|
أتســال
عــن
عينــي
لمــا
هـي
تـدمع
|
وجســـمي
نحيـــل
والحشـــى
يتقطـــع
|
|
وروحـــي
كئيـــب
والفـــؤاد
بحســرة
|
ومـا
لـي
سـهير
الطـرف
والقلـب
موجـع
|
|
فمـا
نـالني
هـذا
سـوى
مـن
فـراق
مـن
|
لـه
النـور
يبـدو
فـي
البقـاع
ويلمـع
|
|
هـو
المربـع
الأسـنى
الـذي
فيـه
ترتعي
|
مـن
الغيـد
كـم
خـود
بهـا
العقل
يرفع
|
|
كمثــل
الــذي
فــاقت
علـى
كـل
ربـرب
|
ومــن
نورهــا
كالشـمس
بـل
هـو
أسـطع
|
|
ألــم
تــر
أن
الشـمس
لمـا
بـدت
لهـا
|
غـــدت
بســـحاب
مــن
حيــاء
تــبرقع
|
|
فللَـــه
مـــن
هيفــاء
منــي
تملكــت
|
لهــا
فـي
سـماء
القلـب
مثـوى
ومضـجع
|
|
كــذا
وبــذاك
الحــي
مــن
آل
أحمــد
|
ألــوف
شــموس
منهــم
النــور
يســطع
|
|
حمــاة
هــداة
قــد
حمـوا
ديـن
جـدهم
|
وأضـــحى
بهـــم
رأس
الضــلالة
يقمــع
|
|
كرام
السجايا
يا
قد
تساموا
على
الورى
|
وســـرهم
مـــن
منبــع
الســر
مــودع
|
|
أيـــاديهم
مثـــل
الغــوادي
عديــدة
|
فمــن
زارهـم
بالسـؤال
والخيـر
يرجـع
|
|
ووفــي
البلــدة
الغـراء
منهـم
أيمـة
|
ثقــاة
ســراة
قــد
أجـابوا
وأسـمعوا
|
|
ولاريـــب
فـــي
آل
الرســول
وحســبهم
|
بـــه
شـــرف
فـــوق
الســها
يرتفــع
|
|
ولــم
لا
وعنهــم
أذهــب
الرجـس
ربهـم
|
وطرهـــم
والـــذكر
فـــي
ذاك
يقنــع
|
|
عليــك
بهــم
فـي
حبهـم
يحصـل
الرضـا
|
وإيــاك
ســوء
الظــن
فيهــم
فتقطــع
|
|
فشــانيهم
فــي
النــاس
حقــاً
محلــه
|
محبهـــم
فـــي
جنــة
الخلــد
يرتــع
|
|
ومـــا
الفخـــر
إلا
بـــالنبي
محمــد
|
هــو
المصــطفى
منـه
الفيوضـات
تنبـع
|
|
ولــولاه
مــا
سـادوا
ولا
بلغـوا
العلا
|
ولا
كـــانت
الا
رجـــاس
عنهــم
ترفــع
|
|
وقــد
لاح
لــي
أن
أذكـر
البعـض
منهـم
|
فإحصــــاء
كــــل
منهــــم
يتمنـــع
|
|
فقــد
ملــؤا
الأرجــاء
شـرقاً
ومغربـاً
|
وهـا
أنـا
فـي
الوعـد
الـذي
قتل
أشرع
|
|
فـــأمهم
الزهـــراء
ســـيدة
النســا
|
وخيـــر
أب
نعـــم
العلـــي
المفــرع
|
|
وريحــاً
نتــاطه
الشــهيدان
مـن
همـا
|
يســـر
همــا
عنــا
الشــواغل
تــدفع
|
|
وحمـــزة
مولانـــا
الشـــهيد
وصــنوه
|
حليــف
التقــى
العبــاس
أزكـى
وأورع
|
|
كـذا
جعفـر
الطيـار
ذو
الفضـل
والوفا
|
كــذاك
عقيــل
مــن
لـه
الجـود
يرجـع
|
|
وأكــرم
بزيــن
العابـدين
الـذي
سـما
|
وذي
العلــم
وهــو
البــاقر
المتوسـع
|
|
وصــادقهم
شــمس
الهـدى
قـامع
العـدى
|
وفخـــر
العلا
ذو
الطاعـــة
المتطــوع
|
|
علـــي
العريضـــي
العلـــى
ونســـله
|
هـــو
المســـك
مــا
كررتــه
يتضــوع
|
|
وللَـــه
ذو
الأســرار
والمجــد
نجلــه
|
محمـــد
النـــور
العظيــم
المشعشــع
|
|
وذو
الحلــم
عيســى
والمعـرف
والتقـى
|
وأحمـــد
نعـــم
الزاهـــد
المتقنــع
|
|
وذخــري
عبيــد
اللَــه
أوحــد
عصــره
|
هزبــــر
المزايـــا
ســـيد
متـــبرع
|
