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هلا
خـبر
الحمـى
لمـن
استهلا
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فهلهــل
بالبراعــة
مسـتهلا
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أعـد
ذكـر
الحمى
ليعود
أنسي
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وكـــرره
علـــي
فلــن
يملا
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وشـبب
فـي
أهيـل
منـى
قصيدي
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معرضـــة
بســـكان
المصــلى
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وصـرح
لـي
بعـذرك
لـي
حنـوا
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فقـد
أضـجرتني
فنـدا
وعـذلا
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فلـي
بيـن
القبـاب
فتاة
خدر
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يمـد
لهـا
القنـا
الخطي
ظلا
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تريــك
تقاليــا
وتسـر
حبـا
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فتحســن
منظـراً
وتسـوء
فعلا
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إذا
وصـلت
فقـد
وعـدتك
هجرا
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وإن
هجـرت
فمـا
وعـدتك
وصلا
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صبا
لك
يا
ابنة
البكري
قلبي
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فمهلاً
لا
عـــدمت
هــواك
مهلا
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جعلـت
لـك
القضا
أمراً
ونهيا
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فمـا
شـئت
أحكمي
جوراً
وعدلا
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وقلــت
فتـاك
مقتـول
فقـالت
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إذا
ما
الحب
أفراط
كان
قتلا
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بروحـي
مـن
بروحـي
أفتـديها
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وقـل
لهـا
الفـدى
مالا
وأهلا
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إذا
عانقتهــا
عـانقت
خـوداً
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منعمــة
رشــوف
الثغـر
كحلا
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كـــأن
الأقحوانــة
قبلتهــا
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بمبسـمها
فـأبقت
فيـه
شـكلا
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وإن
سـفرت
فقـد
أبـدت
شقيقا
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أجـادته
يـد
النعمـان
صـقلا
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تريـك
الصـبح
غرتهـا
انبلاجا
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إذا
مـا
الليـل
طرتهـا
أطلا
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إذا
خطـرت
وإن
نظـرت
نظرنـا
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لهـا
ولجفنهـا
رمحـاً
ونصـلا
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كــأن
ببردهــا
نقـوي
كـثيب
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يهـزان
القـوام
إذا
اسـتقلا
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وإن
نزعــت
حواجبهــا
قسـيا
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رمتــك
فـواتر
الألحـاظ
نبلا
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تصـوغ
التـبر
منطقـة
وطوقـا
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وأقراطـــاً
وأســـورة
وحجلا
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فجــاءت
كالأراكــة
أثقلتهـا
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ثمـار
الحلـي
فهي
تنوء
ثقلا
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حبسـنا
دونهـا
الألحـاظ
خوفا
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علـى
تلـك
المحاسـن
إن
تسلا
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أرق
مـن
الحميـا
فـي
يـديها
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وأطيـب
مـن
مـذاقتها
وأحلـى
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بحيـث
الزهـر
ترضعه
الغوادي
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بحجــر
خميلــة
حضـنته
طفلا
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وقـامت
فيـه
ما
شطة
النعامى
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تســرح
مــن
جعـود
آلاس
جثلا
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وثغـر
الأقحـوان
افـتر
حسـنا
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لأعيــن
نرجــس
ينظــرن
نجلا
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وأعطــــاف
الأراك
مرنحـــات
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كأعطــاف
الحسـان
تميـل
دلا
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فكــم
خـاتلت
ثـم
وخـاتلتني
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جــآذر
مـا
ظفـرت
بهـن
ختلا
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فيـا
شـهب
الثريـا
سـامريني
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فلـو
كـان
السـمير
سواك
ملا
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كـأن
الصـبح
سـيف
فـي
جفيـر
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تقلــده
الجبـان
فلـن
يسـلا
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ولــو
أنـي
تصـدقني
الأمـاني
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لكنـت
اليـوم
أجمع
منك
شملا
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مضـى
زمـن
الوصال
وكان
وافي
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كظــل
غمامــة
ثــم
اضـمحلا
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فقـرب
صـاح
عنسـك
واعتقـدها
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مخبســة
تعــد
الحـزن
سـهلا
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متوقـــة
علنــداتا
أمونــا
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جسـوراً
ذعلبـا
ختمـاء
بـزلا
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تمثـل
لـي
بـأوب
مـن
يـديها
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يـدي
نصـفٍ
تجيـد
اللطم
ثكلى
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ولـي
بـك
حاجـة
فقف
أتنظرني
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كلـوث
الـبرد
عمـرك
أو
أقلا
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تحملهـــا
رســالة
مســتهام
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يكلـف
مـن
نسـيم
الريح
رسلا
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علـى
الحسـن
الزكـي
سـلام
صب
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مقيـم
مـا
أقـام
وما
استقلا
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محضـت
لك
المودة
يا
ابن
ودي
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وقـد
أشـهدت
قلبـاً
منك
عدلا
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ألسـت
مطيـل
أبنيـة
المعالي
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وخيـر
قبيلهـا
فرعـا
وأصـلا
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لـك
الفـرس
المسوم
حيث
يسمو
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رعيـل
الخيـل
والسيف
المحلى
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فحـزت
رهانهـا
فـي
كـل
مجرى
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وفـزت
هنـاك
بالقـدح
المعلى
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يحيـي
الوافـدين
نـداك
غيثا
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فيحيـــي
ممحلاً
ويميــت
محلا
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طلعــت
عليهـم
طلـق
المحيـا
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كأنــك
منهــم
أوتيـت
سـؤلا
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ولـم
تمنـن
وإن
أعطيـت
جمـاً
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وقـد
أوسـعتهم
بشـراً
وبـذلا
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كأنـك
إذ
تجيـز
الوفـد
تقضي
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ديونــاً
أســلفوك
بهـن
قبلا
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أخـــو
ورعٍ
أو
يســي
وفهــم
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أياســـي
وحـــد
لـــن
يفلا
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وخلــق
كــالأزاهر
باكرتهــا
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يــد
الأنـواء
فهـي
تـرش
طلا
|
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وقــد
نطقــت
شـواهد
بينـاتٍ
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بأنـك
عيلـم
العلمـاء
فضـلا
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لـك
القلـم
المترجم
عن
علوم
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يهتـــك
ســـترها
نقلاً
وعقلا
|
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إذا
مشـيته
فـي
الطرس
رضيعا
|
فـإن
فطـم
اسـتكن
وعاد
حملا
|
|
إذا
اعتنـق
الأنامـل
أولـدته
|
علـى
مهـد
مـن
القرطاس
نسلا
|
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تــراه
لــدق
قــامته
كصــبٍ
|
أضـر
بـه
المقـام
فمـا
أبلا
|
|
بقيــت
فهاكهـا
غـراء
يحلـو
|
بمـدحك
جيـدها
ويـروق
شـكلا
|
|
قصـــيد
زفهــا
لعلاك
فكــري
|
فهـا
هـي
كالعروس
لديك
تجلى
|
|
وإن
ينـل
القبـول
فخيـر
مهر
|
بــه
أصـدقتها
كرمـا
وفضـلا
|