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لـــي
أربــع
ركبتهــن
طبائعــا
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وجعلـت
فـرط
هـواك
طبعـاً
خامسـا
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وجمعـت
مـن
أسـرار
خلقـك
صـورتي
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ونصـــبتني
وخفضـــتهن
نواكســا
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أهبطـت
أنوار
النجوم
إلى
الهواء
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فـإلى
الـثرى
بالماء
كي
يتجانسا
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فشـــققتها
شــقا
لــه
وصــببته
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صــبا
لهــا
وفلقـت
حبـا
يابسـا
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أنبتــــه
وســــقيته
وزرعتـــه
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حــتى
اسـتوى
متناهيـا
متنافسـا
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وحصــدته
وكتبتــه
قــوت
الـورى
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تحيـي
النفـوس
به
وتغني
البائسا
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وســللت
منــه
ســلالة
أجريتهــا
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بيـن
الرجـال
بمـا
تقـدر
والنسا
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مــن
صـلب
ذاك
ومـن
تـرائب
هـذه
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متماشـــجا
متلاحمـــا
متلابســـا
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وجعلــت
أرحــام
النسـاء
لمـائه
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مــأوىً
يقــر
بـه
وحبسـا
حابسـا
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ونظـــرت
نظــرت
راحــم
مــترحم
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ســرا
إليـه
بهـا
وكنـت
مؤانسـا
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فتقلبــت
علقــاً
لــذاك
ومضــغة
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وبــدت
عظامــاً
واكتسـت
بملابسـا
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وخلقتــه
مــن
بعـد
خلقـاً
آخـرا
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فتبــارك
اسـمك
ذو
العلا
وتقدسـا
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حــتى
إذا
كملــت
لتســعة
أشـهر
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أجـــزاؤه
أخرجتـــه
متناكســـا
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ونفخـت
فيـه
الـروح
عنـد
خروجـه
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فملأت
منـــه
مســامعا
ومنافســا
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فــرأى
وشــم
وذاق
طعــم
طعـامه
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ووعــى
الكلام
بــه
وحـس
اللامسـا
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وغــذوته
لبنــا
لطيفــا
بـاردا
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في
الصيف
سخناً
في
الشتا
متجانسا
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وســـقيت
والــده
هــواه
وأمــه
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فهــواه
عنـدهما
يحسـن
مـا
أسـا
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حــتى
إذا
فهــم
الخطـاب
دعـوته
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يـا
عبـد
كـن
لـي
حاضراً
ومجالسا
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يـا
عبـد
أسـلم
لـي
جبينك
ساجدا
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واركــع
لــدي
ولا
تكـن
متقاعسـا
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يـا
عبـد
فـاحفظني
كما
أنا
حافظ
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واطمــع
بمغفرتـي
ولا
تـك
يائسـا
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يــا
عبــد
إنــي
راحــم
مـترحم
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فـأنب
وعـد
لـي
قبـل
عودك
تاعسا
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يــا
عبـد
مـا
كـافيتني
بمحبـتي
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لـك
إذ
تحـب
الفاسـق
المتناعسـا
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يـا
عبـد
هل
تردي
من
استبدلت
بي
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عمــدا
شـياطين
الهـوى
وأبالسـا
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يـا
مـن
تبـدل
بـاليواقيت
الحصى
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وبصــادق
الحملات
كلبــا
كابســا
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واليـت
مـن
عـاديت
فيـك
وقـابلت
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منـك
الوجـوه
إليـك
وجهـا
عابسا
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يـا
عبـد
قصـدي
فـي
صلاحك
والرضا
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منــي
رضـاك
فكـن
لحرفـك
طامسـا
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يــا
عبــد
إنــي
نــاظر
متطلـع
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لـك
رجعـة
نحـوي
صـباحك
والمسـا
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يـا
عبـد
كـم
عنـدي
عليـك
معاتب
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ومراحمــي
ترجــو
لعلـك
أو
عسـى
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مــولاي
حلمــك
عــن
ذنـوبي
مـرة
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جعــل
المـزار
خوامسـا
وسوادسـا
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مــولاي
شــيمتك
الوفـاء
وشـيمتي
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آتــي
الخيانــة
راجلاً
أو
فارسـا
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مــولاي
أصـلح
مـن
طبـاعي
فاسـدا
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واعمـر
لـذكرك
مـن
فـؤادي
دارسا
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مـــولاي
إنـــي
خاشـــع
متضــرع
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أشــكو
إليــك
خـواطرا
ووساوسـا
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مــولاي
هـل
يصـلح
بغيـرك
فاسـدي
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أم
هــل
تــزول
منـاحس
بمناحسـا
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مــولاي
أوصــافي
غــرائس
نعمــةٍ
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أنعمتهــا
يــا
طيبهــن
غرائسـا
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أنبتهــا
فــي
أرض
جــودك
بسـقا
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طــالت
مطاولهـا
وفُتـن
القائسـا
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وســقيته
مــن
مــاء
حبـك
شـربة
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فكأنمــا
زفــت
إليــك
عرائســا
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العلــم
عيناهــا
وحبــك
قلبهـا
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والـذكر
فوهـا
والحيـاء
لها
كسا
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فخـرت
علـى
الأوصـاف
إذ
بك
فخرها
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وتســنمت
للمجــد
رأســاً
رائسـا
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