|
كـــذا
علــوي
نجلــه
شــامخ
الــذرى
|
وفخــري
جمــال
الـدين
مـن
هـو
مصـقع
|
|
كــذا
نجلــه
العلــوي
شــيخ
أوانــه
|
وفضـــل
علـــي
مثلـــه
ليــس
يســمع
|
|
وصـــاحب
مربـــاط
المبجـــل
نجلـــه
|
هــو
القطــب
حقــا
وهـو
للسـر
مشـرع
|
|
محمـــد
الجـــد
المحيـــط
بجمعنـــا
|
بنــــو
علـــوي
مـــن
علاه
تفرعـــوا
|
|
وثــن
بمولانــا
العلــي
الــذي
غــدا
|
لــه
النــور
فـي
كـل
الجهـات
يشعشـع
|
|
وشــيخ
الشــيوخ
الغــوث
قطـب
زمـانه
|
أمــام
العلا
فــي
اللـه
بـالحق
يصـدع
|
|
محمـــد
الشــهم
المقــدم
مــن
ســما
|
ومــن
قــد
هــدى
كــم
حــائر
يتضـرع
|
|
وخــدن
الهــدى
العلــوي
شـنف
بـذكره
|
مســامع
أهــل
الكــون
فالـذكر
ينفـع
|
|
هـو
القطـب
من
قد
جاء
بالمعتلى
الذكا
|
علـــي
المعـــالي
بالإغاثـــة
يســرع
|
|
كـذا
بـالعفيف
المنتقـى
ضـيغم
الشـرى
|
غريــب
المعــاني
عنـده
الفـرق
يجمـع
|
|
ونجــل
العلـى
المرتضـى
معـدن
التقـى
|
جمـــــال
بأســــرار
العلا
متلفــــع
|
|
أبــو
الشـهم
قطـب
العـارفين
وغـوثهم
|
هــو
العــارف
الســقاف
ذاك
المـبرقع
|
|
ومـن
حبـس
الشـمس
المنيـرة
فـي
السما
|
كمــا
أوقفــت
لمـا
دعـا
اللَـه
يوشـع
|
|
وأولاده
الشــم
الكــرام
الــذي
سـموا
|
شــموس
الهــدى
فـي
كـل
علـم
توسـعوا
|
|
ولا
ســـيما
الســـكران
فــرد
أوانــه
|
ويــا
لــك
مــن
صــنوله
كــان
يبـدع
|
|
هـو
المفـرد
المحضـار
ليث
الشرى
الذي
|
كرامــاته
فــي
حصــرها
ليــس
تجمــع
|
|
كـذا
ابـن
أخيـه
العيـدروس
الـذي
سما
|
طويـــل
الأيــادي
العــارف
المتطلــع
|
|
يقـــول
رقـــاب
الأوليـــاء
جيمعهــم
|
غــدت
تحــت
أقــدامي
ولاحكــم
يمنــع
|
|
فيــا
لـك
مـن
فـرد
لـه
القـرب
منـزل
|
وبـــدر
لــه
أفــق
الســعادة
مطلــع
|
|
وحـامي
الحمـى
قطـب
العلا
قـامع
العدى
|
علـى
بـن
أبـي
بكـر
لـه
الفضـل
أجمـع
|
|
كـذا
الفخـر
تـاج
الأوليـاء
أخو
الندى
|
أبــو
أحمــد
البحــر
الخضـم
المشـرع
|
|
وأخـــوان
هــذا
العــارفون
جيمعهــم
|
ســراة
المعــالي
للشــريعة
يتبعــوا
|
|
وأعقــب
مولانــا
الشــهاب
الـذي
سـما
|
هــو
القطــب
عـن
ديـن
الضـلالة
يـردع
|
|
ونجـل
الحسـين
الفرد
ذو
الذوق
والصفا
|
ومــن
ســره
فــي
نجلــه
ليــس
ينـزع
|
|
ويتلـــوه
شـــيخ
الأوليـــاء
ورضــهم
|
فللَـــــه
روض
بالكمــــالات
ممــــرع
|
|
ونجلاه
قطبـــاً
كـــل
علـــم
كلاهمـــا
|
عفيــف
شــهاب
منهمــا
الكــون
يسـطع
|
|
ولا
تنــس
مولانــا
الصــفي
الـذي
صـفا
|
هــو
المصــطفى
الصـوفي
مـن
هـو
أروع
|
|
وعززهـــم
فخرابـــرا
بعهــم
هــو
ال
|
محقـــق
عبـــد
القـــادر
المتمتـــع
|
|
ونجـــل
عفيـــف
بحـــر
كــل
فضــيلة
|
جمــال
العلا
غــوث
البرايــا
المـوزع
|
|
وصـــنواه
زيـــن
العابــدين
عليهــم
|
فقيــــه
وصــــوفي
وقطـــب
وأرفـــع
