|
صــلاة
اللَــه
مــن
غيــر
انفصـام
|
علــى
المختــار
مــع
آل
الكـرام
|
|
اعــد
ذكـر
الحـبيب
علـى
احـترام
|
وخـــــالف
رأي
أصـــــحاب
الملام
|
|
وكــرر
مــا
اســتطعت
رحيـق
قـول
|
بكاســات
الحــديث
علــى
الكـرام
|
|
ومنهـــم
شــنف
الأســماع
وانــثر
|
دراري
المــدح
فــي
خيــر
الأنـام
|
|
إمـــام
الانبيـــاء
حــبيب
ربــي
|
دليــل
الصــالحين
مــدى
الـدوام
|
|
مفيــد
الخيــر
أشــرف
خلـق
ربـي
|
كريـــم
الاصــل
مرفــوع
المقــام
|
|
بســـيم
الثغـــر
ميمــون
بشــير
|
بخيــــرات
تـــدوم
بلا
انصـــرام
|
|
اســـيل
الخــد
بــراق
الثنايــا
|
عــــديل
القـــد
مقبـــول
الكلام
|
|
جميــل
الــوجه
مصــباح
البرايـا
|
مبلغهــــم
إلــــى
دار
الســـلام
|
|
وقــــائدهم
ومرشــــدهم
وذخـــر
|
العصــاة
شــفيعهم
يــوم
القيـام
|
|
رؤف
مشـــــفق
بـــــر
رحيـــــم
|
كريـــم
محســـن
حســـن
القــوام
|
|
لـــه
آيـــات
حــق
قــد
أفــادت
|
بــأن
القــدر
عنــد
الــرب
سـام
|
|
فهــاك
النــذر
منهــا
وهـي
بحـر
|
محيـــط
لا
يحيـــط
بـــه
كلامـــي
|
|
فحــول
القــوم
عنهــا
فـي
قصـور
|
ولكنـــي
أزيـــن
بهـــا
نظــامي
|
|
فأفضــــلها
وأفخرهــــا
كتـــاب
|
مــن
الرحمــن
جـاء
علـى
انتظـام
|
|
بـــديع
القـــول
معســول
شــريف
|
منيـــف
لا
يمـــل
علــى
الــدوام
|
|
طريـــق
مســـتقيم
مـــن
نحـــاه
|
يبلغـــــه
رضــــا
رب
الســــلام
|
|
ومنهــا
وهــو
أمــي
حــوى
خيــر
|
آداب
وأنــــــــــــــواع
الكلام
|
|
ومنهــا
قــوة
العــزم
الــذي
لا
|
يضـــاها
أولـــه
أحـــد
يســامي
|
|
دعــا
أهـل
الحجـاز
علـى
انفـراد
|
وســفههم
وكــانوا
فــي
انتقــام
|
|
فلــم
يثنيـه
هـول
عـن
مـراد
الإ
|
لــه
ولــم
يــزل
وفــق
المــرام
|
|
وقـد
قاسـى
مـن
الأهـوال
مـا
يعجز
|
الجلـــد
القـــوي
عــن
القيــام
|
|
وأمهلهـــم
كــثيراً
والبلا
منهــم
|
نحــــو
المكـــرم
فـــي
تـــرام
|
|
ولمــا
اشــتد
مــا
لاقــى
أتــاه
|
بـــــأمر
بعــــض
أملاك
كــــرام
|
|
وقــال
لــه
إذا
شــئت
انتقامــا
|
تراهــم
بعــد
أمـرك
فـي
انعـدام
|
|
فلـــم
يخـــتر
هلاكهـــم
وقـــال
|
لعــل
النســل
يســمع
لــي
كلامـي
|
|
ولـم
يـبرح
عـن
التـذكار
والـوعظ
|
والاعــــدا
يـــروه
علـــى
الملام
|
|
فــدته
النفــس
مــن
رؤوف
رحيــم
|
كريـــم
النفـــس
مختــار
امــام
