|
ظلمــوك
يــا
جــدي
ولســت
ظلومـا
|
لمــتى
وحقــك
لــم
يــزل
مهضـوما
|
|
رفـــع
الــدعاوي
واســتبد
ضــلالة
|
ذاك
الزمــان
وجــر
عنــك
همومــا
|
|
عـــدوا
جرائمــه
عليــك
وبــرأوا
|
ســـاحاتهم
منهـــا
فبــت
ملومــا
|
|
نطقـوا
بمـا
شـاءوا
وما
شاء
الهوى
|
وعليــك
كــان
بمـا
قضـوا
محكومـا
|
|
مـــاذا
يفيــدك
والمــؤرخ
ناقــل
|
عنهــم
وإن
كــانوا
إليــك
خصـوما
|
|
قــالوا
بأنــك
جــامع
للمــال
لا
|
تلــوي
علــى
شــيء
ولســت
رحيمـا
|
|
قــالوا
علــى
الإصـلاح
لسـت
بسـائل
|
وربضــت
فــي
كنـف
الفسـاد
مقيمـا
|
|
قــالوا
بأنــك
فــي
وعـودك
مخلـف
|
راجيــك
فيهــم
لــم
يـزل
محرومـا
|
|
شــفتاك
تبســم
والكــف
تصـيد
مـا
|
جلبتـــه
ســطوتكم
ولســت
كريمــا
|
|
أطلقــت
معتســفا
يـدا
اسـتبدادكم
|
فـي
السـاكنين
مـن
الشـقاء
جحيمـا
|
|
أثقلــت
كــاهلهم
ونجلـك
مطلـق
ال
|
أيــدي
فبــات
الـزرع
منـه
هشـيما
|
|
ورتعـت
فـي
اليـت
الحسـيني
مانعـا
|
عنهـــم
ســواك
لتحكــم
الإقليمــا
|
|
وحكمــت
نحــو
الأربعيـن
فكـانت
ال
|
أيــام
نحســا
فــي
البلاد
وشــوما
|
|
ووقفــت
قصــدا
فـي
سـبيل
حماتهـا
|
زمنـــا
لأنـــك
تبغــض
التنظيمــا
|
|
وإلــى
فرنســا
بالخصــوص
عــداوة
|
لــك
مــا
رأوا
للـود
منـك
نسـيما
|
|
هـــذي
مناقبــك
الــتي
أبقيتهــا
|
لبنيـــك
قلبــا
داميــا
مكلومــا
|
|
خمسـون
عامـا
قـد
مضـت
والحـق
فـي
|
غيبــات
جبّــه
لــم
يكــن
معلومـا
|
|
حـــتى
تقمّصــت
الحفيــد
وجئتهــم
|
متمثّلا
فــــي
شخصــــه
مرســــوما
|
|
هـذا
أوان
القسـط
والقسـطاط
في
ال
|
دنيــا
اسـتمع
للصـوت
فيـك
رخيمـا
|
|
ســيريك
مــن
آيــات
عــدله
حـاكم
|
يجــري
الحـوادث
كيـف
شـاء
قـديما
|
|
بــالوقت
أمـره
موكـل
واليـوم
قـد
|
وفـــاك
حقـــك
فــارأ
المنظومــا
|
|
هبّــت
عليــك
ريــاح
نصــر
سـقتها
|
تــذروه
زرعــا
فــي
عـداك
هشـيما
|
|
حججــي
اليــك
دقيقــة
تحتـاج
لـل
|
إمعــان
يكبرهــا
البصــير
نجومـا
|
|
قــد
كنـت
وحـدك
بالليـالي
عالمـا
|
مـذ
كنـت
فـي
وسـط
الرجـال
زعيمـا
|
|
جلــدا
تصــارع
فــي
البلاد
بلاءهـا
|
مستســــلما
لقضــــائه
تســـليما
|
|
قــد
كنــت
فيهـم
كالزمـان
مؤدبـا
|
تمشــي
الهوينـا
لا
تـرى
التهويمـا
|
|
والكـل
يشـهد
فـي
السياسـة
أنك
ال
|
رجــل
الــدها
