|
الحمــد
للــه
علــى
مـا
قسـما
|
والشــرك
للــه
علـى
مـا
رسـما
|
|
مـــن
نعمـــة
ســابغة
وحكمــة
|
بالغـــة
بهــا
علينــا
حكمــا
|
|
لــه
عميــم
الفضــل
إذ
خصصـني
|
بمــا
بــه
أشـياخ
عصـري
عممـا
|
|
مـن
نعـت
أهـل
بيـت
خيـر
خلقـه
|
صـــلى
عليــه
وعليهــم
ســلما
|
|
نعــت
حــوى
فــرائدا
مــن
درر
|
عقـــد
مــوالاتي
بهــا
تنظمــا
|
|
إنـــي
وكـــل
كلمــة
نقطتهــا
|
عبابهـــا
يســتغرق
العطمطمــا
|
|
تصـــعدت
منــه
ســحائب
الأســى
|
فصــوبت
مــن
الــدموع
الـديما
|
|
كـــانون
جمــر
أججــت
زفرتــي
|
فــي
قلــب
كــل
مــؤمن
تضـرما
|
|
أم
درج
درِّ
كـــان
ثغــري
وبــه
|
قــد
قــرط
الاســماع
إذ
تكلمـا
|
|
أم
أســهم
قــد
نثلتهـا
فكرتـي
|
تهتانهـا
مثـل
الغمـام
انسـجما
|
|
فــرائد
بهــا
الثريــا
كللــت
|
وكفهــا
الخضــيب
قــد
تختمــا
|
|
منمنمــا
لاح
بهــا
ثـوب
السـما
|
ثــوب
الســما
لاح
بهـا
منمنمـا
|
|
لمـا
حكتهـا
طلعـة
الزهـر
دجـا
|
مـدَّ
إلـى
تقبيلهـا
الصـبح
فمـا
|
|
شــك
كلــي
كيـوان
منهـا
رامـح
|
فطــرَّز
الافــق
بمحمــر
الــدما
|
|
بنـــات
نعــش
كلمــا
تلوتهــا
|
أبـدى
سـهاما
من
أسى
ما
اكتتما
|
|
بالفرقـــدين
الحســنين
زينــت
|
أوراقهـا
فـافتخرت
علـى
السـما
|
|
وأودعــت
فــي
القمريــن
حسـرة
|
أهــدت
خســوفا
وكســوفا
لهمـا
|
|
وقـد
كسـت
بـرق
الغـوير
من
حلى
|
وميضــها
الاسـنى
طـرازا
معلمـا
|
|
وجلجــل
الرعــد
بركــب
ســحبه
|
غـداة
حـادي
العيـس
فيها
زمزما
|
|
تغنــى
الـذي
ينشـدها
فـي
سـفر
|
بقطعــه
النفنــف
عـن
زاد
ومـا
|
|
فهـــي
لمرتــاد
وعــارف
وصــد
|
روض
نمــا
غيـث
همـي
بحـر
طمـا
|
|
كـم
مـن
عراقـي
بهـا
قـد
أشأما
|
وكــم
حجــازي
بهـا
قـد
أتهمـا
|
|
إن
فـاه
ثغـر
مدلـج
بهـا
امتطى
|
مــن
ليلــه
طرفـا
أغـر
أدهمـا
|
|
كوثرهــا
العــذب
الـزلال
حـوله
|
أضــحت
قلــوب
المـؤمنين
حومـا
|
|
وفـــي
غـــدير
خمهـــا
ولجــه
|
تلقــى
صــدور
المتقيــن
عومـا
|
|
ســوق
عكــاظ
الملا
الأعلـى
بهـا
|
قــام
وكــان
المشــتري
مقومـا
|
|
مــن
شمســه
وبــدره
أوج
العلا
|
أنقــذ
دينــارا
بهــا
ودرهمـا
|
|
كـــل
فريـــدة
بهـــا
يتيمــة
|
قــد
نصـب
الحـزن
عليهـا
قيمـا
|
|
لنســخها
عطــارد
المجــد