|
|
بشــير
محسـن
بـر
عظيـم
الشـمائل
|
صـــــفوة
الرســـــل
الفخــــام
|
|
مفيـض
الخيـر
رحمـة
مالـك
الملـك
|
للأكـــــــوان
معســــــول
الكلام
|
|
شــريف
الأصـل
منتجـع
الـورى
عنـد
|
ســوء
الحــال
فــي
يـوم
الزحـام
|
|
حــبيب
قــد
جــوى
مـن
فضـل
ربـي
|
مقامـــا
قـــد
علا
كـــل
الأنــام
|
|
واكرمــه
الكريــم
اللَــه
فضــلا
|
بحـــوض
بـــارد
يـــوم
القيــام
|
|
وشـــــفعه
وأعطـــــاه
لــــواءً
|
عليــه
الرســل
طـرا
فـي
ازدحـام
|
|
وأرســله
إلــى
الثقليــن
واختـا
|
ره
حبـــا
وزيــد
علــى
المــرام
|
|
وأكرمـــــه
بـــــآل
خيــــر
آل
|
شــراف
قــد
حبــوا
خيـر
احـترام
|
|
علــى
الاثــار
ســاروا
فـي
خشـوع
|
وللعليـــاء
كــانوا
فــي
تســام
|
|
هم
الغر
الهداة
هم
العبيد
الكرام
|
الراغـــــبين
عــــن
المنــــام
|
|
هــم
الأســد
الفخــام
هـم
الـذين
|
أدامــوا
الــذل
فـي
بـاب
السـلام
|
|
بتقـــواهم
وبالمختـــار
حــازوا
|
مقــام
الأنــس
مــع
قـرب
الـدوام
|
|
فكيــف
وأصــلهم
خيــر
البرايــا
|
حـــبيب
اللَــه
مرفــوع
المقــام
|
|
ملاذ
قــــام
يــــدعو
باجتهـــاد
|
إلــى
الرحمــن
مـع
حسـن
اهتمـام
|
|
وكـــل
النــاس
فــي
غــي
وجهــل
|
وتيــه
فــي
المهــامه
واجــترام
|
|
فـــأكرمه
المهيمـــن
إذ
وقـــاه
|
وكــان
بــه
علــى
خيــر
اعتصـام
|
|
وأيـــــده
وأســـــعفة
بنصــــر
|
واكـــــرام
بأصــــحاب
كــــرام
|
|
وأتحفـــه
بــروح
القــدس
فضــلا
|
وعلمــــه
الشـــرائع
بـــاحترام
|
|
ومنهـــا
حنـــة
الجــذع
جهــارا
|
وتســـبيح
الحجـــارة
والطعـــام
|
|
ونســج
العنكبــوت
عليــه
أيضــا
|
ونطــق
الضــب
مــع
بيـض
الحمـام
|
|
وتســليم
الحجــارة
منهــا
أيضـا
|
وأشــــجار
كــــذا
نطـــق
الغلام
|
|
ومـــن
خلــف
يــرى
صــلى
عليــه
|
إلــــه
العــــالمين
كالامــــام
|
|
ومنهـا
رد
عيـن
قتـادة
بعـد
قلـع
|
مــــع
شــــفا
عيــــن
الامـــام
|
|
ومنهــا
رد
شــمس
بعــد
غيبوبــة
|
والعــــود
ابــــدل
بالحســــام
|
|
ونبـع
الماء
من
يده
لسقى
الصحابة
|
كــــذا
نمــــو
فـــي
الطعـــام
|
|
ومنهــا
ســجدة
الفحــل
احترامـا
|
بمحضــــر
ســـادة
غـــر
كـــرام
|
|
وضـــرع
ركانـــة
ونـــزول
غيــث
|
لــدى
استســقائه
غيــر
انصــرام
|
|
سـبوعا
لـم
يقـف
حتى
دعا
بانكشاف
|
المــــاء
كــــف
عـــن
الأنـــام
|
|
