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نــور
هـذا
الوجـود
بالإيمـانِ
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لا
بشـــمس
ولا
نجــوم
دوانــي
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وبـه
الشـمس
والنجـوم
جميعـاً
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مشــرقات
مــن
رحمـة
الرحمـن
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ولهــذا
الكســوف
لا
يعتريهـا
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منــه
إلا
عــن
غفلـة
وتـواني
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أي
قلــب
مــن
القلـوب
تجلّـى
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فيــه
ربـي
بغيـر
مـا
إيمـان
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وعلـوم
الجميـع
علـواً
وسـفلاً
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واردات
عـــن
وردة
كالــدهان
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فلــك
المـاء
والـتراب
مضـيءٌ
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بضــياء
الإيمــان
فـي
كـل
آن
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وبــه
لـم
يـزل
يـدور
ويبـدي
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صـــوراً
بابتــداعه
ومعــاني
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أمِــنَ
الكـلُّ
مـن
قلـىً
وبعـادٍ
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عنـدما
آمنـوا
وهـم
في
تداني
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ولهــم
خلعـة
المهيمـن
جـاءت
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ثـم
فـازوا
مـن
سلبها
بالأمان
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فــتراهم
بهـا
يميلـون
زهـواً
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بيـن
نيـل
المـراد
والحرمـان
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وعلــى
كــل
حالـة
هـو
أولـى
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بالــذي
جــاء
منــه
للأكـوان
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وهــو
إيمــانه
بــه
فلهــذا
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مـؤمن
جـاء
عنـه
فـي
القـرآن
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والمواليـــد
معــدن
ونبــات
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ثــم
حيوانهــا
مــع
الإنسـان
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وكــذاك
الآبــاء
مــع
أمهـات
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كلهــم
فـي
غـد
مـن
الحيـوان
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مؤمنـــات
جميعهـــا
بـــإلهٍ
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واحـدٍ
مـا
لـه
كمـا
قال
ثاني
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ولهــذا
تــأتي
غـدا
شـاهدات
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مثـل
مـا
جـاء
في
حديث
الأذان
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وشــروط
الشــهادة
الآن
فيهـا
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ثبتــت
بالــدليل
والبرهــان
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حيـث
عنهـا
الإلـه
أخبر
بالتس
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بيح
والنطق
والفنا
في
العيان
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فتحقـق
بكـل
مـا
قلـت
وافهـم
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تلــقَ
لـبَّ
الكمـال
والعرفـان
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