بـرى
|
بحـــد
شـــفرة
الهلال
القلمــا
|
|
علــى
الســموات
تسـامى
شـأوها
|
فـاحتط
منهـا
كـل
عالي
المستمى
|
|
إن
أبـرم
الـدهر
الحبـالات
بهـا
|
انقــض
مـن
ابرامـه
مـا
أبرمـا
|
|
تفتــت
الاكبــاد
فــي
ترديـدها
|
ورق
معانيهـــا
فتغــدو
رممــا
|
|
لاســيما
إن
تليــت
فــي
مــأتم
|
فــي
مــأتم
إن
تليــت
لا
سـيما
|
|
هيــف
غوانيهــا
هضــيم
كشـحها
|
قـد
شـدت
الجـوزا
عليـه
محزمـا
|
|
لهــا
إلــى
أعتـاب
بـاب
حيـدر
|
وابنيـه
والطهـر
البتـول
منتمى
|
|
لـي
مغنمـا
لـم
أر
غيـر
مـدحهم
|
لـم
أر
غيـر
مـدحهم
لـي
مغنمـا
|
|
هــم
للوجـود
روحـه
مـن
بعـدهم
|
لــذلك
اختـار
الوجـود
العـدما
|
|
أئمــة
الهـدى
بهـم
مـن
اقتـدى
|
مــن
الــردى
يـأمن
أيـن
يممـا
|
|
هــم
النجــوم
كـم
لهـم
مواقـع
|
فــي
كــربلا
بهـا
الالـه
أقسـما
|
|
بهـم
حمـى
الـدين
الحنيفـي
علا
|
وعــز
فيهــم
جانبــاه
واحتمـى
|
|
عــوارض
قــد
عارضــتهم
شــيبت
|
مــن
الليــالي
إذ
ألمـت
لممـا
|
|
سـل
الربيـع
عـن
مزايـاهم
وعـن
|
شــهر
رزايــاهم
ســل
المحرَّمـا
|
|
شــهر
بــه
قـد
شـهر
البلا
علـى
|
يــافوخ
كــربلا
حســاما
مخـذما
|
|
شــهر
بــه
البغـي
غـدا
مشـهرا
|
والجــور
للانصــاف
فيـه
دمـدما
|
|
شــهر
بــه
الطفـوف
طـافت
بـدم
|
فـــأنبتت
شـــقائقا
وعنـــدما
|
|
شــهر
بـه
الشـمس
حكـت
بشـكلها
|
مـن
فـوق
عـاتق
السـماء
محجمـا
|
|
شـهر
بـه
انشـقت
مـرارة
الحيـا
|
مــن
حنـق
حـتى
اسـتحال
علقمـا
|
|
شــهر
بــه
الكلـب
غـدا
مسـلطا
|
علـى
ابـن
مـن
للـه
كـان
ضيغما
|
|
شـهر
بـه
الـدين
المـبين
بعدما
|
أظهــره
اللـه
اختفـى
واكتتمـا
|
|
شـهر
بـه
جـرى
علـى
أهـل
الكسا
|
مــن
الاسـى
مـا
عـز
أن
يترجمـا
|
|
شـهر
بـه
إن
قيـل
لي
صف
ما
جرى
|
قلــت
لســائلي
صــه
مـا
كلمـا
|
|
شـهر
بـه
عيـن
العلا
قـد
اشـتكت
|
علـى
الحسـين
مـن
بكائها
العمى
|
|
قاصــمى
الظهــر
ببطــن
حــائر
|
بهـا
قـوام
ابـن
الإمـام
انقصما
|
|
ووجنــة
المريــخ
مــن
نجيعــه
|
كــف
الثريــا
ضــمختنها
عنمـا
|
|
ود
عمــود
الصــبح
لــو
نيابـة
|
عنــد
بــأطراف
القنــا
تحطمـا
|
|
وأثخنـــوه
فــي
جــروح
ركبــت
|
لهـا
يـد
اللـه
الحكيـم
مرهمـا
|
|
بــدر
ســما
وجـوده
قـد
أطلعـت
|
مــن
طعـن
آل
عبـد
