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ولاؤك
ديــن
فـي
الرقـاب
وديـن
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وودك
حصــن
فــي
المعـاد
حصـين
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وحبــك
مفــروض
علــى
كـل
مسـلم
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يقــول
بحـب
المصـطفى
ويـدين
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لمثلـك
والمثـل
الـذي
لك
معوز
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يبـاح
مـن
الـذكر
الجميـل
مصون
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ومالـك
فـوق
غيـر
مـن
خلـق
الورى
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وجملـة
هـذا
الخلق
عندك
دون
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وكـل
إمـام
فـي
لياليـك
هـذه
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إمـــامته
شـــك
وأنـــت
يقيــن
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بنيــت
علـى
النـص
الجلـي
وعزهـم
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قيـاس
علـى
أصل
الهوى
وظنون
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أيسـتر
ضـوء
الصـبح
والفجـر
سـاطع
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ويكتـم
نـور
الحق
وهو
مبين
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لـك
الأنزع
الطهر
البطين
أب
وما
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لغيــرك
منهــم
أنــزع
وبطيـن
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وعنـدك
سـر
الـوحي
فـي
السور
التي
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لهــن
ظهــور
أحكمـت
وبطـون
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وأنـت
الـذي
أحـرزت
ميـراث
عـترة
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يعـز
بهـا
الله
الورى
ويهين
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بهــم
قبــل
الرحمــن
توبـة
آدم
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وشـــفعهم
فيـــه
وآدم
طيــن
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همـوا
شـرفوا
الـبيت
الحرام
فقدست
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مشـاعر
منهـا
أبطـح
وحجـون
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حبتـك
الليـالي
بيعـة
عاضدية
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لــك
اللــه
فيهـا
عاضـد
ومعيـن
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لهـا
عـروة
فـي
راحـتي
كل
مسلم
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وحبـل
بأيـدي
المـؤمنين
مـتين
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لوجهـك
تعنـو
أوجـه
الخلـق
هيبة
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وتطــرق
منهــم
أعيـن
وجفـون
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إذا
لحـت
فـي
نـور
السكينة
والهدى
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غـدت
حركات
الناس
وهي
سكون
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خليلـي
هـل
فـي
الدست
بدر
دجنة
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وتلــك
ســتور
أم
سـحائب
جـون
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أم
العاضـد
الهـادي
تبلـج
وجهـه
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وأسـفر
تحـت
التـاج
منه
جبين
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وهـل
مـا
أرى
فـي
تـاجه
من
جواهر
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كــواكب
أم
در
عليــه
ثميـن
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زمانـك
طلـق
الوجه
ما
في
جبينه
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عبــوس
ولا
فــي
صـفحتيه
غضـون
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وأيــامه
تاريـخ
كـل
فضـيلة
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يعـــبر
عنهـــا
فضــلكم
ويــبين
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مضـى
رجـب
والحـزن
يحـدو
ركـابه
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وكــل
محــب
بــالفراق
حزيـن
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وأقبــل
شـعبان
يحـن
صـبابة
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إليــك
ومــن
شــأن
المحـب
حنيـن
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تفـاءلت
فـي
شـعبان
فـألاً
أظنـه
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بســعد
أميـر
المـؤمنين
يكـون
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سـتلتئم
الشـعبان
فيـه
فتلتقي
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شـمال
علـى
نصـر
الهـدى
ويميـن
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ويعضــد
بالهـادي
الكفيـل
خلافـة
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لهـا
كافـل
مـن
عزمـه
وضـمين
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ينــوط
نجاديهــا
بعـاتق
أروع
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عزيـز
لـه
النصـر
العزيـز
قرين
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تحمـل
أعبـاء
الـوزارة
بعدما
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وهــي
عــاتق
عـن
حملهـا
ووتيـن
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وقـام
بهـا
مـن
بعـدما
قعد
الورى
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قـوي
إذا
خـان
الكفـاة
أمين
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أخـو
الحـزم
لا
تنبـو
مضارب
عزمه
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وذو
الحـزم
يقسـو
تارة
ويلين
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تسـهل
حـزن
النائبات
بعزمه
|
وأمســت
ســهول
المجـد
وهـي
حـزون
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وفـي
صـدر
كـل
مـن
سـطاه
مهابة
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لهـا
بيـن
أحنـاء
الصدور
كمين
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تخبرنـا
عـن
بأسـه
ونـواله
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وإن
نحــن
لــم
نجهـل
منـى
ومنـون
|
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قـرى
وقـراع
يفـرح
المجـد
كلمـا
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أضــاءت
جفـان
عنهمـا
وجفـون
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ســــرت
همـــم
الأملاك
خلـــف
طلائع
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لـواغب
منهـا
حاسـر
وحـرون
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تحـدثنا
عـن
رتبـة
الناصـر
ابنه
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مسـاعي
أبيـه
والحـديث
شـجون
|
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نمـت
عصـبة
الميمـون
دوحة
سؤدد
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ســقاهم
غمــام
للعلـى
ومعيـن
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ورشـح
منـه
الليـث
شـبل
عرينه
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لــه
أجمــات
الســمهري
عريــن
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إذا
شـهد
الحـرب
الزبـون
عـدت
لـه
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فوارسـها
الأبطـال
وهي
زبون
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يـدير
علـى
الأعـداء
فـي
كـل
مأزق
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رحـى
ثقلهـا
للنـاكثين
طحون
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يزيـن
أبـاه
حيـن
تتلـى
صفاته
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ومـا
كـل
أبنـاء
الملـوك
يزيـن
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فــتى
فتـن
الألبـاب
خلقـاً
وخلقـة
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وجنـت
بـه
العلياء
وهو
جنين
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وقــــالت
علاه
أمهلاه
فـــإنه
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خليــق
بمــا
لا
تنكــراه
قميــن
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ألـم
تريـا
عنوانهـا
فـي
جـبينه
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يلــوح
علــى
أعطـافه
ويـبين
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أفـاض
عليـه
الحـب
مـن
كـل
خـاطر
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مكـان
لـه
عنـد
الإمـام
مكين
|
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أســادة
أهــل
الأرض
لا
مثنويـة
|
وإن
ســخنت
ممــا
أقــول
عيـون
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تغاضـوا
عـن
التقصـير
فيمـا
نقـوله
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ففي
القول
غث
كالورى
وسمين
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فمـن
ظـن
أن
المدح
قام
بحقكم
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فــذاك
غــبي
فـي
الرجـال
غـبين
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