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ســللن
ظبــاة
العيـون
الكحـال
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وصــلن
بســمر
القـدود
العـوال
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وقــــد
بــــرزن
لآل
الهــــوى
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بهــا
وصــحن
النــزال
النـزال
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كـــواعب
حســن
ملكــن
الحشــى
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وصــدن
اســود
الوغـا
والقتـال
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مـــن
كــل
شــمطاء
ان
أســفرت
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تـــزري
بشــمس
الضــحى
والهلال
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أو
خطــرت
قــال
غصــن
النقــا
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للـــه
حســـبك
هـــذا
الــدلال
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وان
رنـــت
صــاح
كــل
الــورى
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كفــاكٍ
بــالله
رشــق
النبــال
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فــــي
كلهــــنّ
لقيـــتُ
البلا
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وقتلــي
بهــن
علــى
كــل
حـال
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علقـــت
بعشـــق
ســليمى
ومــا
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أورثنـــي
العشــق
الا
النكــال
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جفتنــي
ســليمى
ومــن
بعــدها
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عـــدمت
التصـــبر
والاحتمـــال
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ما
مثل
حسن
سليمى
وما
مثلي
بعت
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بتلــك
الربــوع
وطيـب
الوصـال
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وظبيـــة
الانـــس
مــا
بيننــا
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تســــعى
بكــــاس
مـــدامٍ
حلال
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تســــطو
بصــــارم
لحـــظٍ
إذا
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مـا
صـال
أتنسـاك
ضـرب
النصـال
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وتســــلب
اللــــب
بريحانـــةٍ
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مـدّت
علـى
الخد
من
حولها
الخال
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ومبســـــمٌ
ســــكريّ
اللمــــا
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حـــوى
نظيــم
عقــود
اللــؤال
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لــم
اســلُ
تــالله
عنهـا
سـوى
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فــي
مــدحُ
حّــرٍ
حميـد
الخصـال
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أميـــن
العلــوم
همــامٌ
رقــى
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بـــذورة
الفضــل
أوج
الكمــال
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نـــدبٌ
بفـــن
البـــديع
جلــى
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بيــان
المعــالي
بــدون
اختلال
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لــو
شــاء
اشــحن
كــل
الـورى
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صــحفاً
مــن
النظــم
بالارتجـال
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فـــاق
الاوايـــل
علمــاً
ومــن
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بالــدهر
سـار
علـى
ذا
المثـال
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مقـــام
حمــصٍ
بــه
قــد
زهــا
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فهنّــه
فــي
علا
قــدر
مـا
نـال
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وبشـّر
الـدير
مـذ
جـاءَ
هـا
يبث
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جـــــوهر
حســـــن
المقــــال
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جــــاء
بمـــدح
أميـــر
الملا
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شــديد
العزايــم
ليـث
النـزال
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بشــير
الســعادة
خيــر
الـورى
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شــهاب
المعـالي
وبحـر
النـوال
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انعــم
بــه
اللــه
مــن
شـاعر
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مهـــذّب
الخلــق
مــن
خيــر
آل
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ذو
الحــزم
افضــل
أهـل
الحجـى
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بهــيّ
الصــفات
حميــد
الخصـال
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مـــولاي
مـــذ
لاح
لـــي
منكــم
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بهـــا
محاســن
تلــك
الخصــال
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أنشــــدتها
فيــــك
تركّيــــةً
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منظومــة
الــوزن
ذات
اعتــدال
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مــن
المتقــارب
تهــدي
الثنـا
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لبحــر
علــوم
رحيــب
المجــال
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