فيهــا
تعـد
عظيمـا
|
|
لــو
كنــت
خــائنهم
لبعـت
بلادهـم
|
مــذ
كنـت
تحمـل
فـي
يـديك
رقيمـا
|
|
فوضــت
فـي
بـاريس
تفعـل
مـا
تشـا
|
ممـــن
غـــدا
لرســـوله
مخــدوما
|
|
مـا
كـان
مالـك
فـي
الحظـوظ
موزعا
|
لكـــن
خزينـــة
دولـــة
مركومــا
|
|
أعــــددته
للحادثــــات
ذخيـــرة
|
ورضـــيت
كونــك
بــالأذى
موســوما
|
|
كـم
كنـت
دورا
فـي
السياسـة
لاعبـا
|
بيــن
القناصــل
عارفيــك
حكيمــا
|
|
بعــت
المصـوغ
مجهـزا
عنـد
الضـرو
|
رة
جيـــش
رســتم
ســاقه
مأمومــا
|
|
شـهد
العـدو
بأنـك
القـوام
في
الث
|
لــــث
الأخيـــر
بحقّـــه
لتقـــوم
|
|
لــو
لـم
يقلهـا
أشـهد
اللّـه
علـى
|
ذاك
القيــام
لــك
الـدجى
ونجومـا
|
|
شــهد
العــدو
بأنـك
الهـش
البشـو
|
ش
ويــا
لــه
خلقــا
لـديك
كريمـا
|
|
شــهد
العــدو
بعفــة
تنفــي
علـي
|
ك
المعصــيات
ولــم
تكــن
معصـوما
|
|
لــم
يــدر
منطقـك
البـذاء
ولا
درى
|
فمــك
الرحيــق
ولا
اصـطحبت
نـديما
|
|
هـب
ملـت
للحـدثان
مـالت
قبلـك
ال
|
كـــبرا
فلاســفة
تــرى
التنجيمــا
|
|
مـا
كـان
يظهـر
منـك
فهـو
نقيضـها
|
إذ
بــات
رايـك
فـي
الأمـور
سـليما
|
|
كنــت
الشــديد
الاعتقــاد
حقيقــة
|
إن
كــان
ذنبــا
فلتكــن
مــذؤوما
|
|
شــه
العــدو
بقــوة
الإيمــان
فـي
|
ذاك
الفــؤاد
وكــان
فيــه
صـميما
|
|
لـو
لـم
تقـم
تلـك
القبـاب
كشـاهد
|
عـــدك
اليـــك
لأنكــر
المعلومــا
|
|
دلّـــت
علــى
الإخلاص
فــي
أعمــاله
|
للصــــالحين
أقامهـــا
تعظيمـــا
|
|
كـــم
زودتــه
شــيوخها
بــدعائها
|
والفضــل
منــه
لــم
يكـن
معـدوما
|
|
مــن
كــان
يــؤمن
بــالإله
يحبّــه
|
فــذروا
منــافقهم
يــراه
غريمــا
|
|
قـد
قيـل
يـوم
العـزل
في
رمضان
قد
|
أشــبهت
فــي
تقييــدك
المرجومــا
|
|
مــا
كــان
أكبرهـا
وكيـف
يسـغيها
|
شــيخ
أفــاض
مــن
الكتـاب
علومـا
|
|
خطّــت
فكــانت
فــي
صــحيفة
عمـره
|
خطـــأ
مبينـــا
واضــحا
معلومــا
|
|
لـو
لـم
يخـف
الاعتقـاد
لمـا
ازدرى
|
بتقـــاك
قائلهـــا
يعــد
أثيمــا
|
|
لكــن
اذا
بــانت
اليــك
وجــوههم
|
تتلــو
علــى
الطرفيـن
أيـة
سـيما
|
|
يـال
الزمـان
خيانـة
فـي
يـوم
عـز
|
لــك
لا
تقــدر
لــو
وجــدت
عليمـا
|
|
عرضــت
حمايتهــا
القناصــل
نصـرة
|
للحـــق
لكـــن
قــد
رأوك
حليمــا
|
|
قلـــت
البلاد
بلاده
والمـــال
