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ســـكان
طيبــه
مــن
كمــاهم
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هم
مطلبي
يا
صاح
في
العالمين
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لا
عاشــق
خــارج
عــن
حمـاهم
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أهـل
الهدى
هل
أهل
حق
اليقين
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قــد
فــاز
مـن
يسـعى
وراهـم
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علـى
الأثـر
فـي
كـل
حالٍ
وحين
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للـــه
مـــا
أضــوا
ســناهم
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منـه
الضـيا
والنور
للمهتدين
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قــد
طــاب
منهــم
كـل
مشـرب
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قــاموا
بحــق
الخلـق
والـرب
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دعـــاهم
المـــولى
وقرقـــب
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أطــال
فــي
العقــبى
علاهــم
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فـي
جنـة
الخلـد
مع
السابقين
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وزاد
أعطـــــاهم
منـــــاهم
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وفــوق
مــا
أبهـر
الحاضـرين
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يـا
سـعد
سـر
بـي
نحو
الأحباب
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فالشـوق
قـد
قطع
نياط
القلوب
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مــن
بعــد
بعــدي
والتغـراب
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عنهـم
وقلـبي
فـي
هواهم
يذوب
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رعيــا
لســكان
تلـك
الأطنـاب
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ســـقياً
لأطيــانهم
والشــعوب
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مـــا
حمـــام
الأيـــك
غــرد
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أو
حـــــدى
الحــــادي
وردد
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أو
ذكــــر
حـــاجر
وثمهـــد
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إلا
تـــــــذكر
ربـــــــاهم
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وهـام
قلـبي
في
هوى
النازحين
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وجـــدي
علــى
ظــبي
نقــاهم
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قد
مر
عمري
في
الضنا
والحنين
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بـــالله
يــا
غــزلان
حــاجر
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رقـوا
لهـذا
المسـقم
الكئيـب
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يــبيت
طــول
الليــل
ســاهر
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ولهـان
بـاكي
من
بعاد
الحبيب
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دمعــه
علــى
الخــدين
مـاطر
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بـالله
عطفـاً
يـا
ظبي
الكثيب
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ليـــت
شـــعري
هــل
منــائي
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يــدري
بمــا
بـي
مـن
ضـنائي
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لأن
فــــــي
يــــــده
دوائي
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عشـــاق
ليلــى
مــا
تراهــم
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إلا
ســكارى
كــل
وقــتٍ
وحيـن
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الحـــب
قــد
أوجــب
فنــاهم
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والبعـد
عـن
أهلهـم
والبنيـن
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مــا
صــدهم
عــن
عشـق
ليلـى
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شــيءٌ
مـن
الغانيـات
الحسـان
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بـــل
همهـــم
صـــبحاً
وليلاً
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حــادي
هواهـا
آخـذٌ
بالعنـان
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صــبروا
علــى
البلـوى
قليلا
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ثـم
استراحوا
في
نعيم
الجنان
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مســكين
مســكين
كـل
مـن
حـب
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قبـــل
الفنـــا
دائم
معــذب
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مــاله
بــدون
الوصــل
مطلـب
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قـــل
للخلييــن
فــي
ملاهــم
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كــل
امــرئٍ
باكتسـابه
رهيـن
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آن
المحـــبين
قـــد
حلاهـــم
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شـميم
ليلـى
بغيـة
العاشـقين
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يـــا
رب
إن
الضـــعف
شــاني
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وأنـت
يـا
رب
القـوي
الـودود
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أصــلح
جســيمي
مــع
جنــاني
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وزجنـي
فـي
بحـر
عـذب
الشهود
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وأجـــر
بـــالحكمه
لســـاني
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أوردنـي
الفـردوس
نعم
الورود
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فضـــلاً
وجـــوداً
يــا
ىلهــي
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جلــت
مزايــاك
عــن
تنــاهي
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فأدخــل
عبيــدك
ذا
التسـاهي
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فـــي
قــوم
أجزلــت
عطــاهم
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بـوأتهم
أعلـى
المكان
الحصين
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أنعمــت
فــي
العقـبى
بقـاهم
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نعــم
الأجلا
صــفوة
الناسـكين
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وصـــل
يــا
رب
علــى
أحمــد
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المصـــطفى
ســيد
المرســلين
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مــا
زمـزم
الحـادي
ومـا
مـد
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بحـر
وأوصـل
بعـد
هجـرٍ
ظنيـن
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أو
نمنــــم
البــــارق
وردد
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تـالي
كتـاب
الله
طول
السنين
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مــــع
ســــلام
اللـــه
دائم
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مــا
قــام
بالأســحار
قــائم
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والآل
والصـــــحب
الأكــــارم
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وعـــم
مـــن
تــابع
خطــاهم
|
الســابقين
أصــحاب
اليميــن
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يـــا
رب
وامـــددنا
ولاهـــم
|
يـا
ملتجـا
مع
جملة
الحاضرين
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