شـمس
أنجمـا
|
|
مــا
لفــت
الاحقـاب
فـي
حقيبـة
|
كيــومه
لا
عــاد
يومــا
أيومـا
|
|
مــن
عـدَّة
الايـام
عاشـوراء
لـو
|
يــدري
بمـا
يجـري
بـه
لانهزمـا
|
|
أو
أن
فــــي
ذا
محرمــــا
درى
|
مـن
رجـب
كـان
اسـتعار
الصـمما
|
|
وانفتخــت
أوداج
خقـد
قـد
علـت
|
أنفاســــه
وأنفــــه
تورمـــا
|
|
وشــمر
الشــمر
اللعيـن
سـاعدا
|
بـه
علـى
كسـب
الشـقا
قـد
عزما
|
|
وحـــز
رأس
مـــن
برجــل
جــده
|
بســاط
عــرش
اللـه
قـد
تكرمـا
|
|
رأس
بتيجــــان
العلا
تتــــوجت
|
وفــي
عمــائم
الحيــا
تعممــا
|
|
رأس
عــن
الاســلام
مرتــدا
غـدا
|
مــن
راح
أو
غــدا
بــه
مهوَّمـا
|
|
علــى
سـنان
الرمـح
مـن
هـامته
|
ســـنبلة
زكــت
وفرعهــا
نمــا
|
|
إن
كـان
ذاك
الرمـح
يحكـي
ألفا
|
بنقطــة
البــاء
لمـاذا
أعجمـا
|
|
فمــا
ســمعنا
عـاملا
مـن
قبلـه
|
يرفــع
مــن
أعلام
ربــي
علمــا
|
|
قــد
اقشـعرَّت
جلـدة
الـدين
لـه
|
وقــف
شــعره
يعــاني
الســدما
|
|
والعـروة
الـوثقى
من
الدين
وهت
|
والشـرع
حبلـه
المـتين
انفصـما
|
|
بكـى
الحيـا
عليـه
والصـون
نعى
|
والكــف
عــن
حريمـه
قـد
لطمـا
|
|
والأرض
أشـــرقت
بنـــور
ربهــا
|
مــن
حـوله
ومـا
عـداها
أظلمـا
|
|
وسلسـلت
سـورة
هـل
أتى
على
الا
|
نســان
دمعـا
كالغمـام
انسـجما
|
|
قــد
عــزت
الحـور
بـه
حواكمـا
|
قــد
عـزت
الولـدان
فيـه
آدمـا
|
|
نـاحت
عليـه
الانـس
والجـن
معـا
|
والطيـر
والـوحش
أقـامت
مأتمـا
|
|
وصــاحت
الســبع
السـموات
ومـن
|
فيهـا
ومـن
فـي
الأرض
قـد
تظلما
|
|
وا
حربــا
وا
عطبــا
وا
ألمــا
|
وا
لهفــا
وا
أســفا
وا
نــدما
|
|
حسن
ابتدائي
واختتامي
في
الثنا
|
علـــى
حســـين
حســـن
كلاهمــا
|
|
تعــادلا
فـي
الحسـن
إذ
تسـاقطا
|
آونـــة
فــذا
وطــورا
توأمــا
|
|
يكـــاد
أن
يســبق
مــن
خفتــه
|
ولطفـــه
المـــؤخر
المقـــدما
|
|
فــي
كـل
بيـت
أجمـة
بهـا
ثـوى
|
معنـى
إذا
الفكـر
انتحاه
همهما
|
|
وهـــذه
خاتمـــة
بهـــا
كتــا
|
ب
الباقيـات
الصـالحات
اختتمـا
|
|
جعلتهــا
وســيلة
أرقــى
بهــا
|
يــوم
الحســاب
مـن
ولائي
سـلما
|
|
لــذاك
قلــت
رافعــا
عقيرتــي
|
بالشــــكر
أملأ
الملا
ترنمــــا
|
|
علـيَّ
ذو
الطـول
العميـم
أرخـوا
|
بالباقيــات
الصــالحات
أنعمـا
|