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نصــرت
لـواء
الحـق
أيـدك
العـدلُ
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فشـط
مـزار
الجـور
وابتهـج
العدلُ
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ومـــدَّن
خلــق
اللَــه
منــك
خلائقٌ
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تـرد
يـد
الهرميـس
أغضـبه
الهقـل
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فيــا
لــك
سـلطاناً
سـليل
أعـاظمٍ
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أريكتــه
العظمـى
وكلمتـه
الفصـل
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ويــا
لــك
مـن
غيـث
برحمـة
ربـه
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يفيــض
فلا
يعــروه
نقــصٌ
ولا
بخـل
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يـــروِّض
آســاد
الدعيســة
حلمــه
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ويـؤنس
منـه
الطيـر
نفَّـره
النبـل
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كأنــــك
روحٌ
والبريـــةَ
مهجـــةٌ
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وعالَمَهــا
هــامٌ
وأنـت
لهـا
عقـل
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لقــد
زعــم
الواشـون
أنـك
ظـالمٌ
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وعنـدك
لا
يسـطو
علـى
الحمل
الشبل
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لينظــر
ذوو
الإنصــاف
حــالَ
بلادهِ
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ويــأتوا
بحكــمٍ
لا
يكـذِّبه
النقـل
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يـروا
أنـك
المعطـي
الحقوق
لأهلها
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بأعــدل
قســطٍ
لا
يلــم
بــه
زَحْـل
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وأنـــك
ســـيفٌ
للإلــه
وظلــه
ال
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ذي
بيــديه
العقــدُ
أجمـعُ
والحـل
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ليعلــم
مليـك
الـروس
أن
حقوقنـا
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لـديك
حقـوق
المسـلمين
وإن
جلـوا
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وأن
دم
الـــذمي
يحقـــن
عنــدكم
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كمـا
أمـر
البـاري
وأحكمـت
الرسل
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طعـــامكمُ
حـــلٌّ
لنــا
وطعامنــا
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لكـم
وعلينـا
مـا
علكيـم
ولا
يغلو
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بــراك
بمــا
أعطـاك
ربـك
قانعـاً
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تعــاف
بلاداً
عــم
أكثرهـا
المحـل
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عـــدوُّك
رعديـــدٌ
وبأســك
شــاهدٌ
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وسـيفك
سـيف
اللَـه
ليـس
لـه
مثـل
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وكيـف
بـزاة
الـترك
يغلبها
القطا
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أو
الأسـد
الرئبـال
يقهـره
الوعـل
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لقـد
نطـق
الخفَّـاش
واحتكـم
الصدى
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وفــاخرت
الغــزلانَ
بــالأرج
الإبـل
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وعنــدل
خطــاف
الكهــوف
وعســَّلت
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عناكبهـا
واسـتعجل
الفـرسَ
البغـل
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لقـد
وهـن
البـاغي
إذا
للوغى
دعا
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فلاق
بــه
أن
لا
يطــاع
لــه
رســل
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وســدد
مـن
نبـل
السـعاية
أسـهماً
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إليــك
فألقاهــا
بســدته
النبـل
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دعــوت
لــدين
اللَـه
دعـوة
صـادقٍ
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يـذب
عـن
الـدين
الحنيـف
ولا
يألو
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فجــاءك
مـن
بيـض
الوجـوه
فيـالقٌ
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صــوارمهم
حمــرٌ
وأعينهــم
شــهل
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أعاديك
كانوا
في
اللقاء
كواسف
ال
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وجـوه
يخـوض
الرمـح
فيهـمُ
والنصل
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كــأن
دم
اللبَّــات
فــوق
صـدورهم
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مرمَّلــةً
خمــرٌ
يعــوم
بــه
نمــل
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وشــاهد
نــابليون
فعلــك
فيهــم
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فجــاد
بجيــش
مـن
خلائقـه
العـدل
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وقــد
بعثـت
فكتوريـا
لبحـارك
ال
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بـوارجَ
تعلوهـا
الغضـافرة
العُبـل
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يــدوم
لنــابليون
ليــثِ
زمــانه
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وجــارته
فكتوريـا
الشـرفُ
الحفـل
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ودمــت
أميــر
المــؤمنين
مؤيـداً
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تصـان
بـك
الـدنيا
وتفتخـر
الأهـل
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يبطِّــل
عــذل
السـيف
سـيفك
عاشـقٌ
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وفــي
أذن
العشـاق
لا
يلـج
العـذل
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لســيفك
والنـارِ
العـدى
ونفوسـُهم
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وملكِـك
والجيـشِ
المنـازلُ
والنفـل
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