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ثنـاؤك
ليـس
تسـبقه
الرياح
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يطيـر
ومـن
نـداك
لـه
جناح
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لقـد
حسـنت
بـك
الدنيا
وشبت
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فغنــت
وهــي
ناعمــة
رداح
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ثنــاؤك
فـي
طلاهـا
حلـي
در
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وفــي
أعطافهـا
منـه
وشـاح
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تطيـب
بـذكرك
الأفـواه
حـتى
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كــأن
رضــابها
مســك
وراح
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ملكـت
عنـان
دهـرك
فهو
جار
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كمـا
تهـوى
فليـس
لـه
جمـاح
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فـداك
ملـوك
هـذا
العصر
طرا
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فإنــك
ضــيغم
وهــم
لقــاح
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وأنـت
بكـل
مـا
تحـوي
جـواد
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وهـم
بأقـل
ما
حازوا
شحاح
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فزنـدك
في
العلا
والحرب
وار
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ولا
زنـــد
لهــم
إلا
شــحاح
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جـزاك
اللـه
خيـرا
عـن
بلاد
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محـا
عنها
الفساد
بك
الصلاح
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جنبـت
إلـى
الأعادي
أسد
غاب
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براثنهـا
المهنـدة
الصـفاح
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وقــدتهم
فكـان
لهـم
ظهـور
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ولـولا
الشـمس
ما
ظهر
الصباح
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وقفـت
وموقـف
الهيجـاء
ضـنك
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وفيـه
لباعـك
الرحب
انفساح
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وألســـنة
الأســنة
قــائلات
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قفـوا
هـذا
المؤيـد
لا
بـراح
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محمــد
بــن
عبــاد
هزبــر
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لعبـاد
المسـيح
بدا
فطاحوا
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رأى
منـه
أبـو
يعقـوب
فيها
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عقابــا
لا
يهــاض
لـه
جنـاح
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فقـال
لـه
لـك
القدح
المعلى
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إذا
ضـربت
بمشـهدك
القـداح
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وقـالوا
كفـه
جرحـت
فقلنـا
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أعــاديه
تواقعهـا
الجـراح
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وما
أثر
الجراحة
ما
رأيتم
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فترهبهـا
المناصـل
والرماح
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ولكـن
فـاض
سيل
البأس
منها
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ففيهـا
مـن
مجـاريه
انسـياح
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وقــد
صـحت
وسـحت
بالأمـاني
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وفـاض
الجود
منها
والسماح
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رأى
منـه
أبـو
يعقوب
فيها
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عقابـاً
لا
يهـاض
لهـا
جنـاح
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فقـال
لـه
لك
القدح
المعلى
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إذا
ضـربت
بمشـهدك
القـداح
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