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قـم
لشـرب
الصـبوح
قبل
فوات
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وإذا
مـا
السـاقي
دعاك
فوات
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بريــاض
تراقـص
الأيـك
فيهـا
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لتغنــي
الهــزار
بالنغمـات
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كلمـا
أعيـن
الغمـام
بكتهـا
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ضـحكت
مـن
دموعهـا
الهـاطلات
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لـم
تـزر
دوحها
الشمائل
إلا
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وروت
عنــه
طيــب
النفحــات
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ظللتنــا
بظــل
كــرم
ظليـل
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بســطته
علـى
بسـاط
النبـات
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ثــم
حيـت
مـن
نرجـس
وأقـاح
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بثغـــور
وأعيـــن
ناعســات
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وإذا
ســائل
الغـدير
أتاهـا
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منحتـــه
لآلـــئ
الزهـــرات
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وكــان
الربــا
أرائك
لمــك
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رفعتهــا
لمجتنــي
الثمـرات
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فـأدر
لي
يا
بدر
شمس
الحميا
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واســقنيها
بـأنجم
الكاسـات
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بنـت
كـرم
عـذراء
حيـث
تجلت
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بسـناها
جلـت
دجـى
الظلمـات
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زوجـت
بـالمزاج
بكـراً
فجاءت
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مــن
ذراري
حبابهــا
ببنـات
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تـذهب
الهم
عن
قلوب
الندامى
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وتــوالى
الســرور
باللـذات
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إن
بــدت
فـي
سـكينة
وثبـات
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صـيرتني
يـا
صـاح
فـي
وثبات
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تتعـب
الساقي
الذي
قام
يسعى
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وهـي
فـي
كفـه
علـى
الراحات
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هـي
نـار
وألحـان
جنـة
عـدن
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كيـف
جمـع
النيـران
والجنات
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لـو
رأى
نورها
المجوس
لخروا
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ســـجداً
يحســـبونه
جــذوات
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هاكهـا
يـا
نديم
تجلى
عروسا
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وأدرهـا
علـى
جنـي
الوجنـات
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لا
تفـق
نشـوة
ولا
تصـح
سـكراً
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إذ
غـدا
التـائبون
في
حسرات
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وانتهـز
فرصـة
الزمـان
وشمر
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للتصـافي
واغنـم
صفا
الأوقات
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وإذا
مــا
دجــت
دجنـة
خطـب
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فاسـتنر
من
سنا
حمى
السادات
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حرم
الأمن
من
كعبة
المجد
عزا
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موضـع
السـر
مهبـط
البركـات
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مسـتقر
المنـى
محـط
الأمـاني
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غايـة
القصـد
منتهى
الرغبات
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حيهــم
حيـز
الرضـى
وحمـاهم
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حيـث
تمحـي
كبـائر
السـيئات
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هـم
وجـوه
النساك
حيث
تجلوا
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وصـدور
العبـاد
فـي
الخلوات
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هـم
بدور
التمام
دون
انتقاص
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وشـموس
الأنـوار
في
الحالكات
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هـم
كـرام
الورى
ولا
سيما
من
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هـو
فيهم
كالورد
في
الروضات
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وهـو
مـن
بينهـم
إذا
نسـبوه
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جــد
حــظ
علا
علـى
الهامـات
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وأخــو
همــة
ونجــل
وفــاء
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وأبــو
إقبــال
وخـال
هبـات
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ســـيد
جيــد
حســيب
نســيب
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نســل
خيـر
الآبـاء
والأمهـات
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أحمـد
الحامـدين
للَـه
شـكراً
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أوصـل
الواصـلين
بالمكرمـات
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برأ
يدي
النوال
بحر
العطايا
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وابـل
الجودهـا
طـل
الصدقات
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مـن
دنـا
منـه
قال
هذا
مليك
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إذا
علاه
تــاج
مـن
الهيبـات
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أبـدا
تصـبح
المعـالي
وقوفا
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بحمـاه
جريـاً
علـى
العـادات
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والمنـى
لم
تزل
بناديه
تدعو
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وتنـادي
يـا
قاضـي
الحاجـات
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همــة
دونهـا
السـماك
وأيـد
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دأبهــا
حـل
عقـدة
المشـكلات
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يـا
همـا
مـا
غناي
عنه
محال
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وإليــه
فقـرى
مـن
الوجبـات
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أنـا
جـان
وأنـت
رب
امتنـان
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فـأنلني
صـفحاً
عـن
الهفـوات
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واغضـض
الطرف
عن
قبيح
ذنوبي
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وتفضـل
وانظـر
بحسـن
التفات
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ولئن
قصــرت
مقــالات
مــدحي
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فثنــائي
بــاد
مـن
الحـالات
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زادك
اللَــه
سـؤدداً
ووقـارا
|
وارتقـاء
إلـى
علـى
الدرجات
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ما
طلبنا
حسن
الختام
ابتداء
|
أورجونا
الرضوان
في
الغايات
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