|
أزف
الرحيــل
فهـل
بلغـت
مرامـا
|
ودنـى
الفـراق
فهـل
شـفيت
أواما
|
|
قـف
وقفـة
فـي
الحي
يقرئك
الهوى
|
قبـــل
الــوداع
تحيــة
وســلاما
|
|
بــاللَه
لا
تنـس
الربـوع
واهلهـا
|
واذكــر
هنــاك
محبــة
وغرامــا
|
|
يهفـو
المشـوق
اذا
تباعدت
النوى
|
ويكــاد
مــن
لهـف
يـذوب
هيامـا
|
|
حــتى
اذا
ذكــر
الـذين
ترحلـوا
|
قعـد
الهـوى
بيـن
الضـلوع
وقاما
|
|
مــازال
يحســب
كـل
شـهر
بعـدهم
|
دهــراً
يمــر
وكــل
يــوم
عامـا
|
|
يشــتاق
عهـد
الظـاعنين
وقـولهم
|
يـا
ليـت
عهـد
القـرب
طال
وداما
|
|
او
كلمــا
بــت
الهــوى
احكـامه
|
رفــض
الفـؤاد
النقـض
والابرامـا
|
|
عــود
جفونــك
ان
تنــام
فربمـا
|
ان
نمــت
زارك
طيفهــم
إلمامــا
|
|
وانظـر
الـى
الربع
المحيل
فعينه
|
ممــا
بـه
تـذري
الـدموع
سـجاما
|
|
لعــب
الزمــان
بـه
فقطـب
وجهـه
|
حزنــاً
وعبــس
ثغــره
البســاما
|
|
لِلّــه
أيــة
لوعــة
عصــفت
بنـا
|
تركــت
دمــوع
المقلـتين
ركامـا
|
|
لا
تمنعــوني
فـي
المنـازل
وقفـة
|
تشـفي
عضـالا
فـي
الفـؤاد
عقامـا
|
|
حتـا
م
يـا
قلـبي
تروعـك
النـوى
|
والا
م
يفجعــك
الفــراق
الا
مــا
|
|
دارت
عليـك
يـد
النـوى
بكؤُوسـها
|
فسـقتك
صـرف
الـبين
جامـا
جامـا
|
|
ألـــم
بلا
داء
يهيـــج
لواعجــاً
|
وجــوى
بلا
نــار
يــثير
ضــراما
|
|
فــي
ذمــة
الرحمـن
اكـرم
بعثـة
|
مـدت
لهـا
ايـدي
الكـرام
جسـاما
|
|
نـثروا
اللهـي
ونثرت
شعري
بينهم
|
مثــل
العقــود
تألقــا
ونظامـا
|
|
مـن
لـي
بنعمـي
غيـر
شـعر
خالـد
|
اســـديه
لا
منـــا
ولا
انعامـــا
|
|
خيــر
القريـض
قريـض
اروع
شـاعر
|
فــي
كــل
واد
للفضــائل
هامــا
|
|
يـا
راحلـون
وفـي
الفؤاد
مكانكم
|
قــروا
وطيبــوا
اعينـاً
ومقامـا
|
|
لا
تــدفنوا
احيـاء
بيـن
شـيوخكم
|
فـالتبر
يحسـب
فـي
الرغام
رغاما
|
|
بعــض
الشـيوخ
ولا
اقـول
جميعهـم
|
تخـذوا
التعنـت
والعنـاد
لزامـا
|
|
رثــت
عــواطفهم
وبــات
ضـميرهم
|
خلقـاً
وحبـل
العلـم
صـار
رمامـا
|
|
الفــوا
الجمـود
وكـل
شـيخ
همـه
|
ان
يلبســـوه
عمامـــة
ووســاما
|
|
يمشــون
فـوق
الارض
أعـرض
اهلهـا
|
جببــاً
واطــول
خلقهــا
أكمامـا
|
|
فـروا
مـن
العلـم
الحديث
وحسبهم
|
جهلا
بــان
عـدوا
العلـوم
حرامـا
|
|
حــب
الجبـان
النفـس
خلفـه
لقـى
|
خلــف
المعــامع
يـؤثر
الاحجامـا
|
|
وهــم
الـذين
اذا
تضـافر
جمعهـم
|
هـزوا
العـروش
وأسـقطوا
الاعلامـا
|
|
واللَـه
لـو
شـهروا
سـلاح
علـومهم
|
قهـروا
الاسـود
وحاصـروا
الآجامـا
|
|
ولربمــا
غلــب
الضــعيف
بعلمـه
|
جيشــاً
تمــوج
كالخضــم
لهامــا
|
|
قـد
حرمـوا
علـم
الحسـاب
وساءَهم
|
ان
يعرفــوا
الاعــداد
والارقامـا
|
|
