|
أرقــت
ومـا
غيـر
الشـجون
سـمير
|
لا
الســهد
يتركهــا
ولا
التفكيـر
|
|
ألــم
ألــم
بهـا
فبـات
مضـاجعا
|
لكنـــه
بيـــن
الضــلوع
يســير
|
|
تشــكو
ولا
مــن
ســامع
لشـكاتها
|
فـي
جنـح
ليـل
غـاض
فيـه
النـور
|
|
علــق
السـهاد
بطرفهـا
فتضـاءلت
|
أجفانهـــا
وأكنهـــا
الــديجور
|
|
تنعــي
علــى
آمالهــا
بسـعالها
|
والــدمع
منهــا
لؤلــؤ
منثــور
|
|
تتلفــع
الخـرق
الـتي
هـي
ملبـس
|
هــي
مفــرش
هــي
كلّــة
وســرير
|
|
أقعــت
مقرفصــة
فــأيقظ
أمهــا
|
هلعـــا
تهــدج
صــوتها
وزفيــر
|
|
لبـت
نـداها
الأيـم
النـاعي
لهـا
|
فــي
الثـاكلات
حليلهـا
المقبـور
|
|
خفــت
لطلبتهـا
فأدماهـا
المـدا
|
س
فضـاعف
البلـوى
الإنـا
المكسور
|
|
وقفـت
ولـولا
البرق
من
خلل
الكوى
|
مـا
سـاغ
فـي
ذاك
المكـان
عبـور
|
|
وجــدت
بجانبهــا
الإنـاء
مهشـما
|
تـــومي
وحيــدتها
لــه
وتشــير
|
|
همهــام
همــت
بــالكلام
فهمهمـت
|
عنــد
المـراق
وخانهـا
التعـبير
|
|
لا
الجيـب
فيما
انجاب
جاوبها
ولا
|
فــــتر
يســـاورها
ولا
تقصـــير
|
|
لكنــه
العــدم
المخيــم
عنـدها
|
فــي
كســر
حجرتهــا
لـه
تعميـر
|
|
دارت
حواليهــا
وألقــت
طرفهــا
|
فــي
الظلمــتين
وقلبهـا
مسـجور
|
|
فــي
السـائلين
ذيولهـا
مجـرورة
|
والــبيت
يرشــح
سـقفه
الممطـور
|
|
شــق
التطــوح
فـي
الهزيـع
بهـا
|
إلـى
جـار
ولـو
قـدرت
اليه
تطير
|
|
فأعاضـت
ابنتهـا
القـراح
وحسبها
|
فيــه
الحيــاة
وأنــه
الميسـور
|
|
واستصـبحت
بالخـاطف
الأبصـار
فـي
|
حلـك
الـدجى
ومـع
الـوميض
تـدور
|
|
اســتلفتت
نظـر
العليلـة
للحيـا
|
وبــه
تعــذر
فـي
السـبيل
مـرور
|
|
وانضــمت
الأســمال
عــن
منهوكـة
|
ألــف
ارتعاشـا
جسـمها
المقـرور
|
|
كالطبـل
يقـرع
بـاب
مخـدعها
على
|
قصــف
الرعــود
وللريـاح
صـفيرل
|
|
فتقلبـت
فـي
المضـجع
المعهود
تس
|
تــدعى
النعــاس
وإنــه
لعســير
|
|
رقصـت
بهـا
سـفن
الهواجس
واستوت
|
عنــد
التصــبر
والفقيــر
صـبور
|
|
مـا
اسـتقبلت
وجـه
الصباح
بشمسه
|
حــتى
دعاهــا
الطـارق
المـأجور
|
|
سأل
الأميمة
عن
وحيدتها
وفي
التس
|
آل
منـــــه
منــــذر
وبشــــير
|
|
أصـغت
لـه
بنـت
الكئيبـة
مسـهبا
|
فيمــا
حــواه
حــديثه
المـأثور
|
|
حنّـت
إلـى
المأوى
المشاد
لمثلها
|
وهفــا
عليــه
فؤادهـا
المفطـور
|
|
أحيــا
بمــا
أملاه
ميـت
رجائهـا
|
لمــا
رمــى
بعقالهــا
التحريـر
|
|
نشـطت
وأجهشـت
الفتيـة
بالكبكـا
|
فأســال
عبرتهــا
أســى
وســرور
|
|
قـالت
متى
المأوى
افتتاحه
بيننا
|
وكفتــك
حــالي
فالشــهور
دهـور
|
|
قـال
انتظـارك
يـوجب
استنهاضـهم
|
إنـــي
بهــم
وبحالتيــك
خــبير
|
|
لـي
فـي
القريـض
فلا
تخـافي
جولة
|
يحيــا
بهــا
للســامعين
شــعور
|
|
ســأثير
مــن
قـومي
عواطـف
ملّـة
|
ســمحاء
تنهــض
للعلــى
وتثــور
|
|
عربيــة
الإحسـاس
سـيماها
السـخا
|
كـــل
بفضـــله
آمـــر
مـــأمور
|
|
فاسـتتبعي
منـي
الخطـى
لتشـاهدي
|
ويشـــاهدوا
فيشــاهد
التــأثير
|
|
هـي
حفلـة
لـولاك
مـا
كـانت
تقـا
|
م
ولا
اســتتب
مـن
الحضـور
حضـور
|
|
فاسـتعذرت
وأنـابت
الـداعي
لهـا
|
بيــن
الكــرام
ومثلهــا
معـذور
|
|
فــوقفت
وقفــة
شــاعر
مســتنهض
|
هممـا
بهـا
طرفـي
البصـير
قريـر
|
|
أنــا
موفـد
وافيتكـم
مـن
حيّهـا
|
وأنــا
رســول
نظيرهــا
وســفير
|
|
بـاللّه
مـن
منكـم
لمنكسري
القلو
|
ب
ومــن
إلـى
المستضـعفين
نصـير
|
|
اللّـه
فـي
الضـعفا
فكونوا
بلسما
|
لجراحهــــم
فضـــيعكم
مشـــكور
|
|
وفـوا
الفقيـر
حقـوقه
تكتـب
لكم
|
حســـناتها
وجزاؤهــا
الموفــور
|
|
هـــذا
لعمــري
محــض
انســانية
|
وجبــــت
فلا
عـــذر
ولا
تخييـــر
|
|
قـاموا
بهـا
وعلـى
البقيـة
مدهم
|
مــا
فـي
العطـا
مطـل
ولا
تقـدير
|
|
هـذا
قليلـي
والعطـاء
سـيان
فـي
|
هــذا
الســبيل
قليلــه
وكــثير
|