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فراقـك
سـيدي
أبكى
العيونا
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وصـرنا
بعـد
فقـدك
حايرينا
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أصبنا
في
القلوب
وليس
تبرى
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قلـوب
داؤهـا
أضـحى
دفينـا
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لقـد
عظمـت
مصـيبتنا
وجلـت
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عشـية
مـات
خيـر
المرشدينا
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أيـا
بحر
العلوم
فداك
روحي
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ويـا
خير
الهداة
الصالحينا
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أمـا
واللـه
لا
نسـطيع
صبراً
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بلـى
صـرنا
لفقـدك
جازعينا
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فليــس
سـواك
واللـه
حـبيب
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نـروم
رضـاه
دومـاً
أجمعينا
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وليــس
سـواك
واللـه
رحيـم
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برحمتــه
العفـاة
مظللونـا
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وليــس
سـواك
واللـه
شـفيق
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يــؤم
جنــابه
المتخلفونـا
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وليــس
سـواك
واللـه
عليـم
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يــؤم
جنــابه
المتعلمونـا
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وليــس
سـواك
واللـه
فقيـه
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يــؤم
جنــابه
المتفقهونـا
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وليــس
سـواك
واللـه
إمـام
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يقيـم
العدل
والحق
المبينا
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وليــس
سـواك
واللـه
دليـل
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ينيـر
سـبيل
كـل
المهتدينا
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أمـا
واللـه
حـق
لنـا
بكاء
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علـى
من
كان
فخر
العالمينا
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أمـا
نبكـي
أبـا
براً
رؤوفاً
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أمـا
نبكـي
منار
العارفينا
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لفقـدك
صـارت
الـدنيا
ظلاماً
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وصـار
النـا
فيهـا
تائهينا
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لفقـدك
صـارت
العلماء
تبكي
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ويبكي
الناس
خير
المرشدينا
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لفقـدك
صـارت
البؤساء
تبكي
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ويبكـي
الناس
حظ
البائسينا
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لفقـدك
أصـبح
الفقراء
حسرى
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فقـد
فقدوا
عميد
المحسنينا
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لفقـدك
أصـبح
الفصحاء
بكما
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وقـد
كـانوا
بفضلك
ناطقينا
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ومـاذا
أن
أعـدد
مـن
صـفات
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ولا
تحصــى
صـفات
الأكرمينـا
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ألا
ياســيدي
عفــواً
وعـذراً
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فـاني
صـرت
حيرانـا
حزينـا
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ألا
يــا
سـيدي
صـبري
عـديم
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وعينـي
تسكب
الدمع
الثخينا
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ألا
يـا
أيهـا
الاخوان
جودوا
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بــدمعكم
وقــولا
أجمعينــا
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أيـا
ربـاه
ألهمنا
اصطباراً
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وعوضــنا
ثـواب
الصـابرينا
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وعـوض
ذا
الفقيـد
جنان
خلد
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رفيـق
المصـطفى
والطاهرينا
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