|
يقــول
أضــعف
العبيـد
الراجـي
|
مغفـــرة
علـــي
بـــن
البــاجي
|
|
الحمـــد
للــه
علــى
التوفيــق
|
لفهــم
مــا
ألهــم
مـن
تحقيـق
|
|
وكـــم
لــه
مــن
نعمــة
وجــود
|
أولــــه
إفاضــــة
الوجــــود
|
|
ثـــم
الصـــلاة
والســلام
الأبــدي
|
علــى
النــبي
المصـطفى
محمـد
|
|
وآلـــــه
وصــــحبه
وعــــترته
|
والتـــابعين
بعـــدهم
لســنته
|
|
اعلــم
فـدتك
النفـس
يـا
حـبيب
|
أن
الســـعيد
العـــالم
الأديــب
|
|
وهـو
الـذي
حـوى
العلـوم
كلهـا
|
وفـــــك
مشــــكلاتها
وحلهــــا
|
|
كــالفقه
والأصــلين
والتـوريث
|
والنحـــو
والتصـــريف
والحــديث
|
|
والعلــم
بالتفســير
والمعـاني
|
ومنطــــق
الأميــــن
والبيـــان
|
|
والبحـــث
واللغــات
والإخبــار
|
عــن
قصـص
الماضـين
فـي
الأعصـار
|
|
والطـــب
للأبـــدان
والقلـــوب
|
وكـــل
علـــم
نـــافع
مطلـــوب
|
|
واسـتثبت
المنقـول
منهـا
ضـابطا
|
وحقـــقَ
البرهــان
والمغالطــا
|
|
وســـارَ
فــي
مســالك
العقــول
|
علــى
الطريـق
الواضـح
المعقـول
|
|
فحقـــق
الأصـــول
والفروعـــا
|
مقيســـاً
العقلـــي
والمســـموعا
|
|
وانقــاد
طائعــا
لأمــر
الشـرع
|
فــي
حكــم
أصــل
دينـه
والفـرع
|
|
مجتهـــدا
فــي
طاعــة
الرحمــن
|
بـــالقول
والفعــل
وبالجنــان
|
|
مكمــــل
الإيمــــان
بالإحســـان
|
إلــى
جميــع
الإنــس
والحيـوان
|
|
كيمــا
يحــوز
الفـوز
بالجنـان
|
وحورهـــا
العيـــن
وبالولــدان
|
|
وكــل
مــا
لــم
تـره
العينـان
|
وكــل
مــا
لــم
تســمع
الأذنـان
|
|
فــانهض
بإقــدام
علــى
الأقــدام
|
إن
كنــت
للعليــاء
ذا
مــرام
|
|
وشـــمر
الســاق
عــن
اجتهــاد
|
مثــل
اجتهــاد
السـادة
العبـاد
|
|
واســتنهض
الهمـة
فـي
التحصـيل
|
مـــن
كــل
شــيخ
عــالم
فضــيل
|
|
وارحـل
إلـى
مـن
يسـتحق
الرحله
|
خلــف
الفــرات
أو
وراء
الـدجله
|
|
حيــث
انتهــت
أخبــاره
إليكــا
|
فقصـــــده
محتــــم
عليكــــا
|
|
واطـرح
رداء
الكـبر
عن
عطفيكا
|
وقــل
لــداعي
العلـم
يـا
لبيكـا
|
|
واســع
إليــه
ماشـيا
أو
راكبـا
|
كمــا
اســتطعت
للتقـى
مصـاحبا
|
|
تضـــع
لـــك
الأملاك
مــن
رضــاها
|
أجنحـــة
وكــم
كــذا
ســواها
|
|
مــن
ســنة
دلـت
علـى
التفضـيل
|
وآيـــة
فـــي
محكــم
التنزيــل
|
|
كإنمــا
يخشــى
وخــذ
موزونــا
|
هــل
يســتوي
الــذين
يعلمونــا
|
|
وتـــوج
العلـــم
بتــاج
العمــل
|
مزيــــن
بحليــــه
والحلـــل
|
|
فـــإنه
لـــه
علـــى
الفحـــول
|