قنعـوا
بتجويـد
القراءَة
واكتفوا
|
مـذ
اتقنـوا
التنـوين
والادغامـا
|
|
سـلهم
عـن
الاهـرام
تسـمع
قـولهم
|
سـيف
ابـن
ذي
يـزن
بنـى
الاهراما
|
|
سـلهم
عـن
اليابـان
تعـرف
أنهـا
|
جبـــل
خصــيب
ينبــت
الاقزامــا
|
|
ســلهم
عـن
الميكـاد
تعـرف
أنـه
|
ملــك
غــزا
كسـرى
وحـارب
حامـا
|
|
ســلهم
عــن
الامـزون
تعـرف
انـه
|
جــزر
تحيــط
مراكشــا
وســياما
|
|
شــيخ
المؤيــد
وهـو
أكـبر
مـدع
|
بيــن
الشــيوخ
مكانــة
ومقامـا
|
|
أو
لـم
يقـل
افريقيـا
قـد
اصبحت
|
قســماً
بمكــة
يشــرف
الاقســاما
|
|
جهلـوا
اكشـافات
العلـوم
وضـرهم
|
ان
يعرفــوا
التربيـد
والالغامـا
|
|
رب
اهـدهم
فالسـيل
قد
بلغ
الزبى
|
والخطــب
اصــبح
حـولهم
بـترامى
|
|
أإِذا
تـــبين
جهلهــم
ذو
فطنــة
|
عــدوه
غيــاً
منــه
او
اجرامــا
|
|
مــا
للامــام
مضــى
وخلـف
زمـرة
|
ضــعفاء
مــاتوا
بعـده
استسـلاما
|
|
قـالوا
عليـه
ومـا
اصـابوا
انـه
|
عــرف
اللغــات
فأغضــب
الاسـلاما
|
|
ســل
عنــه
هــانوتو
يخـبر
أنـه
|
لا
يســتطيع
مــع
الامــام
صـداما
|
|
جــاؤُا
اليــه
مهطعيــن
وكلهــم
|
رضــي
الامـام
بـان
يكـون
امامـا
|
|
هـو
بالـدليل
ازال
عنهـم
ريبهـم
|
وامـاط
عـن
وجـه
الشـكوك
لثامـا
|
|
لـو
لـم
يكـن
يـدرى
لسـان
خصومه
|
مــا
اسـطاع
اقناعـاً
ولا
افحامـا
|
|
امحمـــد
لا
فــات
قــبرك
وابــل
|
يــروى
رفاتــا
تحتــه
وعظامــا
|
|
اظهــرت
للقــرآن
فــي
تفســيره
|
حججــاً
تزيــل
الشــك
والابهامـا
|
|
حــتى
كــأَن
اللَــه
بعــد
نـبيه
|
القــى
عليــك
الـوحي
والالهامـا
|
|
قـد
غالـك
المـوت
الـزؤام
وليته
|
مـا
غـال
ماضـي
الشـفرتين
حساما
|
|
فــاذا
بكينــاك
الغـداة
فانمـا
|
نبكـي
فـتى
ضـخم
الفعـال
همامـا
|
|
نبكـي
الـذي
راع
الحطيـم
وزمزما
|
ودهــى
العـراق
بمـوته
والشـاما
|
|
لـو
عـاش
بضـع
سـنين
اخـرج
امـة
|
تهــدى
الــولاة
وترشـد
الحكامـا
|
|
يــا
نصــف
امييــن
كيـف
قرأتـم
|
ونســـيتم
أن
تعملــوا
الاقلامــا
|
|
هـل
فـي
اللغـات
نقيصـة
إن
شئتم
|
ان
تفحمــوا
اربابهــا
الاعجامـا
|
|
وهـم
الـذين
كمـا
نراهـم
اتقنوا
|
لغـــة
النــبيّ
كتابــة
وكلامــا
|
|
مستشــرق
حفــظ
الكتــاب
وآخــر
|
اخــذ
الشــرائع
عنـه
والاحكامـا
|
|
يكفــي
رجـال
الغـرب
كـل
عجيبـة
|
تعيــي
الظنـون
وتعجـز
الاوهامـا
|
|
بلغـوا
المطـار
وسـوف
نسمع
انهم
|
جـازوا
الهـواء
وخاطبوا
الاجراما
|
|
عـابوا
جمـود
المسـلمين
وصـرحوا
|
ان
لا
نعــد
مــع
الانــام
انامـا
|
|
عشـقوا
الحيـاة
وما
عشقنا
بعدهم
|
الا
جمـــوداً
يشـــبه
الاعـــداما
|
|
نمنــا
وبـاتوا
سـاهدين
وفاتنـا
|
حـب
الجمـود
علـى
الضـلال
نيامـا
|
|
