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الحمــد
للّــه
علــى
كـل
حـال
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مقــدماً
قبــل
جــواب
السـؤال
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ثــم
صــلاة
اللّــه
تـترى
علـى
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خيـر
الـورى
والآل
أهـل
الكمال
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وبعــد
هــذا
يــا
سـعيد
فقـد
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أطلـت
فـي
المطلوب
مني
المقال
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إجـــازة
تطلـــب
ممــن
غــدا
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مشــتغلاً
مــا
بيـن
قيـل
وقـال
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حينــاً
بتــأليف
وحينــاً
غـدا
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يــدرس
الأعيــان
مـن
فـي
أزال
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وتــارة
تــأتي
الســؤالات
مـن
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تهامــة
أو
مــن
رؤوس
الجبـال
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فاعـذر
إذا
أبطـا
جـوابي
فمـا
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عــن
كســل
أبطــا
ولا
عـن
ملال
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والآن
قــد
شــاء
إلهــي
بــأن
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أجيـب
عـن
أطـراف
ذاك
السـوال
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الطــــرف
الأول
تبغـــى
بـــه
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إجــازة
منــي
لمـا
قـد
يقـال
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مــن
يـروى
العلـم
ومـا
عنـده
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إجــازة
مــا
جـار
هـذا
بحـال
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إذ
الروايـــات
طريـــق
أتــى
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تفصــيلها
عنـد
فحـول
الرجـال
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قــد
حصــرت
فــي
أربـع
بينـت
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فـي
قصـب
السـكر
حلـو
المقـال
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جعلتهــا
فيهــا
مــع
غيرهــا
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مــن
اصــطلاحات
لأهــل
الكمـال
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فقــد
أجزنــاك
كمــا
تبتغــي
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فــارْو
علـوم
الآل
هـم
خيـر
آل
|
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وارْوِ
علــوم
المصــطفى
أحمــد
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مـن
حـاز
في
الناس
شريف
الخلال
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الأمهـــات
الســت
يــا
حبــذا
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مـا
قد
حوت
من
نافع
في
المقال
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أئمـــة
قـــد
ألفوهــا
لقــد
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فـازوا
بمـا
حازوا
على
كل
حال
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أئمــة
فــي
العلــم
تقــواهم
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كالشــمس
لا
مقــل
بـزوغ
الهلال
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قـد
حفظـوا
للخلـق
علـم
الهدى
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جــازاهم
اللّـه
جزيـل
النـوال
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فـاحرص
علـى
العلـم
تفز
في
غد
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بالعمـل
الصـالح
فـوق
الرجـال
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والعلــم
مقصــود
بــه
غيــره
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العمــل
النـافع
فـي
الارتحـال
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إلــى
لقــاء
اللّــه
ســبحانه
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عنـد
فـراق
العبـد
دار
الزوال
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والطــرف
الثــاني
وعظـي
لكـم
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ومـن
أنـا
قـل
لي
بهذا
السؤال
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الحســـن
البصـــري
وأمثــاله
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أو
كَعَلــيٍّ
مــا
لـه
مـن
مثـال
|
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أعنـي
أبـا
السـبطين
يـا
حبذا
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مواعظــاً
تهـتز
منهـا
الجبـال
|
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ضــمنها
النهــج
ســقى
قــبره
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سـحائب
الرضـوان
مـن
ذي
الجلال
|
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كفـى
كفـى
القـرآن
لـي
واعظـاً
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قصــار
آيــات
بــه
والطــوال
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فكـــل
قســـيس
تـــرى
دمعــه
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يفيــض
إذ
يســمع
صـوتاً
لتـال
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فاتــل
كتــاب
اللّـه
مسـتيقظاً
|
فــوعظه
يهــدم
شــُمَّ
الجبــال
|
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زهَّــد
فــي
الــدنيا
وآفاتهـا
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مـن
كـل
جـاه
قـد
حـوته
ومـال
|
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مـــا
هـــي
إلا
لعـــب
كلهــا
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وكلهـــا
لهْــوٌ
لأهــل
الضــلال
|
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غايتهــا
المــوت
وكــل
الـذي
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تـراه
فيهـا
مِثْـلُ
فَيْـءِ
الزوال
|
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أيـــن
ملــوك
قــد
عرفنــاهمُ
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سـادوا
وشـادوا
غُرَفـاً
لا
تنـال
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وفـــارقوا
ذاك
إلـــى
حفــرة
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خطـت
لهـم
بيـن
تـراب
الرمـال
|
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بهــا
لقـوا
كـل
الـذي
قـدموا
|
مـن
حسـن
أو
مـن
قبيـح
الفعال
|
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وغــودروا
فيهــا
فـرادى
وقـد
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نســـيهم
أهلهـــم
والعيـــال
|
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وجـــاءه
رســل
إلــه
الســما
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ليعرفــوا
إيمــانه
بالســؤال
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فــإن
تثبــت
بــالجواب
الـذي
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عـــن
ربــه
عــز
ومــا
قــال
|
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فــي
أحمــد
ســيد
كـل
الـورى
|
بقــوله
قــال
صــحيح
المقـال
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اللّــه
ربــي
ثــم
لــي
أحمـد
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نــبي
صــدق
لا
أقــول
المحـال
|
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فبعــد
ذا
ينظــر
فــي
قــبره
|
فـي
جنـة
قـد
دام
فيهـا
الظلال
|
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منزلـــه
يـــا
حبــذا
منــزل
|
فيـه
الـذي
يهـواه
ممـا
ينـال
|
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مـا
لا
تـراه
العين
أو
تسمع
ال
|
أذنــان
أو
يخطــر
منـه
ببـال
|
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أو
لــم
يُثَبَّـتْ
نـال
فـي
قـبره
|
مـا
تكـره
النفـس
بسوء
السؤال
|
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فنســـأل
اللّـــه
لــن
رحمــة
|
تغســل
أدران
قبيــح
الفعــال
|
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وبعـــد
ذا
صــَلِّ
علــى
أحمــد
|
والآل
مــا
هبـت
صـبا
أو
شـمال
|
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ويــا
ســعد
جَــازِنِي
بالــدعا
|
واسأل
لي
الغفران
من
ذي
الجلال
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