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جـاءت
تلـوح
وحبهـا
وافـى
السـند
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هيفـاء
جلـت
عـن
شـوائب
مـن
مـرد
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وافـت
تفـوق
بكـل
معنـى
صـيغ
مـن
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نــور
الغضـا
وأرق
مـن
مـاء
جمـد
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بكــر
تفــرّد
فــي
صــحيح
مــودة
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مــا
شــانها
صــبٌّ
ولا
عنهـا
رشـد
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فلثمــت
مبســمها
وذقــت
رضـابها
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حلـو
المـودة
والفـؤاد
بها
استمد
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حلّــت
ففــاح
شــذاء
عطـر
بشـارة
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لاحـت
برمـز
مـن
سـناء
أولي
الرشد
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بــرزت
وقــد
اهـدت
إلـيّ
نفائسـا
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تنفـي
أحـاديث
العـذول
أخي
الكمد
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وردت
إلينـــا
مــن
تقــيٍّ
طــاهر
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حــبر
نبيــل
بـارع
فيمـا
اعتمـد
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شــمس
لال
الفضــل
أصــبح
مشــرقا
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عـن
فضـله
سـند
الهدايـة
قـد
ورد
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فبجـــده
رب
الرســـالة
والســنا
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مـا
خـانه
قلـبي
المشـوق
ولا
جحـد
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كيـف
السـبيل
إلى
التصارم
والقلى
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ووداده
لبـس
الفـؤاد
كـذا
الجسـد
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لـــبي
وقلـــبي
شــاهدان
بحبــه
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ولســان
وجـدي
بـالمودة
قـد
نشـد
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اسـتاذ
قلـبي
ان
تكـن
سـبقت
لكـم
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منــي
ســطور
بالعتــاب
فلا
صــدد
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بــل
إنمـا
حسـن
الكنايـة
أوجبـت
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ان
العتــاب
بجهـرة
ينفـي
النكـد
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دع
عنــك
قـول
الحسـادين
ومكرهـم
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بيـن
الوشـاة
وبيـن
قلـبي
كم
أمد
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فأنـا
المسـربل
بـالعهود
وحفظهـا
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وأنا
المقيم
على
الوداد
إلى
الأبد
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بشـــرتم
تلميـــذ
فضــلكم
وفــي
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تلـك
البشـارة
زادنـي
وافي
المدد
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لا
زلتــــم
أهلا
لكــــل
فضـــيلة
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مسـتهدفين
الفـوز
مـن
لطـف
الصمد
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أرجــوكم
حســن
الــدعاء
وطالمـا
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قلــبي
لخيـر
دعـائكم
يومـا
وجـد
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تهــديك
اســطرنا
الســلام
نيابـة
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عنــا
وتوضــح
حـال
وجـد
بالخلـد
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وكــذا
شــديد
الحـب
يلثـم
راحـة
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تهمــي
بــدرّ
كلمــا
فكــر
رعــد
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فاسـلم
أمـام
الـدين
عمـدة
وقتنا
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ولسـان
ذكـرك
قـل
هـو
اللـه
أحـد
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مــا
قــال
صــبٌّ
بـالمودة
ناشـدا
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جـاءت
تلـوح
وحبهـا
وافـي
السـند
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