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مـا
زالـت
الطـرواد
تحت
القسطل
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مـن
وجـه
هكطـور
المـدمر
تنجلي
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بلغــت
علـى
صـلقاتها
أسـطولها
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وقتيلهــا
تحـت
النبـال
الهمـل
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كشــرارةٍ
هكطــور
هــب
يرومــه
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بعجــاله
ولفيــف
ذاك
الجحفــل
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أحنــى
ثلاثـاً
قابضـاً
قـدميه
وه
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و
يصـيح
يـا
جند
الطراود
أقبلي
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وكــذا
ثلاثــاً
صـده
عـزم
الأيـا
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ســين
المــذلل
عـزم
كـل
مـذلل
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لكنــه
مــا
انفـك
عـن
عزمـاته
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متـــدرعاً
بزمــاع
قــرمٍ
قيــل
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متربصــاً
طــوراً
يهــد
وتــارةً
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يلــجُ
العبـاب
بكـرة
المستبسـل
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لــم
يبلغــا
أربــاً
بـه
لكنـه
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مـن
حـول
ذاك
الشـلو
لـم
يتحول
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كــالليث
ضـوره
الطـوى
بفريسـةٍ
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يخلــو
ويـزري
بالرعـاة
البسـل
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ولربمــا
بمنــاه
عــاد
مظفـراً
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لـو
لـم
تلـح
إيريس
ترمح
من
عل
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أمـت
أخيـل
مـن
الألمـب
فـأقبلت
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كالريـح
تنـذر
بالوبـال
المقبل
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هيـرا
أسـارتها
فلـم
يعلـم
بها
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زفــسٌ
ولا
أربــابٌ
ذاك
المحفــل
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قـالت
أخيـل
وأنـت
مغوار
الوغى
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للــود
عــن
فطرقــل
كـر
وعجـل
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دون
السـفائن
تحـت
مشتجر
القنا
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حــوليه
كــم
قـرمٍ
يخـر
مجنـدل
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مــا
بيـن
حـامٍ
يستشـيط
وحـائمٍ
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بالشـلو
إليونـاً
يـروم
ويصـطلي
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وأشــدهم
هكطـور
يـدفعه
المـرا
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م
لفصــل
هــامته
وبـت
المفصـل
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مـن
ثـم
تعرض
للهوان
على
القنا
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أفتلبثــن
عــن
الكفـاح
بمعـزل
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كــرن
أو
فطرقــل
بيــن
نـواهسٍ
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فــي
سـاحة
الأعـداء
جثتـه
تلـي
|
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فــإذا
بهــا
عبثـت
فأيـةُ
حطـةٍ
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أبــداً
تســومك
ذلــة
المتـذلل
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فأجـاب
إيريـسٌ
ومن
أسراك
لي
قا
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لـت
حليلـة
زفس
ذي
الطول
العلي
|
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لـم
يـدر
بـي
زفسٌ
وسائر
من
ثوى
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بــذرى
ألمــبٍ
بــالثلوج
مكلـل
|
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فأجـاب
آه
وكيـف
اقتحـم
الـوغى
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وأخــوض
لجتهــا
براحــة
أعـذل
|
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ملـك
العـدى
عـددي
وأمـي
حتمها
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أبقــى
هنــا
بــتربص
المتحمـل
|
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حــتى
أراهــا
أقبلـت
فـي
شـكةٍ
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قــد
دقهـا
هيفسـت
أعظـم
صـيقل
|
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أولا
فـــأي
فـــتىً
بشــكتة
أرى
|
غرضــي
خلاف
مجــن
آيـاس
الملـي
|
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وأيـاس
مـن
حـول
القتيـل
إخاله
|
قـد
حـام
يطعـن
في
الخميس
الأول
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قــالت
علمنــا
كـل
ذلـك
إنمـا
|
إن
تبــد
للطـرواد
دون
المعقـل
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ذعـروا
وصـحبك
يـا
نسون
بجهدهم
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فعلـى
الـبروكز
لـدى
سراهم
عول
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ضـاقت
منافسـهم
وفـي
دار
الوحى
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هيهــات
تؤمــل
راحــةٌ
لمؤمــل
|
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طــارت
فهــب
فألبســته
مجنهـا
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فــالاس
فــي
هــدابه
المسترسـل
|
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وعلـــى
محيـــاه
غمــاة
عســجٍ
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ألقـت
يفيـض
لهـا
لهيـب
المشعل
|
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فكأنمــا
بلــدٌ
بقلــب
جزيــرةٍ
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حصـرت
علامنـه
الـدخان
المعتلـي
|
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خرجـت
بنـوه
إلـى
مبارزة
العدى
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وقضــوا
نهــارهم
بقـرع
الأنصـل
|
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حــتى
إذا
برحــت
بـراح
تـألقت
|
نيرانهــم
مـن
تحـت
ليـل
أليـل
|
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أملاً
بجيرتهـــم
تــرى
فتمــدهم
|
بعمـارة
تجلـي
العـدو
المبتلـي
|
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وكـذا
أخيـل
لهيـب
هـامته
سـما
|
حــتى
الرقيـع
لمقلـة
المتأمـل
|
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فـوق
الحفيـر
أقام
لا
يطأ
الوغى
|
إذ
عــن
مقالـة
أمـه
لـم
يغفـل
|
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بــالقوم
صــاح
وصـت
فـالاسٍ
علا
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فتقلقـــل
الأعــداء
أي
تقلقــل
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كالصـور
خلف
السور
ينفخه
العدى
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تحت
الحصار
تبينوا
الصوت
الجلي
|
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صـدعوا
وأعـراف
الجيـاد
تطايرت
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جزعــاً
وفــرت
خيلهــم
بتجفــل
|
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بعجالهــا
انقلبـت
تفـر
بسـاقةٍ
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ذعـرت
لـذياك
اللهيـب
المتجلـي
|
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مـن
حـولي
هـامته
أثينـا
أججـت
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ذاك
السـعير
يـروع
عين
المجتلي
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فــوق
الحفيــر
علا
ثلاثـاً
صـوته
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وكــذا
ثلاثــاً
أجفلـوا
بتبلبـل
|
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فخلا
بفطرقـل
الأغـاريق
وانثنـوا
|
نـائين
عـن
مرمـى
الرماح
الذبل
|
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وضــعوه
فــوق
سـريره
وتقـاطرت
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خلانــه
تبكــي
لهــول
المقتــل
|
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وافــاهم
أخيــل
منتحبــاً
علـى
|
إلــفٍ
بـه
لعبـت
حـدود
المنصـل
|
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هــو
سـاقه
للحـرب
فـوق
جيـاده
|
لكنـــه
واويحـــه
لــم
يقفــل
|
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فهنـاك
هيـرا
أنفـذت
شمس
العلى
|
فتخللــت
بطـن
العبـاب
لتختلـي
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