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لا
عـذر
للقلـب
ان
يقـن
السلو
ولا
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للعيـن
ان
تبـق
فـي
آماقهـا
بللا
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ان
النعـى
بفيـه
الـترب
فـاه
بما
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أسـهى
واسـهر
مـن
تـبريحه
المقلا
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رمـى
القلـوب
بمـا
لـو
كان
صادفه
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ضـروى
ولبنـان
دهدى
منهما
القُلَلا
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ألقــى
علـى
بيضـة
الاسـلام
كلكلـه
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مـا
لـو
تجسـّمَ
هـدّ
السهل
والجبلا
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خطــبٌ
تنكــرت
الــدنيا
بـه
وبـه
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قـد
البسـت
بعد
ملبوس
الحلى
عطلا
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ناهيـك
ممـا
دهـى
مـن
حـادث
جلـل
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فـدان
من
كان
يكفي
الحادث
الجللا
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نعــى
محمـدنا
النـاعي
فقلـت
لـه
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هلا
عطفــت
عليــه
العلـم
والعملا
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حــبر
تواضــع
للمـولى
فصـار
لـه
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بـه
علـى
كـل
مـن
رام
العُلُـوّ
عُلا
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سـاس
الأنـام
بسـلطان
التقـى
فلـه
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قـد
اصـبحت
خـولا
منـه
ذو
والخيّلا
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مـن
عـاش
للنـاس
أمّـا
طالما
حضَنَت
|
أبناءهــا
وأميــرا
طالمـا
عـدلا
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مـن
سـالم
الخلـق
لا
حقدا
ولا
حسدا
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ولا
ملاحـــاة
منـــه
لا
ولا
جـــدلا
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أربـى
حيـاء
علـى
العـذراء
مرسلةً
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مـن
خـدرها
حولها
الاستار
والكللا
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قـد
عـود
الطـرف
إطراقـا
كـأن
به
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علـى
جمـال
المحيـا
والعلـى
خجلا
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مـا
جـادلا
الزمـن
الماضـي
بمشبهه
|
فلا
علــى
الزمــن
الآتـي
إذا
بخلا
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يـا
هالكـا
وقسـِيّ
المـوت
ما
برحت
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ترمـي
وأغـراض
رامي
نبلها
النبلا
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ان
تخترمـك
قنـى
أم
اللهيـم
فكـم
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نفسـت
معضـلها
المرهـوب
إن
نـزلا
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أو
سرت
عن
هذه
الدنيا
الغداة
لقد
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سـارت
مزايـاك
فـي
أقطارهـا
مثلا
|
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أو
صـار
مثواك
في
بطن
الثرى
فلكم
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زاحمـت
فـي
برجـه
المريّخ
أو
زحلا
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نفــاد
زادك
مــن
دنيــاك
زوّدنـا
|
حزنـا
وإن
كنـت
مسـرورا
بـه
جذلا
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ووَردُك
المـوت
روّانـا
الزعـاق
وإن
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روّاك
مــوردهُ
الصــهباء
والعسـلا
|
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يــا
بـي
سـلوك
أنـا
كلمـا
عرضـت
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غـــرّاءُ
تـــذكرنا
أيّامــك
الاولا
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يـأبى
سـلوّك
حسـن
القـول
منك
إذا
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أهـل
المساجد
خاضوا
اللهو
الهزلا
|
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تــأبى
مــواعظ
لا
تنفــك
تبعثهـا
|
تحيى
القلوب
وتوتى
الذكر
من
غفلا
|
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لهفـي
عليـك
إذا
نادى
العشيرة
عن
|
مـا
نـابه
لـزم
التسـويف
والكسلا
|
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لهفـي
عليـك
إذا
ما
الغيث
أخلفنا
|
لهفـي
إذا
ما
شهاب
الفتنة
اشتعلا
|
|
لهفـي
إذا
انتهـب
الامـوال
منتهـب
|
فـي
حالـة
تبعـث
الأعـذار
والعللا
|
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قـد
عشـت
فينـا
فلا
عيـش
يمَـلّ
ولا
|
ســـيف
يســل
ولا
نفــس
تضــل
ولا
|
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حـتى
انقضى
الاجل
الموقوت
وا
أسفى
|
والمـرءُ
ليـس
يراخـي
فضـله
الأجلا
|
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فلـم
تـدع
فـوق
ظهـر
الأرض
من
بشر
|
الا
وأودعـــت
فــي
احشــائه
خبلا
|
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لـو
كنـت
تفـدي
بمبـذول
لأرخـص
ما
|
مــن
النفـائس
والأنفـاس
فيـك
غلا
|
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ولـو
حمتـك
سـيوف
الهنـد
لاخـترطت
|
منّـا
الأكُـفّ
سـيوفاً
تسـبق
العـذلا
|
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يــا
أربعيــن
جــواداً
إن
حسـبكم
|
لطـف
المهيمـن
فلترضـوا
بما
فعلا
|
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ولتــذكروا
لارزء
لاضــاعت
أجـوركم
|
بخـاتم
الرسـل
تنسوا
خاتم
الفضلا
|
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فــالموت
مـاء
علينـا
حـقّ
مـوردهُ
|
مـن
دونـه
عبّـدت
اسـلافنا
السـبلا
|
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والحمــد
للّـه
فـي
بـاقي
أرومتِـه
|
مـن
ليـس
يعمـل
الا
مثـل
مـا
عملا
|
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انـا
نـرى
المصـطفى
واللّه
ذو
كرم
|
منـه
بمـا
قـد
حـوى
من
نعته
بدلا
|
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نـال
الزيـادة
والحسـنى
وصادف
ما
|
أسـداه
مـن
صـالح
العمال
قد
قبلا
|
|
يـا
رب
واجعلـه
مـن
أمسـى
بمدخله
|
للقـبر
فـي
جنـة
الفردوس
قد
دخلا
|
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وأول
عــائش
أمّ
المــومنين
قــرى
|
ضــيف
ببــاب
كريــم
موسـر
نـزلا
|
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ورقّهــا
لجــوار
الشــيخ
إن
لهـا
|
حبلا
متينــا
بحبـل
الشـيخ
متصـلا
|
|
وجازهـا
عـن
يتـامى
المسلمين
وعن
|
مــا
وافقـت
منتهـى
آمـاله
الاملا
|
|
يـا
نعمهـا
امـرأة
لـم
يحكها
رجل
|
فضـلا
ونعـم
أخوهـا
المرتضـى
رجلا
|
|
شـمس
وبـدر
اضـاءا
الافـق
فـي
قرن
|
حـتى
إذا
اسـتكملا
ما
استكملا
أفلا
|