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إلام
السـهو
عـن
فعـل
الرشاد
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وأيــام
الحيـاة
إلـى
نفـاد
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تيقـظ
يـا
أخـي
واسلك
سبيلا
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بــه
ترضــي
إلهــاً
للعبـاد
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فتقوى
الله
فيه
الخير
فالزم
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ودم
تظفــر
بغايـات
المـراد
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ونـق
الجيـب
مـن
كل
الدنايا
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وقم
بالفرض
وارغب
في
ازدياد
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وحسـن
الظـن
بأهل
الدين
فرض
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وبالإســلام
والــرب
الجــواد
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وعلـم
الـدين
فـاطلبه
مجـداً
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تنــل
عـزاً
وإيـاك
التمـادي
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تغافــل
حسـبما
يرضـاه
شـرعٌ
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ولن
في
القول
وابعد
عن
عناد
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وارض
الحلـم
والإحسـان
طبعـاً
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ففيـه
العـز
مـأمون
النفـاد
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وبــادر
بالمتــاب
بلا
تـوانٍ
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وتــب
واعمـل
لأيـام
الحصـاد
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ودع
تســويف
شــيطانٍ
ونفــسٍ
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فـإن
النفـس
من
أعدى
الأعادي
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فكـم
تركـت
أخـا
لـب
صـريعاً
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وذا
بـأسٍ
مكبـل
فـي
القيـاد
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تبعنـا
النفـس
جهلاً
في
هواها
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وشـأن
النفـس
قبـح
الارتيـاد
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تمنينــــا
بتهــــويسٍ
وزورٍ
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وتنســينا
حقيقــات
المعـاد
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وتوعـدنا
الإنابـة
عـن
قريـب
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وتمطـل
دائمـاً
وقـت
الوعـاد
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وقـد
ولـى
الشباب
سدىً
وهملاً
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ووافانــا
المشـيب
بلا
رشـاد
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فيـا
خسـران
عمـرٍ
قـد
تقضـى
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وعيــشٍ
فـي
حضيضـات
الفسـاد
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فلا
عمــلٌ
مصــفى
مــن
ريـاءٍ
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ولا
علــم
ســليم
عــن
نفـاد
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لقــد
آن
الإيــاب
لمســتفيقٍ
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ومنتبـهٍ
عـن
أخطـار
الرقـاد
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يـرى
أن
البطالـة
والتـواني
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ومجتمعــاً
لأجنــاس
العبــاد
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مناقشـــة
لتحقيـــق
حســابٍ
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وعــدل
فيــه
بـأهوالٍ
شـداد
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وإنصــافٌ
لمظلــومٍ
فكـم
كـم
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يـرى
المتبـوع
لألسـنة
حـداد
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فيقضــي
بينهــم
ديـانُ
عـدلٍ
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ويمضـي
فيهـم
مـا
كـان
بادي
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فأهـل
الخيـر
مـأواهم
جنـانٌ
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حـوت
خيـرات
تربـو
عـن
عداد
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وأعظمهـا
رضـى
الـرب
تعـالى
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ورؤيتــــه
بتنزيـــهٍ
إرادي
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وأهــل
الشـر
مـأواهم
جحيـم
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يــذوب
لهولهـا
شـم
الجيـاد
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فتخليــدٌ
لأهـل
الشـرك
فيهـا
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وينجـو
غيرهـم
بعـد
النكـاد
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فيـا
غفـار
يـا
رحمـن
عفـواً
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وتوفيقــاً
لأنــواع
الســداد
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وعافيــةً
تلــي
حســن
ختـام
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وتأنيسـاً
مـع
أوقـات
انفراد
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وصـلى
اللـه
دابـاً
مـع
سـلامٍ
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علـى
نـور
البريـة
خيـر
هادِ
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محمــدٍ
المشــفعِ
مــع
صـحابٍ
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وآل
فضــلهم
فــي
كـل
نـادي
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واتبــاعٍ
لهـم
مـن
كـل
خيـرٍ
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عـدد
مـا
انهل
أمزان
الرهاد
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