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يـا
قلـب
أحبابنـا
جسـمي
بهـم
بالي
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بغيرهــم
لا
تبــالي
بـل
بهـم
بـالي
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ويــا
كرامـاً
سـواهم
زال
مـن
بـالي
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لا
تحســبوا
أننــي
عـن
حبكـم
سـالي
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وحقكــم
لـم
يـزل
حـالي
بكـم
حـالي
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لحســنكم
لا
أرى
بيــن
الـورى
شـبهاً
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والعـاذلون
لقـد
زاد
دوابكـم
عمهـاً
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رفقـا
بقلـبي
الـذي
فيكـم
قضى
ولهاً
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أرخصـتموا
فـي
هـواكم
مـدمعي
سـفهاً
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وهـو
العزيـز
الـذي
عهـدي
بـه
غالي
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من
ذا
الذي
في
معاني
الفضل
يعد
لكم
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وكــل
شــيء
مـن
الأشـياء
فهـو
لكـم
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ليســـت
ســـمواتكم
والأرض
تشــملكم
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يــا
ســاكنين
فـؤادي
وهـو
منزلكـم
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لا
عشــت
يومــاً
أراه
منكمــو
خـالي
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عنكـم
بـدا
الكـون
يزهـو
في
لوائحِهِ
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والــروض
ينفــح
مـن
ذاكـي
روائحِـهِ
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وحرمــة
العهــد
منكـم
فـي
سـوانحِهِ
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أنتــم
بقلــبيَ
أدنــى
مـن
جـوانحِهِ
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حقــاً
علــى
رغــم
حســادي
وعـذالي
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محبكــم
صــادق
فــي
طيــب
مشــربِهِ
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وأفـــق
طلعتكـــم
يزهــو
بكــوكبه
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وســر
تثــبيت
قلــبي
فــي
تقلبــه
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مـا
يلتقـي
مثلكـم
مثلـي
يهيـم
بـه
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وكـم
يهيـم
بكـم
فـي
الحـي
أمثـالي
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بكاســـنا
كلمــا
ذقنــا
رحيقَكمــو
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ملنــا
ســكارى
فشــاهدنا
بريقَكمـو
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أحبابنــا
ليــت
أنقــذتم
غريقَكمـو
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أوضــــحتمو
لمحـــبيكم
طريقَكمـــو
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حاشــاكمو
تهجرونــي
بعــد
إيصـالي
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إلــى
اللقــا
بعثتنــي
كـل
باعثـةٍ
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لجملـــتي
بحجـــاب
العــز
وارثــةٍ
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وليلــة
الفــوز
منكـم
فـي
محادثـةٍ
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وحـــدت
حبكمــو
عــن
كــل
حادثــةٍ
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وصــنته
عـن
دواعـي
القيـل
والقـال
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روض
الجمــال
بأزهــار
الجلال
هنــي
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فـي
كـل
وجـه
لكـم
بيـن
الـورى
حسن
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واللـه
مـذ
جئتكـم
بـالفقر
رحت
غني
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ومــا
حــدا
باسـمكم
حـادٍ
فـأطربني
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إلا
وَجُـــدْتُ
لــه
بــالروح
والمــال
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