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أعـد
دور
كأسـات
الحديث
على
الصفا
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أخـا
الود
وانثر
دمت
من
خبر
الصفا
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أرح
وأبــح
أخبــار
أحبابنـا
لنـا
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وعطـر
بهـا
ان
كنـت
صـبا
علـى
وفا
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فانــا
لــذكراهم
نميــل
وان
أنـا
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لنـا
ذكرهـم
مـن
عنـد
عـذالنا
صفا
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أنـخ
أو
فقـف
يـا
حادي
الظعن
ساعة
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وخـذنا
أو
احمل
قبل
أن
تدرك
الوفا
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جميـل
تحايانـا
إلـى
مـن
هو
المنى
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ومـن
قـد
غـدا
فـي
ذكره
للورى
شفا
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مني
القلب
جالي
الكرب
منقذ
من
هوى
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شــفيع
إذا
هــول
المعـاد
ترادفـا
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نــــبي
رســـول
صـــادق
ومصـــدق
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رفيــع
مقـام
والسـنا
منـه
رفرفـا
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ابـي
القاسـم
المختـار
أفضـل
مرسل
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ومنجـي
بفضـل
اللَـه
قومـاً
على
شفا
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وهــادي
قلوبــا
بعـد
ظلمـة
قسـوة
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وجـالي
همومـا
بعـد
أن
موجهـا
طفا
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وســاعي
مســاع
فــي
الالـه
جميلـد
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ومـولى
أهيـل
الضـر
من
فضله
الشفا
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مطـــوق
أعنــاق
العبــاد
بــأنعم
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تـوالت
عليهـم
كـم
عطـى
كفـه
كفـا
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حـــبيب
إلــه
العــالمين
وعبــده
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وقــائد
ركــب
الانبيـاء
ومـن
قفـا
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ســموا
ســماه
قــط
قبــل
جنــابه
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ولا
بعــد
ممــا
مــاله
محسـن
وفـا
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إليــه
إشــارات
الكمــال
تقــدمت
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ومنـه
جميـع
الكـامين
حيـوا
الصفا
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صــفا
منــه
مشــروب
الأحبـة
حبـذا
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منـالهم
فـي
ذا
الظهـور
وفي
الخفا
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افيـدوا
مـن
الخيراب
قد
هيئوا
لها
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بفضـل
مـن
اللَـه
العظيـم
الذي
عفا
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هنيئا
مـريئا
بـل
وطـوبى
لهـم
بما
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حـووه
مـن
الفتـح
الـذي
قد
ترادفا
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حبـوا
قربـوا
حبـوا
وحبـوا
وشرفوا
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وفـوا
ودنـوا
فضلا
أزيحوا
عن
الجفا
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علــوا
الاقتطــاف
مـن
شـجر
الصـفا
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وكلا
تـــراه
بالكمـــالات
اتحفـــا
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