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قـــدم
راســخ
وصــدر
رحيــب
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وأيــاد
علـى
الـدوام
تواسـي
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ومحيـا
طلـق
بـه
الغيـث
يسقي
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وتسـيل
البطـاح
بعـد
احتبـاس
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وثبـــات
يجــل
عــن
وثبــات
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دونـه
تقصـر
الجبـال
الرواسي
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يـا
لهـا
مـن
شـمائل
ومزايـا
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هــي
شــمس
تقــاد
دون
شـماس
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قـل
لمـن
رام
حذوها
صاح
يحذو
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هـل
تلـوح
الشـموس
فـي
الأغلاس
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لا
تســاوي
مؤسســات
المبـاني
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بمبــان
قــامت
بغيــر
أسـاس
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كيـف
لا
وهـو
فـرع
أصـل
أصـيل
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طيــب
المجتنـي
ذكـي
الغـراس
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قـد
أجـاد
الإمعان
في
جود
معن
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وحجــاه
حــاجي
ذكــاء
إيـاس
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معـدن
التـبر
ليـس
يخـرج
منه
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مــا
ســواه
كزئبـق
أو
نحـاس
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أيــن
لقيــا
مهـذب
لأن
عطفـا
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مـن
ملاقـة
جامـد
الطبـع
قاسي
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لـم
يكن
عنده
لذي
العهد
ذكرى
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بـل
تناسـي
وكـان
ليـس
بناسي
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ضـل
سـعياً
مـن
يطلب
الدر
ممن
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لـم
يكـن
عنـده
سـوى
القلقاس
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يـا
سـني
الكمـال
يـا
بدر
تم
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مـن
سـناه
اسـتمد
كـل
اقتباس
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أنــت
نــور
وكـل
نـور
مضـيء
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يجتلــي
ضــوء
لــدى
الاحسـاس
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عــان
صـغرى
مقـدماتي
وكـبرا
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هــا
تعــاين
نتيجـة
لقياسـي
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فالليــالي
ذوات
حمــل
ووضـع
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كحبـالي
مـا
إن
لهـا
من
نفاس
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تلــد
الغـث
والسـمين
وتبـدي
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فــي
ظفاريهــا
وبيـص
المـاس
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وإذا
دبـــر
المــدبر
أمــراً
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لاح
بــاهي
ســناه
كــالنبراس
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شــيد
اللَـه
ركـن
كعبـة
بيـت
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طهرتــه
العلــى
مـن
الأرجـاس
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وحمــاه
ممــا
يشــين
حمــاه
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ووقـــاه
وســـاوس
الخنـــاس
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فاجتـل
الحـظ
والهنـاء
وأبشر
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بازديــاد
الســرور
والإينـاس
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وتقبــل
وصــيفة
بنــت
فكــر
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أقبلـــت
عنبريـــة
الأنفــاس
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قـد
كسـاها
الحيـاء
حلـة
ورد
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أســبلت
فوقهــا
ذؤابـة
آسـي
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وتنـاول
مـن
كفهـا
كـاس
خمـر
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وأدرهــا
صــرفاً
علــى
الجلاس
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لا
تخـف
واشـياً
ولا
تخـش
لومـاً
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فهــي
راح
تـدار
دون
احـتراس
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ولـك
العـز
وهـو
غايـة
سـؤلي
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والتهاني
واذا
تناهي
التماسي
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