مــن
الرجــال
خلعــة
النحــول
|
|
مــن
سـهر
الليـل
علـى
الأقـدام
|
بيـــن
يـــدي
مصـــور
الأنـــام
|
|
وإنــــه
المقصـــود
بـــالعلوم
|
عنـــد
ذوي
الفطنــة
والفهــوم
|
|
وأخلـــص
النيـــة
فــي
الأعمــال
|
لصــــانع
العـــالم
ذي
الجلال
|
|
فإنمــــا
الأعمــــال
بالنيـــات
|
وكونهــــا
للــــه
خالصـــات
|
|
وليـــس
يرضـــى
ربنـــا
عبــاده
|
أشــركت
فيهــا
معــه
عبــاده
|
|
فوحـــد
القصـــد
بهـــا
للــه
|
ولا
تكـــن
عــن
قصــده
بــاللاهي
|
|
واعمـر
بـذكر
اللـه
قلبـا
خاليا
|
مــن
غيـره
تنـل
مقامـا
عاليـا
|
|
يــذكرك
فــي
الأملاك
فــوق
الفـوق
|
فـانتهز
الفرصـة
يـاذا
الشـوق
|
|
واغتنــم
الصــلاة
فـي
الـدياجي
|
إن
المصــــلي
ربــــه
ينـــاجي
|
|
ودق
بالجبهـــــــة
وجــــــه
الأرض
|
في
الصلوات
النفل
بعد
الفرض
|
|
يحببـــك
ربـــي
وتنـــل
بحبـــه
|
مـا
فـي
الحـديث
من
عطاء
قربه
|
|
ومــا
أجــل
ذا
المقــام
وقتـا
|
حـــتى
تجلـــه
وأنـــت
أنتـــا
|
|
فـــذا
المقــام
فهمــه
يهــول
|
تعجـــز
عــن
تحقيقــه
العقــول
|
|
وقــد
علمــت
شــطحة
الحلاج
فــي
|
مقــــاله
فــــإثره
لا
تقتـــف
|
|
إن
الطريــــق
همــــة
وحــــال
|
تثمرهـــا
الأعمــال
لا
المقــال
|
|
واســلك
طريــق
العلــم
والأعمـال
|
كلاهمــــا
محقــــق
الآمــــال
|
|
همــا
طريــق
الفـوز
لا
محـاله
|
يســــلكها
مشــــايخ
الرســـاله
|
|
كـــالليث
والجنيـــد
والــدينوري
|
والعجمــي
والســري
والثـوري
|
|
جــواهر
الرجــال
فــي
الوجــود
|
بعــد
النــبيين
لـدى
المعبـود
|
|
تفـــز
بــأعلى
الأجــر
والأحــوال
|
وأوضـــح
الفتـــوح
للرجـــال
|
|
وربمــا
نلــت
المقـام
العـالي
|
بالكشـــف
والتفريــق
بالمقــال
|
|
حــتى
إذا
قــال
الـولي
كـن
كـذا
|
كـان
سـواء
كـان
نفعـا
أو
أذى
|
|
بـــإذن
ربـــه
وطـــوع
قــدرته
|
علـــى
ســبيل
فضــله
ونعمتــه
|
|
كـذا
أتـى
عـن
سـالكي
الطريقـه
|
وكـــن
بـــذاك
مؤمنــا
حقيقــه
|
|
إذ
مــذهب
الســنة
وهــو
الأحســن
|
أن
كرامـــات
الـــولي
تمكــن
|
|
لأنهـــا
وإن
تكــن
كــالمعجزه
|
فــالخرق
بالتقييـد
عنهـا
محـرزه
|
|
فيهــا
التحــدي
دائمــا
معــدوم
|
وذاك
فـــرق
واضـــح
معلـــوم
|
|
وكــثرة
الأخبــار
عنهــا
مـانعه
|
كـذب
الجميـع
فهـي
حتمـا
واقعه
|
|
وهـــــذه
طريقـــــة
ظريفـــــه
|
ليســـت
ســـخيفة
ولا
ضـــعيفه
|
|
كنســب
إتيــان
الســخا
لحــاتم
|
بكـــثرة
الأخبـــار
بالمكــارم
|
|
