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لكــــل
مقــــام
فــــي
علاك
مقــــال
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تصـــدقه
بـــالجود
منــك
فعــال
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وعنـــدك
إن
ضـــاق
المجـــال
لمــادح
|
محاســـن
فيهــا
للمديــح
مجــال
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منــاقب
يــا
ذخــر
الأئمــة
أصــبحت
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إليهـــن
أعنـــاق
الثنــاء
تمــال
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سما
الناصر
المحيي
إلى
الغاية
التي
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ينــال
عنــان
النجــم
حيــن
تنــال
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وألــف
أضــداد
المعــالي
بهمـة
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لهــــا
كـــل
يـــوم
نعمـــة
ونكـــال
|
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وفــي
كــل
قلــب
مـن
سـطاه
مهابـة
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وفــي
كــل
كــف
مــن
نــداه
ســجال
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قــرى
وقــراع
طالمــا
فــاض
منهمـا
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علـــى
الخلــق
وبــل
دائم
ووبــال
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جفـــان
وأجفــان
تــدفق
منهمــا
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علــــى
قـــدر
ســـجليه
ردى
ونـــوال
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رأيتــك
لــم
تقنــع
بمنصــبك
الـذي
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علا
فنجـــوم
الأفـــق
عنـــه
ســفال
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فباشــرت
مكــروه
الــوغى
فـي
مـواطن
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حــــرام
المنايـــا
بينهـــن
حلال
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وهــل
يفخــر
الصمصــام
إلا
بطعنـة
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وإن
راق
منـــــه
جــــوهر
وصــــقال
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ولمــا
تشـكى
الأمـن
خوفـاً
مـن
العـدى
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وكــاد
الهــدى
يســطو
عليـه
ضـلال
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نهـدت
إلـى
الأفرنـج
تزجـي
كتائبـاً
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تغــــل
بهــــا
أعنـــاقهم
وتغـــال
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فولــوا
وقــد
أبقـت
عليهـم
نفوسـهم
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سباســـب
حـــالت
دونهـــا
ورمــال
|
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وأتبعتهــم
ركضــاً
علــى
كـل
سـابح
|
إذا
لريـــح
كلـــت
لــم
يصــبه
كلال
|
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جيـــاد
إذا
جردتهــا
يــوم
غــارة
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فليـــس
لهـــا
غيـــر
الوشــيج
ظلال
|
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طوالــع
فــي
ليــل
القتــام
غــوارب
|
عليهـــن
مــن
نســج
القتــام
جلال
|
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يــثير
غبــاراً
كلمـا
قـذي
الهـدى
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بفتنـــة
طـــاغ
كـــان
منــه
كحــال
|
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رميــت
بهــا
بهــرام
عــن
قـوس
عزمـة
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تــبيت
لهــا
الأقـدار
وهـي
نبـال
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وأدركتهـــم
إدراك
مـــن
لا
يفــوته
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مـــرام
ولا
ينـــأى
عليـــه
منـــال
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ســريت
بهــا
والليــل
وحــف
شـبابه
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فصـــبحتهم
إذ
شـــاب
منــه
قــذال
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ولمـا
اشـتملت
الليـل
بـرداً
إليهم
|
جـــرت
بالــذي
تهــوى
صــبا
وشــمال
|