|
|
كـذا
الشـيخ
حـاوي
العلـم
عـارف
وقته
|
ونجـــل
الجمــال
العــالم
المتضــرع
|
|
ونجــل
العلــي
الفــرد
عيــن
أوانـه
|
هـو
الصـادق
السـامي
الهـدي
المتـورع
|
|
كــذا
نجــل
شــيخ
مـن
تسـامى
وسـيدي
|
هزبــر
الــوغى
نعـم
الجمـال
المرفـع
|
|
وأولاده
الســـامون
فــي
رتبــة
العلا
|
ذو
العلـم
مـن
بحـر
الحقيقـة
يكرعـوا
|
|
علــي
الرضــا
جـم
المناقبـل
مـن
علا
|
وجــدي
عفيــف
الــدين
مـن
هـو
أخشـع
|
|
أمــام
المعـالي
بـاذل
المـال
دائمـاً
|
ففــي
بــذله
مثــل
الحيــاحين
يهمـع
|
|
وذو
الحلـم
مولانـا
الـوجيه
الـذي
سما
|
وقطـــب
المعـــالي
جعفــر
المتضــلع
|
|
ورابعهـــم
ركـــن
الوفــود
أمامنــا
|
واســــتاذنا
شـــيخ
الملا
المتطلـــع
|
|
وجــدي
لا
مــي
معتلـى
القـدر
والـذكا
|
هــو
الفخــر
بحـر
العلـم
للَـه
يخضـع
|
|
كــذا
والــدي
أكــرم
بـه
فلقـد
صـفا
|
هــو
المصــطفى
عنـي
بـه
الشـر
أدفـع
|
|
جميــــل
المحيـــا
ناســـك
متهجـــد
|
فكــم
ليلــة
قــد
قـام
والنـاس
هجـع
|
|
وعمــي
شــهاب
الــدين
صــالح
عصــره
|
وصــنوي
عفيــف
الــدين
بـاللَه
مولـع
|
|
أولئك
أبــــائي
فجئنــــى
بمثلهـــم
|
إذا
مــا
حوانــا
فــي
الريــة
مجمـع
|
|
وقــد
آن
لــي
أن
أمسـك
القـول
ههنـا
|
ففـــي
حصــر
أعــدادلهم
عــز
مطمــع
|
|
وإنــي
فيهــم
محســن
الظــن
دائمــاً
|
وأبغـــض
شخصـــاً
راح
فيهـــم
يشــنع
|
|
وأرجـو
بهـم
نيـل
السـعادة
إذ
هـم
ال
|
أئمــــة
مـــن
درويشـــهم
لا
يضـــيع
|
|
هنيــأ
لمــن
والـوه
بالفضـل
والهـدى
|
ويـــل
لمـــن
عـــادوه
ســوف
يفجــع
|
|
هــم
القـوم
لا
يشـقى
جليـس
لهـم
بهـم
|
هــم
القــوم
مــن
بنيـانهم
لا
يضعضـع
|
|
أيــا
صــاحبي
إن
عزفـي
الـوقت
مطلـب
|
توســل
بهــم
إن
شــئت
بالسـؤل
تنجـع
|
|
ولا
تســـتمع
قـــول
العــواذل
فيهــم
|
فســـوف
تراهــم
بالمقــامع
يقمعــوا
|
|
ألا
يـا
رسـول
اللـه
يـا
أفضـل
الـورى
|
أغثنـــي
فـــإني
بالمعاصـــي
أمتــع
|
|
ويـــا
آل
طـــه
أدركـــواني
بنفحــة
|
فـــإني
بكاســـات
المنايـــا
أجــرع
|
|
ويـــا
كـــل
أصــحاب
النــبي
محمــد
|
أغيثــوا
عبيــداً
مــن
خطايـاه
يضـلع
|
|
ويــا
أوليـاء
اللَـه
يـا
صـفوة
الملا
|
بفضـــلكم
حلـــوا
العقــود
ووســعوا
|
|
الهـــي
بحـــق
الأكرميـــن
جميعهـــم
|
أنلنــي
بهــم
ســؤلي
فــأنت
الموسـع
|
|
الـه
اسـقني
مـن
شـربهم
قـاطع
الظمـا
|
ســريعاً
ســريعاً
أنــت
تعطــي
وتمنـع
|
|
إلهــي
بهــم
فــاغفر
ذنـوبي
جميعهـا
|
وأهلــي
وأحبــابي
ومــن
لــي
يرجــع
|
|
وأشــــياخنا
والمســـلمين
جيمعهـــم
|
فعفـــوك
عنـــي
مـــن
خطــاي
أوســع
|
|
امتنــا
علــى
منهــاج
أفضــل
مرســل
|
أمـــا
البرايـــا
مــن
بــه
نتشــفع
|
|
وصــــل
عليــــه
بكــــرة
وعشــــية
|
وآل
وصـــحب
ثـــم
مـــن
هــو
يتبــع
|