|
وخطــر
الحضـر
أخيـل
أبـرزا
|
حقـا
مـن
اللجيـن
كان
أحرزا
|
|
منمنـــمٌ
مكيلــه
ســتّاً
وزن
|
مـا
مثلـه
حـقٌّ
بـذياك
الزمن
|
|
زخرفــه
أبنـاء
صـيدا
وخـرج
|
قـوم
فنيقيـا
بـه
على
اللجج
|
|
حـتى
إذا
لمنوس
جاؤوا
وقفوا
|
حيـث
بـه
القيل
ثواس
أتحفوا
|
|
وإفنـس
بـن
إيسـنٍ
بين
العدى
|
بـه
ابن
فريام
لقاوون
افتدى
|
|
لـذاك
فطرقـل
عفـا
عـن
دمـه
|
والآن
قــد
أبـرز
فـي
مـأتمه
|
|
أعـــده
خليلـــه
للســـابق
|
وخيــر
ثــورٍ
قــارحٍ
للاحــق
|
|
وللأخيــر
نصــف
شــاقلٍ
ذهـب
|
مـن
ثم
بين
القوم
ناهضاً
خطب
|
|
وصـاح
يـا
سراة
من
منكم
رغب
|
بخـوض
ذا
الميدان
حالاً
ينتصب
|
|
فانتصــب
ابــن
ويلـسٍ
أيـاس
|
ثــم
أذيـس
اللبـق
النـبراس
|
|
فـــأنطلوخ
ســابق
الأتــراب
|
وانتظمـوا
صـفا
علـى
اقتراب
|
|
ولهــم
أخيــل
أعلـن
الغـرض
|
فـانبعثوا
انبعـاث
عداءٍ
ركض
|
|
إذا
بآيــاس
ســريعاً
ســبقا
|
لكـــن
وراءه
أذيــس
طبقــا
|
|
يـدنو
كمـا
النساجة
البديعه
|
لصــدرها
قـد
دنـت
الوشـيعه
|
|
إذا
بهـــا
بنولهــا
أمــرت
|
سـلكاً
بـه
تحـوك
ثـم
اجـترت
|
|
خطـاه
فـي
خطى
ابن
ويلسٍ
تقع
|
من
قبلما
العثير
عنهن
ارتفع
|
|
يجــري
علـى
أعقـابه
ونفسـه
|
بــرأس
أيــاس
يثــور
قبسـه
|
|
والقـوم
طـرّاً
يرتجون
الغلبه
|
لــه
وضـجو
وهـو
عـادٍ
عقبـه
|
|
حـتى
إذا
علـى
الختام
أشرفا
|
أذيــس
فــالاس
دعــا
وهتفـا
|
|
عونــك
يـا
ربـة
قـوي
قـدمي
|
وذلـك
الـدعاء
في
الحال
نمي
|
|
فشـــددت
بــالعزم
معصــميه
|
وخففـــت
بجربـــه
رجليـــه
|
|
وحيـن
همـا
أن
يصيبا
الخطرا
|
أيــاس
فــالاس
رمــت
فعـثرا
|
|
أكــب
فـي
خـثي
ثيـارٍ
ذبحـا
|
أخيـل
فـي
مـأتم
فطرقـل
ضحى
|
|
بــه
امتلا
فـوه
وأنفـه
وخـف
|
أذيـس
أولاً
إلـى
أولـى
التحف
|
|
وأســرع
ابــن
ويلــسٍ
يليـه
|
والخــثي
حشــو
أنفـه
وفيـه
|
|
لقـرن
ذاك
الثـور
حـالاً
مالا
|
وصــاح
وهـو
يتفـل
الـدمالا
|
|
واخيبــة
الهمــة
والإقــدام
|
فربــةٌ
تلــك
لــوت
إقـدامي
|
|
وعــن
أذيــس
أبــداً
تحـامي
|
كــالأم
منــذ
غــابر
الأيـام
|
|
فــارتفعت
قهقهــة
الجمهـور
|
وأنطلـــوخ
صــاح
بالحضــور
|
|
قــال
لهـم
مبتسـماً
مسـرورا
|
وإن
غــدا
مغنمــه
الأخيــرا
|
|
هلا
أيــا
صـحب
خـبرتم
خـبري
|
آل
العلـى
تجـل
قـدر
العمـر
|
|
أيــاس
فــاتني
نعــم
بنـزر
|
لكـن
أذيـس
إلـف
ذاك
العصـر
|
|
شــيخٌ
ولكــن
ذو
جنـانٍ
نضـر
|
مــا
معـه
قـط
بهـذا
الـدهر
|
|
خلا
أخيــل
مــن
مجـارٍ
يجـري
|
|
أجــاب
آخيــل
لـذا
الإطـراء
|
مــا
كنــت
مـداحي
بلا
جـزاء
|
|
لـذاك
قـد
زدتـك
مـن
حبـائي
|
نضــار
يصــف
شــاقلٍ
وضــاء
|
|
وعـــاجلاً
نفحـــه
بالـــذهب
|
فــراح
معـتزّاً
بملـء
الطـرب
|