عــا
|
ريــة
وبــت
علــى
الوفـاء
كظيمـا
|
|
لــو
رمــت
احـداث
القلاقـل
عنـدها
|
لجعلـــت
ســـيدك
الأميــر
خــديما
|
|
وافــاك
مــن
بيزمــرك
يحمـل
خطـه
|
أحــد
الخــواص
كفــى
بـه
تفخيمـا
|
|
يرجــو
مقابــل
ذاك
بنــزرت
الــي
|
أكـــبرت
إعطاهــا
وكنــت
رحيمــا
|
|
فـــأجبته
للـــترك
حـــق
لا
لنــا
|
فيهـــا
فعـــاد
كلاكمــا
محرومــا
|
|
علمــا
بأنــك
فـي
الـبراءة
راتـع
|
والـــرزق
كــان
بــأمره
مقســوما
|
|
تنــوي
التمحّـض
للعبـادة
حيـث
قـد
|
عـــدموا
ولســت
بموجــد
معــدوما
|
|
هـدموا
بنـاءك
بالمعـاول
في
السيا
|
ســة
فاغتـدت
تلـك
الصـروح
رسـوما
|
|
يــا
جــد
كنـت
لكنـز
سـرك
طلسـما
|
ففتحــت
بعــدك
بــابه
المختومــا
|
|
كــانت
براءتكــم
قبيــل
براءتــي
|
لغـــوا
وإن
يــك
خطهــا
مرقومــا
|
|
لكنهـــا
رجعـــت
إليـــك
صــحيحة
|
لا
خــدش
مــن
بيـن
السـطور
مشـيما
|
|
يـا
قـوم
ذنـب
أبـي
هـو
اسـتقلالكم
|
مــذ
كــان
قطركمــو
لــه
محكومـا
|
|
كــان
المخــافظ
عـن
كيـان
بلادكـم
|
ضـــحى
حيـــاته
ظالمــا
مظلومــا
|
|
يرجــو
بــأن
تبقــى
البلاد
لأهلهـا
|
أبــدا
يــرد
مــن
الجيـوش
هجومـا
|
|
والــدهر
يــأبى
والمقــدر
كــائن
|
حــتى
ســقوه
علـى
الـدفاع
سـموما
|
|
إذ
كـاد
يظفـر
بـالمنى
لـولا
القضا
|
ألقـــى
بســيفه
بينهــم
مثلومــا
|
|
نـــدم
الأميــر
ولات
حيــن
ندامــة
|
مــذ
حطمتــه
يــد
الشـقا
تحطيمـا
|
|
حضــر
الجنـازة
يـوم
دفنـه
قـائلا
|
أنـــي
رممـــت
وزارتــي
ترميمــا
|
|
يجــري
الـدموع
ولـن
يفيـد
عـويله
|
وخــز
الضــمير
غـدا
إليـه
أليمـا
|
|
وكــذاك
خيـر
الـدين
أصـبح
نادمـا
|
إذ
لــم
يكــن
حـر
الضـمير
لئيمـا
|
|
نقــل
ابــن
عيــاد
ندامــة
صـهره
|
هـــذا
وكلمـــه
بهـــا
تكليمـــا
|
|
مــذ
قــال
أكـبر
غلطـة
عمـت
بهـا
|
البلــوى
خصوصــا
عزلــه
وعمومــا
|
|
إقــرار
مــن
ظلمــوه
شــاهد
حقـه
|
قــل
فليكــم
حقــا
بــه
مجزومــا
|
|
هـذي
هـي
الحجـج
الـتي
أدلـي
بهـا
|
أتمتمهــــا
لــــبروره
تتميمـــا
|
|
كــانت
كمثــل
الشـمس
تحـت
سـحابة
|
فــأزحت
عنهــا
بــالقريض
غيومــا
|
|
حفظــت
لـه
الـدعوى
فقمـت
برفعهـا
|
أعلــي
البنــاء
مــدعما
تــدعيما
|
|
وتركـــت
للمنثــور
تفريــدي
لــه
|
ســفرا
يحــوم
بـه
الهـدى
تحويمـا
|
|
هذا
التقي
