكفـل
بالخلافة
وارثيها
اله
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داة
الصـالحين
مـن
العبيـد
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لـبيتهموا
أبـوهم
ساق
هديا
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كهـدي
سـميه
المولى
الشهيد
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أسـاطين
قـد
انتظمـت
فكانت
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لنظــم
بلاده
بيــت
القصـيد
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بهـم
ديـن
النـبي
علا
منارا
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حكـى
صـبحا
يلـوح
على
عمود
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همـو
قد
توَّجوا
قمم
المعالي
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ودرَّة
تــاجهم
عبـد
المجيـد
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تسـلطن
يافعـا
فأعـاد
شرخا
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لشـيبة
حمـد
سـلطنة
الجدود
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وشـمطاء
الخلافـة
فيـه
عادت
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شـبيهتها
فماسـت
فـي
بـرود
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بعهـد
مـن
أبيـه
رجـال
حـلٍّ
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وعقـد
حـالفوه
علـى
العهود
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وبويـع
بالخلافـة
فاشـتراها
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بنقـد
العـدل
لا
عين
النقود
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جلـــوس
للجلال
بــه
وقــوف
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ثناه
إلى
القيام
عن
القعود
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وعقـد
صـح
قـول
الحـق
فيـه
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لأهـل
العهـد
أوفوا
بالعقود
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وعــرش
لا
يثـلِّ
قـد
اسـتقرت
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دعـائمه
علـى
سـعد
السـعود
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فسـيح
حمـى
الخلافة
كم
مليك
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أنـاخ
الرحـل
منـه
بالوصيد
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مــآثره
بلبــات
المعــالي
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وجيـد
المجد
كالعقد
النضيد
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قد
انتاش
المعالي
بالعوالي
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وجيـد
المجد
كالعقد
النضيد
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قد
انتاش
المعالي
بالعوالي
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وبالعزمـات
والـرأي
السديد
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وكـاد
الملـك
يؤذن
في
هبوط
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فـأدركه
فهـا
هـو
فـي
صعود
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