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أصــبت
فــي
خيــر
أعضــائي
وأعضـادي
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وخيــر
أهلــي
إذا
عـدوا
وأولادي
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بأبلـج
الـوجه
مـن
سـعد
العشيرة
لم
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يعرف
بغير
الندى
والبشر
في
النادي
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إن
أظلــم
الجـو
فـي
عينـي
فقـد
فجعـت
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بكـوكب
فـي
سـماء
المجـد
أوقـد
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كالمشـــرفي
ولكــن
غيــر
منثلــم
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والســـمهري
ولكـــن
غيـــر
منــآد
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نـــاش
علــى
شــيمتي
مجــد
ومكرمــة
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مــاش
علـى
سـنتي
هـدي
وإرشـادي
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قـد
كـان
يسـند
عنـي
ثـم
سـاد
إلـى
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أن
صـار
مـن
فضـله
نقلـي
وإسـنادي
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مــن
آل
أحمــد
بـل
زيـدان
فـي
نسـب
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مقابـــل
بيــن
أمجــاد
وأنجــاد
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قــوم
يســرك
فــي
يـوم
الكريهـة
أن
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تلقـى
ألـوف
الـورى
منهـم
بآحـاد
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تعلـو
الوهـاد
علـى
الأطواد
إن
دفنوا
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فيهـا
وتسـمو
سـمو
المشرف
البادي
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ومــــن
نبــــاهتهم
والأرض
خاملـــة
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أزرت
نابهـــة
أوهـــاد
بــأطواد
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بكـــل
أرض
ثـــوى
قـــبر
يضـــم
علــى
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فـــراج
معضـــلة
طلاع
أنجــاد
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قــبر
تســجى
بأكنــاف
العدايــة
لـم
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تؤنســه
أجــداث
آبــاء
وأجـداد
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وفــي
الحصــيب
لعبــد
اللــه
مدرجـة
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بالعرق
تسقى
بصوب
الرائح
الغادي
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وفـي
القرافـة
ثـاو
لا
تزال
له
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نـــار
علــى
قــدر
إطفــائي
وإيقــادي
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غـــدا
محمــد
محمــوداً
وخلفنــي
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أذم
همــاً
رثــى
لــي
منــه
حســادي
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مــررت
بــالربع
والــوادي
فأوحشــني
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وقيـل
لي
مات
أنس
الربع
والوادي
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وســار
فــوق
جمــال
مــا
تعودهـا
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ومــا
جمــال
المنايـا
غيـر
أعـواد
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تحــدو
بــه
زفــرات
لا
أقـول
لهـا
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مهلاً
ترفــق
بقلــبي
أيهــا
الحـادي
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ترفـــق
الـــبر
والتقــوى
وزودنــي
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حزنـاً
فشـتان
بيـن
الـزاد
والزاد
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يــا
مــن
يــذكرني
صــوت
الأذان
بـه
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إذا
جـرى
فيه
ذكر
المصطفى
الهادي
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أشــكو
إليــك
صــدى
قلـبي
وعلتـه
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فهــل
تــروي
بوصــل
غلــة
الصـادي
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مــالي
أزورك
مــزوراً
وتشــهد
لــي
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شـواهد
الحـال
مـع
قربـي
وإبعـادي
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جفـوتني
ولـك
الخلـق
الكريـم
فلـم
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عــودتني
منــك
خلقــاً
غيـر
معتـاد
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مـن
اسـتنبت
لتـأنيبي
إذا
جمحـت
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خـــواطري
عنـــد
إصــداري
وإيــرادي
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ومــن
أمنــت
علــى
سـري
ليحفظـه
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فيمـــا
يعـــود
بإصـــلاح
وإفســـاد
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بينــي
وبينـك
ميعـاد
تـزورك
بـي
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فــي
بنــات
الـردى
مـن
غيـر
ميعـاد
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تضــم
روحــك
روحــي
عنــد
مقــدمها
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وتلتقــي
فيــه
أجســاد
بأجســاد
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