وقـــد
أتــى
بنقلهــا
الكتــاب
|
واتضـــح
الباطـــل
والصـــواب
|
|
كقصـــة
الخضـــر
مـــع
الكليــم
|
تحــوي
كرامــات
فخـذ
تفهيمـي
|
|
مــــواهب
تصــــدر
عـــن
كريـــم
|
وعـــن
قــدير
عــالم
حكيــم
|
|
أســـعد
مــن
أراد
بالتقــديم
|
بفضـــله
فـــي
حكمـــه
القــديم
|
|
ســبحان
مــن
أنعـم
بـالتكريم
|
وقربـــــه
وفضــــله
العميــــم
|
|
ومــا
حكــى
مــن
قصــة
لمريمـا
|
وأنــــه
يرزقهــــا
تكرمــــا
|
|
يـــأتي
إليهـــا
كــل
وقــت
رزق
|
مــن
عــالم
الغيـب
وذاك
صـدق
|
|
فهــل
بقــي
للاعــتزال
مسـتند
|
مــن
بعــد
مــا
بينتــه
فيعتمـد
|
|
وجـاء
فـي
الآثـار
أيضـا
عن
عمر
|
مـن
ذاك
مـا
بيـن
الرواة
قد
ظهر
|
|
صــــياحه
بمنــــبر
المدينــــة
|
الجبــل
اقصــده
تجــد
كمينـه
|
|
يريـــد
إرشــاد
الأميــر
ســاريه
|
إلــى
مكايـد
الأسـود
الضـاريه
|
|
وفــي
نهاونــد
أتــاه
الصــوت
|
وكـــاد
لـــولاه
يكــون
الفــوت
|
|
فأســــرع
الأميــــر
بالســــريه
|
ممتثـــل
الأوامـــر
المرضــيه
|
|
فــأدركوا
الكميــن
خلــف
الجبـل
|
فاستأصــلوه
بالقنــا
والأســل
|
|
وامتلــــت
الفلاة
بالجمــــاجم
|
وفــاز
حــزب
اللــه
بالغنــائم
|
|
وذاك
فيـــه
الكشـــف
والتصــريف
|
العلــم
والأســماع
يــا
ظريـف
|
|
جـــل
الإلـــه
مظهـــر
العجــائب
|
علــى
يــدي
عبيــده
الحبـائب
|
|
مــن
جــاءه
يمشـي
أتـاه
هرولـه
|
برغــم
أنــف
ســائر
المعـتزله
|
|
ينيــــل
أوليــــاءه
الآمـــالا
|
وفوقهـــا
مـــن
يـــده
تعــالى
|
|
ومـــا
جــرى
لأحمــد
الرفــاعي
|
وشــــيخ
كيلان
كمــــا
ســـماعي
|
|
لمـا
خطـا
فـي
الجـو
فـوق
المنبر
|
عشــرا
وعــاد
قــائلا
للحضــر
|
|
عنــــــد
ورود
وارد
شــــــريف
|
مــن
حضــر
القــدس
بلا
تكييــف
|
|
علــى
رقــاب
الأوليـاء
رجلـي
|
والحكـــم
الـــوارد
لا
المســتحلي
|
|
أجـــابه
أحمـــد
فــي
الــرواق
|
فـي
وقتـه
المـذكور
يـا
رفـاقي
|
|
معترفــــا
لقــــوله
بالصـــدق
|
وشــــاهدا
بقــــوله
وعتــــق
|
|
فقيــل
مــاذا
قــال
عبـد
القـادر
|
قــال
كـذا
مقـال
صـدق
ظـاهر
|
|
فــــأرخوا
مقـــاله
فكانـــا
|
فــي
وقــت
شــطح
شـيخنا
نشـوانا
|
|
كـــأنه
مــن
جملــة
الحضــار
|
يشــــاهد
الميعـــاد
بالأبصـــار
|
|
مــا
صـده
عـن
كشـف
هـذا
الحـال
|
بعـــد
فجـــل
مانــح
الأحــوال
|
|
وذاك
مــــن
كليهمـــا
كرامـــه
|
علـــى
ارتفــاع
قــدره
علامــه
|
|
ومــا
أتــى
عــن
شـيخنا
السـبتي
|
وذاك
