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جــاورت
ربــك
يـا
أبـا
العبـاس
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وتركـــت
شــبلك
رحمــةً
للنــاسِ
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ملكـاً
نـراك
بـه
كأنـك
لـم
تـزل
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حيّـــاً
تــبرُّ
ضــعيفنا
وتواســي
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أســفي
عليــك
متوجــاً
بمكــارمٍ
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كــانت
تصــابح
بالنـدى
وتماسـي
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أسـفي
علـى
العمـر
الـذي
أيـامه
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كــم
أعمــرت
مــن
أربــع
أدراس
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أســفي
علــى
ملـكٍ
حنـون
مـارثى
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لشــبابه
قلــب
المنـون
القاسـي
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وطــبيب
ملــكٍ
بــارعٍ
أودى
بــه
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داءٌ
تحيَّـــر
فيــه
كــل
نطاســي
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مـا
كنـت
أحسـب
قبل
سكناه
الثرى
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أن
البــدور
تغيــب
فـي
الأرمـاس
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قسـماً
بمـن
حيـاك
بالتسـنيم
وال
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تعظيـــم
والتكريــم
والإيناســي
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وبقاصـرات
الطـرف
والـراح
الـتي
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يتفــاخر
السـاقي
بهـا
والحاسـي
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لـولا
ابنـك
العبـاس
أغرقنـا
وأح
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رقنــا
البكــا
وتوقــد
الأنفـاس
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ولبــارت
الحِكَـمُ
الـتي
ببيوتهـا
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حكــم
البيــان
بشـكر
كـل
مـواس
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يا
أيها
الملك
المتوج
بالتقى
ال
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حــالي
برونــق
مجــده
والكاسـي
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وابــن
الأســنة
والأعنـة
والظُبَـى
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والأريحيـــة
والنـــدى
والبــاس
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لـولاك
أودى
الحـزنُ
بالهرمين
واغ
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تـال
المقطـمَ
طـودَ
مصـرَ
الراسـي
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وأبــاد
ألبـابَ
العبـاد
كـبيرِهم
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وصـــغيرهم
بلواعـــج
الوســواس
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لمــا
خبـا
نـور
النفـوس
أعـدته
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بجلوســـك
المــأنوس
كــالنبراس
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فاسـلم
فقد
غرست
صفاتك
في
النهى
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غـرس
الرجـا
الريـان
بعـد
يبـاس
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وافخـر
بمـا
أعطـاك
ربـك
من
ذكاً
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بــاهت
بـه
الـدنيا
ذكـاء
إيـاس
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لا
يطمــع
الحســاد
فيــك
شـبيبةٌ
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تجلــوك
أليــن
مــن
غُصــين
الآس
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إن
القنــا
قتالــةٌ
ولــو
أنّهـا
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لانـــت
كليــن
قوامــك
الميّــاس
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اللَـه
أعطـاك
القـوى
فخـذ
العدى
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بــالحلم
أو
بالــذابل
الرعّــاس
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واصــبر
لحكــم
اللَـه
جـل
جلالـه
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فالصــبر
ديــدن
أســبع
الأخيـاس
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فهـو
الـذي
نرجـو
لحفظـك
ناجيـاً
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مــن
كيــد
كــل
موســوس
خنّــاس
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ودوام
مصــر
حديقــةً
تحظـى
بهـا
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خيــر
البنيــن
وأكــرم
الأغـراس
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