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جـر
الـدموع
علـى
عـرض
الميـادين
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حرزنـاً
لفقـد
رجـال
العلم
والدين
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واجعـل
دم
القلب
ان
جفت
لها
مددا
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عســاك
تعــرب
عـن
أشـجان
محـزون
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جـددت
واللَـه
يا
ناعي
الحسين
بنا
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حزنــاً
يزيــد
علـى
مـر
الاحـايين
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مهلاً
لقـد
رعـت
احشـاء
الأنـام
فما
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قلـــب
بجلــد
ولا
دمــع
بمخــزون
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قـد
رن
صـوتك
فـي
الفيحا
ومنتزحي
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اقصـى
العـراق
فكاد
الوجد
يصميني
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هيهــات
مــا
لفـؤادي
قـط
مصـطبر
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مـن
بعـد
جـوهرة
الغـر
الميـامين
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شــيخي
ومرشـدي
العـالي
ومنتجعـي
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مـن
كـان
فضـلاً
بكأس
العلم
يرويني
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فـرد
بـه
اجتمعـت
زُهـر
الخلال
فوا
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لهفــي
لفــرد
يفــدى
بــالملايين
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دارت
علـى
المـأ
العـالين
سـيرته
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رحــا
يفــوق
شـذاها
مسـك
داريـن
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اضـحت
تـآليفه
كـالروض
تزهـر
فـي
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كــل
الفنــون
غريبــات
الأفـانين
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فكـم
لعليـاه
فـي
نصر
الشريعة
من
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رســائل
اخضــعت
هــام
الاســاطين
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مــن
كــل
صــادعة
بـالحق
مشـرقة
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كالشــمس
تنشـر
اضـواء
الـبراهين
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افـدي
شـمائله
اللاتـي
عرفـت
بهـا
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لطـف
الصـبا
حملـت
عـرف
الرياحين
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مجســـم
مــن
ســنا
الأخلاص
مــدرع
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بُـردَ
التقـى
معـرِض
عـن
كـل
مفتون
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وهكـذا
الزهـد
فـي
اهليـه
يقنعهم
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عـن
مـال
كسـرى
وعـن
أموال
قارون
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لـم
يحـو
وفـرا
مـن
الدنيا
وهمته
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علــى
الخُصاصـة
ايثـار
المسـاكين
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عزيـز
نفـس
ابـت
إلا
السـلوك
علـى
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نهـج
الجـدود
ابـاة
الـذل
والهون
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فليــس
بـدعا
إذا
مـا
بـت
انـدبه
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والحــزن
ينشـرني
طـوراً
ويطـويني
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اســاجل
الشـهب
فـي
ذكـرى
مـآثره
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فـي
العـالمين
فأبكيهـا
وتبكينـي
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وليـس
منـي
ومنهـا
مـن
يكـاد
يفي
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ثنــاء
عليــاه
فـي
وصـف
وتـأبين
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أرثـــي
معــاليه
والاقلام
راجفــةٌ
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بيــن
الأنامــل
اشـكوها
وتشـكوني
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كـأنني
قـد
نقثـت
الوجـد
مسـتعرا
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فــي
جوفهـا
عنـد
املائي
وتلقينـي
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فمـا
اسـتطعت
ولا
اسـطاعت
تعبر
عن
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مقـدار
شجوى
وقد
حال
البكار
دوني
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ولـو
أطـاقت
لبثـت
مـا
أبـث
لهـا
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مـن
حـرّ
قلـب
لـدى
الأحـزان
مرهون
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لـذاك
قصـرت
فيمـا
رمـت
مـن
كلـم
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تـوفي
الرثـا
حقـه
مـن
غير
توهين
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ان
يدفن
الجسم
منه
في
الثرى
لمدى
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فـــان
فضـــل
علاه
غيــر
مــدفون
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وان
يغــب
شخصــه
عنــا
فســيرته
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ورد
لكــل
نقــي
القلــب
ميمــون
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لـم
ينتصـب
قـط
ديـوان
لأهـل
تقـى
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إلا
وذكـــراه
نــبراس
الــدواوين
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تطيــب
أسـمار
اخـوان
الصـلاح
بـه
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ناهيــك
فــي
سـمَر
بـالاجر
مقـرون
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لازال
صـوب
الرضـا
دومـا
يفيض
على
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مثـواه
فيـض
السحاب
المُطبق
الجون
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وجــاده
فـي
ربـى
عـدن
بكـل
نـدى
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مـن
أمـر
الأمـر
بين
الكاف
والنون
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