متعنـتين
علـى
الـدخيل
فـان
يضئ
|
نخــرج
اليـه
مـن
الضـياء
ظلامـا
|
|
حــتى
يظــن
الــدين
ديـن
تعنـت
|
أو
ديــن
قـوم
أشـبهوا
الانعامـا
|
|
لِلّــه
مــا
للمســلمين
تشــعبوا
|
فــي
ملكهــم
وتقســموا
اقسـاما
|
|
قطعـوا
الاواصـر
واسـتحلوا
قطعها
|
ابــد
الابيــد
وشـققوا
الارحامـا
|
|
وتفرقــوا
فرقـاً
وكـانوا
قبلهـا
|
اقــوى
العناصــر
ألفـة
ووئامـا
|
|
للـه
لـو
عـاد
الـذي
سـن
الهـدى
|
ومحــى
الضــلال
وكســر
الاصـناما
|
|
ورأى
جمــود
المســلمين
وحـالهم
|
لمضــى
يبــدل
غيرهــم
اقوامــا
|
|
او
ليــس
فيكـم
مـن
طـبيب
حـاذق
|
يصــف
الــدواء
فيـبرئ
الاسـقاما
|
|
اشـكو
مـن
الـداء
الـذي
قد
شفكم
|
مثـل
المريـض
اذا
اشـتكى
الآلامـا
|
|
انــي
اخــص
الراحليــن
بلفظــة
|
تبقــى
السـنين
وتخلـد
الاعوامـا
|
|
ان
جئتــم
ارض
العلــوم
وصــرتم
|
فيهــا
فمــروا
صــالحين
كرامـا
|
|
سـيروا
علـى
سنن
الهداية
تبلغوا
|
اســمى
المراقــي
ذروة
وســناما
|
|
لا
ترجعـوا
مثـل
الاولى
رجعوا
لنا
|
وهــم
اقــل
مــن
الـدبى
احلامـا
|
|
بـــاريس
روض
للحســـان
ومســرح
|
يحــوي
الظبــاءَ
ويكنـف
الآرامـا
|
|
فحــذار
مـن
كيـد
الحسـان
فـانه
|
يسـبي
الحكيـم
ويصـرع
الضـرغاما
|
|
غضـوا
كـامر
اللَـه
مـن
ابصـاركم
|
تحيـوا
العفـاف
وتقتلـوا
الآثاما
|
|
ايـــاكم
كيــد
العــدو
ومكــره
|
ان
قــال
عــذلاً
او
أصــر
ملامــا
|
|
تهـدي
المحـب
الـى
الهـوى
عذاله
|
فتزيـــده
فــي
خوضــه
اقــداما
|
|
ذو
النفـس
ان
يـرض
السـماك
مطية
|
يــأب
المجــرة
ان
تكـون
زمامـا
|
|
واخو
النهى
يرجو
من
العيش
العلى
|
واخــو
الجهالـة
ملبسـا
وطعامـا
|
|
كونــوا
كمـا
كـان
الأئمـة
انهـم
|
صـقلوا
العقـول
وهـذبوا
الافهاما
|
|
كـانوا
كـواكب
يستضـاء
بهـا
اذا
|
مــا
اربـد
جـو
المعضـلات
وغامـا
|
|
كرهـوا
الملـوك
الظالمين
شعوبهم
|
وحــرٌ
بهــم
ان
يكرهـوا
الظلامـا
|
|
كـم
هـددوا
بالفادحـات
وكم
قضوا
|
بيـن
السـجون
علـى
الطـوى
اياما
|
|
وقفـوا
امـام
الغاشـمين
مواقفـاً
|
بلغــوا
بهــا
الاجلال
والاعظامــا
|
|
لـو
كـان
بغيتهـم
حطامـا
او
غنى
|
نـالوا
كمـا
شـاؤووا
غنى
وحطاما
|
|
لكنهـم
خـافوا
الالـه
فمـا
خشـوا
|
للظـــالمين
تغطرســـاً
وعرامــا
|
|
شــادوا
معاهـد
للنهـي
ومـدارجاً
|
ربــوا
بهــا
الارواح
لا
الاجسـاما
|
|
فـاذا
فعلتـم
كنتـم
أعلـى
الورى
|
كعبـا
وارسـخ
فـي
العلـى
اقداما
|
|
عـودوا
الـى
مصر
كباراً
في
الحجى
|
تســـديكم
الاكبـــار
والاكرامــا
|
|
وتفــاخروا
بــذكاء
مصـر
لعلهـم
|
يــوم
الرهـان
يطـأطئون
الهامـا
|
|
وتقلــدوا
صـبر
الكـرام
وجـردوا
|
منــه
الغــداة
مهنــداً
صمصـاما
|