لســـلمان
النضــار
بــه
تضــاعف
|
وأثمـــر
نخلـــه
أيضـــا
بعــام
|
|
ومنهـــا
أن
ســـرى
للقــدس
ليلا
|
بـــإكرام
مــن
الــبيت
الحــرام
|
|
وصــــلى
بـــالنبيين
احترامـــا
|
فـــاكرم
بـــالمكرم
مــن
امــام
|
|
رقـا
السـبع
الطبـاق
علـى
اعتناء
|
وتبجيــــل
وتعظيــــم
المقـــام
|
|
وعنــد
الســدرة
العظمــى
تــأنى
|
أميــن
الــوحي
عــن
خيـر
الأنـام
|
|
واحمــد
لــم
يــزل
يسـموا
علـوا
|
ولــم
يــبرح
لــدرك
السـؤل
سـام
|
|
إلــى
أن
نــال
وصــلا
مــن
حـبيب
|
تعـــالى
عـــن
ملابســة
المنــام
|
|
وعـــن
كيـــف
ومثـــل
أوجهـــات
|
وعـــن
جـــرم
وســـعى
أو
مقــام
|
|
فقربـــــــه
واكرمــــــه
وأولا
|
نـــــوالا
يكيـــــف
بـــــالكلام
|
|
واتحفـــــه
وشــــرفه
واســــدى
|
وبشــــره
بخيــــرات
الــــدوام
|
|
فعــاد
معطــرا
فــي
طيــب
عيــش
|
لمكـــة
قبلــة
القــوم
الكــرام
|
|
واخـبر
فاسـتفاد
المؤمنون
العلوم
|
العلــوم
وأحــرزوا
فيــض
السـلام
|
|
وبـــاء
بضـــد
مـــا
وجــدوا
لآم
|
قلـــوه
إذ
نحــو
نهــج
النعــام
|
|
وقــد
شــاموه
فــي
حسـن
اهتـداء
|
وتقــــويم
وصــــدق
واحتشــــام
|
|
وســـموه
الأميـــن
لحســـن
حــال
|
ومـــع
ذا
آثـــروا
ســـبل
الظلام
|
|
فبشـــرهم
علــى
الايمــان
خيــرا
|
وحـــذر
جمعهـــم
دهــم
انتقــام
|
|
ولمــا
أعرضــوا
وأبــوا
وقـاموا
|
لـــدفع
الحــق
جمعــا
بــالتزام
|
|
وهـــاجر
صـــاحب
الآبـــات
ســرا
|
لطيبــة
مــن
فنــا
بيــت
حــرام
|
|
وســل
الســيف
فـي
الرحمـن
قصـدا
|
لفعــل
الأمــر
مــع
تـرك
الحـرام
|
|
أبــــادهم
ودمرهــــم
وأفنــــا
|
وأوردهـــم
إلــى
حــوض
الحمــام
|
|
وذلــوا
بعــد
عــز
واعتلا
الـدين
|
قهــــرا
إذ
علا
شــــأن
الامـــام
|
|
وقـــام
لنصـــرة
الاســـلام
قــوم
|
أجــابوا
الامــر
طوعــا
بـاحترام
|
|
رأوا
مــن
ســيد
الثقليــن
خلقـا
|
علا
وحلا
بـــــــأخلاق
كـــــــرام
|
|
فجـــــادوا
بــــالنفوس
ووازروه
|
وارووا
السـيف
فـي
القـوم
اللئام
|
|
فـــاكرم
بالصــحابة
مــن
كــرام
|
ترقــــــوا
للعلا
اعلا
ســــــنام
|
|
فكيــف
ومالــك
الملــك
ارتضـاهم
|
وشــــرفهم
بتأييــــد
الختـــام
|
|
عليــه
وجمعهــم
مــن
غيــر
حصـر
|
صــــلاة
منـــه
مـــع
آل
فخـــام
|
|
وتســـليم
يفــوق
المســك
ريحــا
|
ويعلـوا
فـي
الضـيا
بـدر
التمـام
|