قـــد
عشــقناك
لا
لأنــك
أنــثى
|
منــك
يقضـي
أوطـاره
الشـهواني
|
لا
ولا
أنــت
بالوحيــدة
فـي
حـس
|
نــك
حـتى
نقـول
مـا
لـك
ثـاني
|
بــل
أطعنـا
الهـوى
لأنـك
أنـثى
|
جمعـــت
ذاتهــا
أدق
المعــاني
|
فطمـوح
الشـباب
صـار
لـه
العقل
|
كمــا
يقتضــي
الهــدى
كعنــان
|
واضطرام
النفس
الغريرة
بالشهوة
|
تخبـــوه
رغبــة
فــي
الصــيان
|
لــك
عقــل
لا
كــالعقول
ونفــس
|
لأجــــل
الميـــول
كالميـــدان
|
فكمــال
الخصــال
فــي
ضـفتيها
|
بجلال
الجمـــــال
يلتقيـــــان
|
مــا
رأت
مقلتــاي
قبلـك
أنـثى
|
قــد
تحلــت
بالحســن
والاحسـان
|
كلمــا
استرســلت
دموعـك
يسـتر
|
سـل
قلـبي
الكسـير
فـي
الذوبان
|
إن
قلــبي
ودمــع
عينــك
هــذا
|
بعــض
مــا
للـوداد
مـن
أثمـان
|
يثمــر
الــود
إن
تعــارفت
الأن
|
فـــس
لا
مــن
تعــارف
الأبــدان
|
عشـت
طـول
الحيـاة
أشـعر
بالغر
|
بــة
بيــن
الصــحاب
والإخــوان
|
وعجيـب
أن
لسـت
أغفـل
عن
ذكراك
|
فــي
اليــوم
غيــر
بضـع
ثـوان
|
أنــت
أنســي
برغـم
بعـدك
عنـي
|
وســـمير
معـــي
بكـــل
مكــان
|
إن
ذكـراك
كالـدواء
لذيذ
الطعم
|
يشــفي
مــن
ســقم
بعـد
عرانـي
|
أيهـا
النـاس
مـن
عـذيري
فـي
ح
|
ب
فتـــاة
كأحســـن
الفتيـــان
|
فلهــا
رقـة
الأنوثـة
فـي
العـش
|
ق
وفــي
المجــد
همــة
الشـبان
|
تمنـع
الثغـر
أن
يـرف
على
الثغ
|
ر
حيــاء
ورغبــة
فــي
الصـيان
|
وهـي
لـو
كـانت
الصـبابة
تـردي
|
لــــتردت
بلهفـــة
الولهـــان
|
تتـــأبى
فــي
رقــة
واحتشــام
|
ودلال
يــــذوب
منـــه
جنـــاني
|
ثـم
ترتـاح
مـن
تـذكرها
الـبين
|
فتلقــي
بــالنفس
فــي
أحضـاني
|
ولهــا
مــن
كمــال
عفتهـا
حـص
|
ن
يقيهـــا
وعصـــمتي
إيمــاني
|
تســحر
القلـب
بالحـديث
ونـاهي
|
ك
بقــــول
كأبـــدع
الالحـــان
|
كلمـا
اشـتد
شـوقها
اسـتعطفتني
|
بكلام
العيــــون
لا
باللســــان
|
نظــرات
تشــف
عــن
مضـض
الصـب
|
ر
وتملــي
لخــاطري
مـا
تعـاني
|
فيــثير
الهــوى
كــوامن
نفسـي
|
وبهـــا
مـــن
مثــاره
ضــعفان
|
فيبيـح
الثغـران
مـن
ألـم
الشو
|
ق
كلامــــاً
تلـــذه
الشـــفتان
|
وهــي
ترتــاع
حيــن
يلتقيــان
|
ثــم
ترتــاحع
حيــن
يفترقــان
|
وقفـت
مـن
حيائهـا
الجـم
واللو
|
عـــة
بيــن
الإبــاء
والاذعــان
|
موقفــاً
مدهشـاً
تكافـح
فـي
نـز
|
عـــات
نفــس
تشــب
كــالنيران
|
قــد
أرانـي
الغـرام
أن
نقيضـاً
|
ونقيضــاً
فــي
النفـس
يجتمعـان
|
ويــح
روحيــن
عنــد
كـل
عنـاق
|
كادتــا
فــي
الفضـاء
تنطلقـان
|
وهمـا
بعـد
كلمـا
التقـت
العـي
|
نـان
وصـدق
الهـوى
وفرط
الحنان
|
هـان
واللـه
فـي
الإقامـة
والظع
|
ن
وصــدق
الهـوى
وفـرط
الحنـان
|
ولعــي
بالجمــال
كــان
وللنـا
|
س
ولـــوع
بالأصـــفر
الرنـــان
|
ويــثير
اغتبــاط
نفســي
نفسـا
|
ن
بحبــــل
الـــوداد
تتصـــلان
|
فـدعوني
يـا
قـوم
أنعـم
بـالحس
|
ن
مليــاً
فــي
غفلــة
الأزمــان
|
غايـة
اللـه
والطبيعـة
في
الخل
|
ق
كمـــال
النفـــوس
والأبــدان
|
إنمــا
تعمــر
العــوالم
بالـح
|
ب
وفــي
الحســن
بهجـة
الأكـوان
|