الذاكر
القوام
في
الليل
|
المعظـــــم
ربـــــه
تعظيمـــــا
|
|
هـذا
التقـي
المظلوم
ما
بين
الورى
|
مـــن
صـــيروه
بظلمهــم
مشــتوما
|
|
مــا
كــان
يعــرف
للعبـادة
غيـره
|
مــذ
كــان
هــذا
الساقسـي
فطيمـا
|
|
مــا
قــدس
الصـلبان
يومـا
واحـدا
|
فيهــــم
ولا
ضــــما
ولا
تقنيمـــا
|
|
حملـــوه
طفلا
فــي
الأســارى
ســنه
|
خمـــس
فـــان
لصـــدرهم
مضــموما
|
|
وافـــى
لتــونس
فاصــطفاه
ســميه
|
فــــرأى
الجلال
يحفّـــه
تكريمـــا
|
|
أم
المشــير
تــراه
ضــو
وحيــدها
|
ورأى
العنايــة
منــه
والتقــديما
|
|
مـا
زال
يرقـى
فـي
الـدنو
مراتبـا
|
حـــتى
تـــزوج
أختـــه
كلثومـــا
|
|
مــا
غـادر
الـبيت
الحسـيني
لحظـة
|
حبــا
وعظمــا
فـي
القبـور
رميمـا
|
|
منهـــم
وفيهــم
شــأنه
ذو
رفعــة
|
كـــل
يعظـــم
كفـــه
الملثومـــا
|
|
ملأ
الفخــار
الصــدر
أوســمة
لــه
|
شـــرفت
فكـــانت
فــوقه
مشــموما
|
|
هـــذي
شـــرائطها
لـــدي
شــهيدة
|
بقيــت
وقــد
ذهـب
العصـير
كرومـا
|
|
ظــل
المــؤرخ
بيــرم
عشــواء
تـخ
|
بـــط
فــي
الظلال
وحطــه
تســويما
|
|
أملــى
عليـه
ضـميره
الـدنس
الـذي
|
لــم
يعــرف
التحليــل
والتحريمـا
|
|
ذكـر
النقيـض
ليـوهم
القـاري
بـأن
|
ه
صـــادق
كــذب
الســفيه
زنيمــا
|
|
اللــه
انطقــه
بهــا
فجــرى
بهـا
|
قلــم
الحقيقــة
واضــحا
مفهومــا
|
|
قــد
نــال
مــن
جـدي
فقيظنـي
لـه
|
رب
العدالـــة
ناقمـــا
ملزومـــا
|
|
جــردت
منــه
برغــم
مـوته
مجرمـا
|
عـــــاقبته
وأمتــــه
محمومــــا
|
|
قــد
كــان
جــدي
مبعــدا
أمثـاله
|
بعــد
السـلمي
مـتى
رأى
المجـذوما
|
|
عرضـــت
عليــه
ســطوره
فتلا
نــبي
|
الشـــعر
عنــه
بيتــه
المنظومــا
|
|
وإذا
اتتـــك
مــذمتي
مــن
نــاقص
|
فهــي
الشــهادة
لـي
ولسـت
ذميمـا
|
|
ذكراهـــا
عظـــة
يقـــوم
بعــدها
|
مـا
اعـوج
مـن
فكـر
الـورى
تقويما
|
|
إذ
لــم
يكـن
قـول
المـؤرخ
فيصـلا
|
يعطــي
لنفســه
وحــده
التحكيمــا
|
|
كــم
ضــاع
حــق
و
اختفــت
آثـاره
|
متلاشـــيا
مـــا
بينهــم
مصــروما
|
|
عجبــا
لقـوم
درسـوا
التاريـخ
لـم
|
تفطــن
لمـا
قـد
كـان
منـك
مرومـا
|
|
ســر
السياســة
لا
يــذاع
زمانهــا
|
ولــذاك
كــان
الجــد
فيـه
كتومـا
|
|
حــتى
إذا
كشــف
الزمــان
سـتارها
|
بــرح
الخفــاء
فلـم
يعـد
موهومـا
|