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وأوقــدت
نيــران
الــوغى
بــذوابل
|
ســـرت
ولهـــا
زرق
النصــال
ذبــال
|
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وأتبعتهــا
والكــف
تقـوى
بأختهـا
|
بـــبيض
تصــون
المجــد
وهــي
مــذال
|
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إذا
هجــرت
أغمادهـا
لـم
يكـن
لهـا
|
ســوى
قطــع
أوصــال
الطغــاة
وصـال
|
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فهــن
شــجا
فـي
حلـق
كـل
معانـد
|
وهــــن
علــــى
قلــــب
الـــولي
زلال
|
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عمــاد
مليـك
يكـثر
البـأس
والنـدى
|
إذا
قــل
نــزل
فــي
الــورى
ونـزال
|
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هــو
القاســم
الســجلين
عفـواً
ونقمـة
|
وحاســم
داء
الــدهر
وهــو
عضـال
|
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تكفــل
هـم
الملـك
عـن
قلـب
كافـل
|
غـــدا
وهـــو
فينــا
عصــمة
وثمــال
|
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تقيــل
الأمــاني
عنــده
تحـت
رحمـة
|
بهـــا
عـــثرات
المســـلمين
تقــال
|
|
تــروح
الأيــادي
مــن
يــديه
خفيفـة
|
وتغــدو
علــى
الأعنــاق
وهـي
ثقـال
|
|
أبــوك
الــذي
تسـطو
الليـالي
بحـده
|
وأنـــت
يميـــن
إن
ســـطا
وشــمال
|
|
أب
علـــم
الأيـــام
أحســـن
ســـيرة
|
لعينيـــك
منهـــا
قبلـــة
ومثــال
|
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لرتبتــه
العظمــى
وإن
طــال
عمـره
|
إليــــك
مصــــير
واجــــب
ومـــآل
|
|
تخالســك
اللحــظ
المصــون
ودونهــا
|
حجـــاب
شـــريف
لا
انقضــى
وحجــال
|
|
لقــد
راقهــا
بـل
شـاقها
واسـتفزها
|
إليــــــــك
جلال
بـــــــاهر
وخلال
|
|
جبينــك
حســناً
بــل
يمينـك
منـة
|
يفيــــض
جميــــل
منهمــــا
وجمـــال
|
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خليلـــي
قـــولا
للأجــل
نيابــة
|
فقــــــد
منعتنــــــي
هيبـــــة
وجلال
|
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إخالــك
لا
ترضــى
الكــواكب
معشــراً
|
وأنـــت
لأبنـــاء
الخلافـــة
خـــال
|
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ســـتخفر
غســان
بكــم
ويزيــدها
|
علـــــى
أن
آل
المصــــطفى
لــــك
آل
|
|
فــدى
لبنــي
رزيــك
مــن
ليـس
مثلهـم
|
وهــل
للنجــوم
النيــرات
مثــال
|
|
ملــوك
أرتنــا
كــل
فضــل
مغيـب
|
لهــــم
شــــيم
محمــــودة
وخصــــال
|
|
تقـــول
مســـاعيهم
لكـــل
منــافس
|
ترفـــق
فمــا
كــل
الرجــال
رجــال
|
|
غيـــوث
إذا
ضـــن
الســـحاب
بــوبله
|
ليــوث
إذا
صــل
الحديــد
وصـالوا
|
|
هـــم
علمـــوني
مــدحهم
بكرامــة
|
وجـــود
أطـــابوا
منهمــا
وأطــالوا
|
|
وجـــوه
لهــا
بشــر
إلــي
تهللــت
|
وأيــــد
أياديهـــا
علـــي
تهـــال
|
|
قـــدمت
عليهـــم
وافـــداً
فتفضــلوا
|
وأعلــوا
محلــي
منعميــن
وعـالوا
|
|
فمـــا
عــذر
شــعر
لا
يجــود
فيهــم
|
وعـــذري
مـــزاح
بالعطــاء
مــزال
|
|
ولا
شــكر
لــي
فيمــا
أقــول
لأننــي
|
أعـــبر
عمـــا
شـــرفوا
وأنــالوا
|
|
ومستحســـن
للقـــول
فيكــم
أجبتــه
|
كــذا
فــي
صــفات
المحسـنين
يقـال
|
|
قصـــائد
مــا
بــاتت
بهــن
خــواطري
|
علـــى
ســـرقات
الانتحــال
تحــال
|
|
ثقــال
الخطــى
إلا
إليكــم
فإنهــا
|
خفــاف
الخطــى
فــي
الارتجـال
عجـال
|
|
غــدت
منكــم
فــي
أنفهــا
خنزوانـة
|
فليســـت
بقصــد
البــاخلين
تــذال
|
|
إذا
كــان
رأي
الناصـر
الملـك
ناصـري
|
فــإن
صــريح
القــول
فــي
حفــال
|
|
فــتى
عنــده
فضــل
وفصـل
إذا
التقـى
|
جلاد
علـــى
نصــر
الهــدى
وجــدال
|
|
وبيــن
يــراع
الخــط
والخـط
غيـرة
|
علــى
يــده
العليــا
وغــى
وقتــال
|
|
يروقــك
فــي
يمنــى
يــديه
يراعـة
|
تــراع
بهــا
أســد
الشــرى
وتهــال
|
|
توهمتهـــا
مخلوقــة
فــي
بنــانه
|
لهـــا
مــن
عــروق
الأشــجعين
حبــال
|
|
تـــبيت
بهــا
الآجــال
وهــي
قصــيرة
|
وتضــحي
بهــا
الآمــال
وهـي
طـوال
|
|
إذا
اعتلقتهــا
خمســة
فــي
ملمــة
|
تحلــــل
مكــــروه
وحــــل
عقـــال
|
|
ليهنـــك
صــوم
ترتجــى
بركــاته
|
وتــــوزن
أعمــــال
بــــه
وتكــــال
|
|
رأت
عينــه
منــك
الكمــال
الــذي
بـه
|
تهلـــل
فيــه
النــور
وهــو
هلال
|
|
وأمطـــرت
فيـــه
المســلمين
وغيرهــم
|
ســـحاب
نــدى
لا
يقتضــيه
ســؤال
|