أمـــر
ليـــس
بــالمخفي
|
|
تـــأتي
الكرامـــات
علـــى
يــديه
|
ســــلام
ربـــي
دائمـــا
عليـــه
|
|
مهمـــا
أراد
كـــان
لا
محــاله
|
مــن
خــالق
ســبحان
مـن
أنـاله
|
|
يقــترح
المـرء
شـفاء
عـن
مـرض
|
لأهلــه
أو
دفــع
ضــر
قــد
عـرض
|
|
أو
ســـقي
بســـتان
لـــه
أو
زرع
|
أو
رد
مـا
قـد
ضـاع
بين
الجمع
|
|
يبـذل
شـيئا
مـن
فتـوح
الفقـرا
|
يــرى
يســيرا
حســب
مـا
تيسـرا
|
|
فيحصــــل
المـــراد
بـــالتلطف
|
بلا
تعســـــــف
ولا
تكلـــــــف
|
|
كــــأنه
أفعــــاله
المعتـــاده
|
وهــــذه
لعمـــرك
الســـعاده
|
|
لا
الجـــاه
والبنـــون
والأمــوال
|
والخيــل
والحميــر
والبغــال
|
|
جميعهـــا
علـــى
الفــتى
وبــال
|
ومنتهاهـــــا
أبـــــدا
زوال
|
|
لــــذاتها
مشــــوبة
بـــالألم
|
نعيمهــــا
مكــــدر
بــــالنقم
|
|
فحـل
مـا
مـن
بعـد
مـن
حساب
|
ومــــن
عقـــاب
فيـــه
أو
عتـــاب
|
|
بــل
مــن
ســؤال
منكــر
فـي
القـبر
|
ومــن
مواقـف
ليـوم
الحشـر
|
|
وخفــــة
الميـــزان
بالأعمـــال
|
وخــوف
دقــة
الصــراط
العـالي
|
|
وهـــول
أحـــوال
لظـــى
نيـــران
|
نعــوذ
بــالله
مـن
الخسـران
|
|
نســــأل
رب
العــــرش
والعبــــاد
|
بالمصطفى
الهادي
إلى
الرشاد
|
|
إلهامنــــا
طــــرائق
الســـداد
|
مــن
قـول
أو
فعـل
أو
اعتقـاد
|
|
وعفـــــوه
لنـــــا
وللأجـــــداد
|
وســــائر
الأهليــــن
والأولاد
|
|
والمســــلمين
حيهـــم
والغـــادي
|
تحـت
الـثرى
فـي
باطن
الألحاد
|
|
مــــن
كــــل
ذنـــب
ســـالف
وآت
|
برحمــة
منــه
إلــى
الممـات
|
|
فـــإنه
المرجـــو
والمـــأمول
|
والملتجـــى
إليـــه
والمســؤول
|
|
لا
راحـــم
ســـواه
قـــط
يقصــد
|
ولا
إلــــه
غيــــره
فيعبــــد
|
|
كــــل
إلــــى
رحمتـــه
فقيـــر
|
وفـــي
يـــدي
عقــابه
أســير
|
|
فـــي
كـــل
ممكــن
لــه
تقــدير
|
وهـــو
بـــه
وغيـــره
خــبير
|
|
وهــو
علــى
مــا
شــاءه
قـدير
|
والنفـــع
والضـــر
بــه
يصــير
|
|
لا
مشـــــبه
لـــــه
ولا
نظيـــــر
|
ولا
شـــــريك
لا
ولا
وزيـــــر
|
|
فـــرد
قـــديم
واجـــب
بالــذات
|
منـــزه
بالـــذات
والصـــفات
|
|
أرسـل
خيـر
الخلـق
فـي
الآفـاق
|
مكملا
مكـــــــــــــــارم
الأخلاق
|
|
محمـــدا
خـــاتم
رســل
ربنــا
|
مبشــــرا
ومنــــذرا
ومحســـنا
|
|
صـــلى
عليـــه
ربنـــا
وســلما
|
مـــا
لاح
فجــر
طــالع
وكرمــا
|
|
وآلــــه
وصــــحبه
الأخيـــار
|
الطيــــبين
الســـادة
الأطهـــار
|