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بنـورك
يـا
مـولاي
لا
زلـت
أهتـدي
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فإنــك
بعـد
اللـه
وحـدك
مرشـدي
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ملاذي
مربـي
الـروح
غـارس
روضـتي
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لـك
اللّـه
استاذي
لك
اللّه
موردي
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درســت
عليــك
العلـم
نقلا
وضـده
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فبـت
بـه
فـي
حلـة
الفضـل
أرتدي
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وكـم
كنـت
توليني
النصيحة
عندها
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لتفـرغ
مـن
خيـرات
كنـزك
في
يدي
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ولـم
ترمـا
استحصـلته
عنك
كافيا
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أمامـك
حقـا
ذو
المعـارف
مبتـدي
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وأخلصـت
فـي
التعليم
حتى
تركتني
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أروح
بتـاج
الشـعر
فيهـم
وأغتدي
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وشـاهدت
معنـى
العـارفين
بربهـم
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عيانـا
وما
معنى
التقى
فيك
سيدي
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أخـذت
من
الدنيا
المعارف
والهدى
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ومــا
كنــت
إلا
بأليمــة
تقتـدي
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طرحـت
بكـل
الزهـد
عنـك
حطامهـا
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ومـا
كنـت
لـولا
الأهـل
بـالمتزود
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وسـاقت
لـك
الأقدار
إذ
كنت
خاضعا
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لأحكامهــا
رزقــا
ولسـت
بمُجتـدي
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وقـال
لمـن
أولاك
هـذا
النزيه
في
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بلادك
مــــذ
أوصـــتني
بمؤيـــد
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وقــد
كنـت
صـواما
وللّـه
قائمـا
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تحـوط
بـك
الأنـوار
فـي
كـل
معبد
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تفيـض
علـوم
الـدين
فينـا
هداية
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روتهـا
خيـار
الناس
عن
خير
مسند
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وتقضــي
ضـرورات
الحيـاة
بمهنـة
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جعلـت
لهـا
الحـانوت
قـدام
مسجد
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فآنـا
تبـث
العلـم
بالدرس
جامعا
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وآونــة
بــالكتب
بيعـا
لمتهـدي
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كلامــك
ذكــر
وافتكــارك
نظــرة
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لعلــم
صــحيح
والخطــى
لتعبــد
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نهــارك
للـدين
الحنيفـي
مرشـدا
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وليلــك
قــد
أعــددته
للتهجــد
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وأعرضـت
إعـراض
الكرام
عن
البذا
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وعمـا
يـرى
لهـوا
وما
أنت
من
دد
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تجنبـت
ما
استطلعت
المجامع
خشية
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من
الخوض
في
غير
الطريق
المحمدي
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كـذاك
عفيـف
النفـس
يحـي
شريفهم
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فلا
عنـه
مـن
يعـدو
ولا
هـو
معتدي
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وأديـت
فـرض
الحـج
واخترت
تونسا
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مقـرا
لأخـذ
العلـم
أكـرم
بمقصـد
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فكنـت
بهـا
منهـا
لنـا
خير
عالم
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وأصـبحت
في
الدارين
غوثي
ومسعدي
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ولـي
بـك
أمسى
الذكر
كاسمك
طيبا
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فللـه
يـا
بوشـناق
عنـدك
مـن
يد
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لهـا
الفخـر
ميلادا
قسـنطينة
بـه
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فطـوبى
لـذاك
اليوم
من
يوم
مولد
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وفـازت
بـك
الخضـراء
فوزك
بالذي
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ســعيت
لــه
فيهــا
بعـزم
موطـد
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ســعيت
لأخــذ
العلـم
سـعي
موفـق
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وأزمعــت
فيهــا
هجــرة
لموحــد
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فأخلصــت
للّــه
الدراسـة
فالـذي
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روى
عنـك
شـيئا
مـن
علومك
يهتدي
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سـلوا
حلـق
التدريس
عن
نور
علمه
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سـلوا
جـامع
الزيتونـة
الآن
يشهد
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قضـى
فقضى
في
إثره
الفضل
والتقى
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غريقيـن
فـي
بحـر
من
العلم
مزبد
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مشـى
فـوق
هامـات
التلاميـذ
نعشه
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وبـالروح
كـل
صـاحب
النعش
يفتدي
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علـى
ضـجة
التهليل
ساروا
بشيخهم
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جموعـا
رعاهـا
اللـه
سارت
بمفرد
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علا
جبـــل
الجلاز
بيــن
هتــافهم
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فيـا
لهما
طودين
في
اليوم
والغد
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ولاحظـت
طـودا
فـوق
مثلـه
راسـخا
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فـأرخت
أمسـى
فـي
النعيم
المخلد
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