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علـى
خيـر
مرسـول
إلـى
خيـر
أمة
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صــلاتك
ربــي
مـع
عظيـم
التحيـة
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إليــك
رسـولَ
اللَـه
وجهـت
همـتي
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ومنــك
بنـيّ
اللَـه
امـات
نجـدتي
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فــان
عــوادي
الحادثـات
تعـددت
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ونفسـي
عتـت
واستحسـنت
للغوايـة
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وإنــك
بــاب
اللَـه
خيـر
وسـيلة
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إليــه
ومحبــوب
واكــرم
صــفوة
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وانـــك
مختـــار
لكــل
كريمــة
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وانــك
مصــباح
وغــوث
البريــة
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وانــك
ذخـر
فـي
الشـدايد
منجـد
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وكفـــك
بحــر
للمكــارم
عــدتي
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فهـب
لـي
مـن
الكف
الرحيب
كفايه
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وكــف
بــه
عنــي
الاعـادي
بشـدة
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فكفـــك
بالاحســان
أحســن
جنــة
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ومــن
محــن
الايــام
احصـنُ
جنـة
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ولفظــك
عــذب
فاســعدنِّي
وشـنِّفن
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بـه
سـيدي
سـمعي
وجـد
لـي
بعطفة
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جمالـك
قد
حارت
عقول
أولى
النهى
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بــه
فاسـعدنِّي
يـا
رحيـم
بنظـرة
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جنابـــك
مقبــول
وبــدر
متمــم
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وشــمس
هــدى
منـه
الكـوكب
مـدت
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وفيضـــك
مبـــذول
لكــل
مؤمــل
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وقــدرك
مرفــوع
علـى
كـل
رتبـة
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وكلـك
مجبـول
علـى
الخير
والهدى
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وفضــلك
مــأمول
فعجــل
إغـاثتي
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وآلـك
نعـم
الآل
يـا
سـيد
الـورى
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هم
الأسد
في
البأسا
وأهل
الحماية
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وصـحبك
فـاقوا
صـحب
موسـى
وسيدي
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المسـيح
عليهـم
معك
أزكى
التحية
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بهم
الغوث
إن
ضاق
الخناق
وزحزحت
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عقـول
مـن
الالبـاب
مـن
اجـل
شدة
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هـم
يفـرج
الامـر
الصـعيب
ويفـرح
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الكئيـب
إذا
مـا
هـم
أتوه
لنجدة
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جزاهــم
إلهـي
مـن
مـواهب
فضـله
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علـى
صـنعهم
إذا
وضـحوا
للمحجـة
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فــاوهموا
يـا
سـيدي
مـن
نـواله
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علــى
كـرب
نـالوا
بهـا
للمـبرة
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نـبي
الهـدى
والآل
والصـحب
عطفـة
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علــى
فــإني
قــد
غرقـت
بلـوتي
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جنبــت
مــن
الـزلاة
قاسـيت
شـدة
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هلكـت
وفـي
التقصـير
اتلفت
مدتي
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وبــابكموا
بـالظن
فيكـم
نزلتـه
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علـى
ما
أنا
فيه
من
السوء
سادتي
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مــدحتكم
مــدح
الجهـول
ومـدحكم
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تقاصــر
عنــه
أهـل
كـل
الرويّـة
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فقـدركم
القـدر
الرفيـع
وها
أنا
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علـى
قـدر
حـالي
قد
رفعت
قصيدتي
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أقيلـوا
عثارى
واقبلوني
وقابلوا
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ببشــر
وتبشــير
وعـودوا
برحمـة
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وقولــوا
لراجـي
فيضـكم
وصـلاتكم
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تــدثر
أيــا
مــدثر
بالكرامــة
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كــذا
ولــديه
والبنيــن
وأهلـه
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وأصــحابه
يخظــوا
بأسـبغ
نعمـة
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ودمتـم
لنـا
حصـنا
حصينا
وموردا
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لطيفـا
وامنـا
مـن
شـرور
البرية
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وسـترا
وركنـا
في
الحوادث
مرتضا
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ودمنــا
بكــم
فـي
نعمـة
وسـلامة
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