|
زيــارة
الكــاظمين
فـي
رجـب
|
تنقـذ
يـوم
اللقـا
مـن
اللهب
|
|
تعــدل
حجــا
ووقفــة
بمنــى
|
وعمــــرة
كلهـــا
بلا
نصـــب
|
|
أي
وأبــي
لا
يخــاف
هـول
غـد
|
مـن
حازها
في
الزمان
أي
وأبي
|
|
أنـخ
مطايـا
الرجـا
ببابهمـا
|
وحـط
كـور
العنـا
عـن
النجـب
|
|
مـن
شـاهد
الفرقـدين
قبلهمـا
|
فــي
ســفطي
قبـتين
مـن
ذهـب
|
|
حــاز
معاليهمــا
وقـد
عجـزت
|
عـن
حصـر
بعـض
سـرادق
الحجـب
|
|
ليــس
عجيبـا
أننـال
رفـدهما
|
عبــد
وحرمــانه
مــن
العجـب
|
|
بحـرا
نـدي
مـن
تصعيد
جودهما
|
فـاض
علـى
النـاس
واكف
السحب
|
|
بـدرا
كمـال
الوجـود
فـي
مضر
|
شمسـا
فخـار
السعود
في
العرب
|
|
حـاز
المرجـى
المنـى
بظلهمـا
|
ومنهمــا
نــال
غايـة
الطلـب
|
|
مجــدهما
بيــض
الزمـان
سـنى
|
وســوَّد
الفضــل
جملـة
الكتـب
|
|
وكـم
حشـى
بالأسـى
قـد
استعرت
|
فأطفأهــا
بــالكوثر
العــذب
|
|
كــاظم
غيـظ
لـه
الرضـا
ولـد
|
يقتــل
بــالحلم
حيـة
الغضـب
|
|
أئمــة
للرشــاد
مــا
قطعــت
|
مـــدى
ثنـــاهم
أئمــة
الادب
|
|
فهـــم
رؤس
وغيرهـــم
ذنـــب
|
وأيــن
مقـدار
الـرأس
للـذنب
|
|
عصـــبهم
بالفخـــار
جــدَّهمو
|
فأصــبحوا
فيـه
أكـرم
العصـب
|
|
هــم
ســبب
للوجــود
أجمعــه
|
وهــل
وجــود
يــرى
بلا
ســبب
|
|
حـزب
لهـم
فـي
الفخـار
مرتبة
|
دون
علاهـــا
مراكــز
الشــهب
|
|
هـل
يقبـل
اللـه
من
فتى
عملا
|
بغيــر
حــب
الأئمــة
النجــب
|
|
بعــدا
لمــن
لا
يـرى
محبتهـم
|
وقربهــم
قربــة
مــن
القـرب
|
|
بنــورهم
أشـرق
الزمـان
كمـا
|
قـد
أشـرقت
فيـه
أوجـه
الحقب
|
|
حســبي
بيـوم
الجـزاء
حبهمـو
|
بـــه
أدل
علـــى
ذوي
حســبي
|
|
إن
بطـش
الـدهر
صـدق
عزمهمـو
|
صــال
علــى
بطشـه
بـذي
شـطب
|
|
أو
جـدَّ
دهـر
بالسـوء
عزمهمـو
|
يهــزم
بالجــدِّ
فيلـق
اللعـب
|
|
مــا
القطـب
إلا
لـبيتهم
وتـد
|
والشــمس
بعـض
معاقـد
الطنـب
|
|
لـو
حـكَّ
هـام
العيـوق
تربتهم
|
ســماؤه
مـا
شـكت
مـن
الجـرب
|
|
إن
ولائي
منـــذ
ألســت
كمــا
|
أرخـى
زمـامي
ألقـي
لهم
لببي
|
|
يغنـى
إذا
مـا
الزمان
حاربني
|
لهــم
ولائي
عــن
عســكر
لجـب
|
|
ذكرهمــو
فــي
ثغورنــا
شـنب
|
وأي
ثغـــر
يحلـــو
بلا
شــنب
|
|
لـو
قطعتنـي
ظـبي
العنا
أربا
|
مـا
كـان
غيـر
وصـالهم
أربـي
|
|
عيــن
الوجـود
أبوهمـو
وهمـو
|
مـن
حـول
هاتيك
العين
كالهدب
|
|
ما
لبس
الفخر
غير
ما
سلب
إلا
|
يجــاب
فـي
حبهـم
مـن
السـلب
|
|
قــوائم
العـرش
مـع
تطاولهـا
|
لجـدَّهم
قـد
جثـت
علـى
الركـب
|
|
ونــال
هــام
السـماك
مرتبـة
|
مـن
نعلـه
فـوق
أجمـع
الرتـب
|
|
وســاقها
قــد
ســعى
بلا
قـدم
|
لــه
يحــث
المسـير
فـي
خبـب
|
|
نـــبيَّ
حـــق
ســما
لمنزلــة
|
فــات
بهــا
كـل
مرسـل
ونـبي
|
|
قـد
أحـرز
السـبق
دونهم
قصبا
|
أمـا
سـمعتم
للسـبق
مـن
قصـب
|
|
وأحــر
بــي
للقتيـل
مضـطهدا
|
مضــطهدا
للقتيــل
واحـر
بـي
|
|
فــأيَّ
قلـب
كالصـخر
إن
ذكـرت
|
مصــيبة
للحســين
لــم
يــذب
|
|
قطـب
لدى
الحرب
كما
أدار
رحا
|
وكـم
أديـرت
رحـا
علـى
القطب
|
|
مـن
دم
أعـداه
كـم
سـقى
وروى
|
في
الحرب
غرثى
الرمال
والقضب
|
|
حزنــي
عليـه
لا
زال
فـي
صـعد
|
ومــدمعي
لا
يــزال
فــي
صـبب
|