|
قــدح
الوجــد
زنــده
فأطــارا
|
مـن
حصـاة
القلـب
الشـجيِّ
شرارا
|
|
حينمــا
نــاظر
المعنـى
جهـارا
|
شـام
برقـا
مـن
الشـآم
استنارا
|
|
ملأ
الخـــافقين
نــورا
ونــارا
|
|
منــه
وجـه
الـثرى
تعنـدم
خـدا
|
والثريــا
ماســت
بحلــة
سـعدى
|
|
ومـــتى
كفــه
الخضــيب
أمــدَّا
|
صـــبغ
الأرض
والســماء
فأبــدى
|
|
فـي
سـواد
العـراق
منه
إحمرارا
|
|
صــب
سـوطا
فـي
قلـب
دجلـة
ورَّث
|
وهجــا
فـي
حشـا
الفـرات
تلبـث
|
|
وبــذيل
الــزوراء
لمــا
تشـبث
|
بـث
فـي
الكـرخ
والرصافة
ما
بث
|
|
ث
فـــأورى
بالجـــانبين
أوارا
|
|
كـم
شـربنا
منـه
شـرابا
حميمـا
|
وشــهدنا
بــه
عــذابا
أليمــا
|
|
حـال
حـال
الـدنيا
فعـاد
وخيما
|
واســتحالت
دار
الســلام
جحيمـا
|
|
فتلونـا
يـا
نـار
زيـدي
شـرارا
|
|
حــث
فــي
ســوقه
ركــائب
سـحب
|
نضـــحت
غربهــا
بشــرق
وغــرب
|
|
إن
ذاك
المقبـاس
مـن
غيـر
ريـب
|
قبســت
منــه
كــل
مهجــة
صــب
|
|
صــبَّ
مــن
عينـه
دموعـا
غـزازا
|
|
رام
أن
يرشـــق
الخــواطر
نبلا
|
فجعلنـــا
لــه
النــواظر
جعلا
|
|
مــا
تــراه
إذ
مـرَّ
يسـحب
ذيلا
|
كــاد
أن
يخطـف
البصـائر
لـولا
|
|
أن
تركنـــاه
يخطــف
الأبصــارا
|
|
ومــن
الشـام
حيـن
أمَّ
العراقـا
|
دس
فـــي
كــل
مهجــة
محراقــا
|
|
كلمــا
حـرَّ
عـن
قبـاه
النطاقـا
|
علقــت
فـي
القلـوب
منـه
علاقـا
|
|
ت
هــوى
تسـعر
القلـوب
ادَّكـارا
|
|
يـا
لـه
بارقـا
إذا
الليـل
جنا
|
راح
يختـــال
فــي
غلائل
لبنــى
|
|
لا
تسـل
حيـث
عـنَّ
يـا
صـاح
عنـا
|
أحـرق
القلـب
أدهـش
اللـب
منـا
|
|
أذهــل
العقــل
حيــر
الافكـارا
|
|
طــارق
بالضـياء
يفـري
الظلامـا
|
طرقتـــه
يـــد
العلا
صمصـــاما
|
|
وإذا
مــا
الــدجا
تــدَّرع
لامـا
|
قلــد
الأفــق
مـن
سـناء
حسـاما
|
|
طــرَّ
كــالفجر
للــدجا
بتــارا
|
|
آيـة
السـيف
فـي
انطبـاع
ورسـم
|
رســمت
فــي
افرنــده
أيٍّ
رســم
|
|
وعلـــى
فـــرق
حالــك
مــدلهم
|
لاح
فـــي
جــوهر
دمشــقي
رقــم
|
|
فأرانـا
مـن
ذي
الفقـار
غـرارا
|
|
عارضــا
رمحــه
يــروم
بــرازا
|
كشــــقيق
حقيقــــة
ومجـــازا
|
|
منــه
إذ
أظهـر
السـماك
ركـازا
|
فـي
حواشـي
الآفـاق
أبـدى
طرازا
|
|
نضــرا
فـي
حلاه
يحكـي
النضـارا
|
|
غــلَّ
عنــق
الـدجا
بـأغلال
أسـر
|
فكســا
قيــس
عـامر
طـوق
عمـرو
|
|
يــا
لـه
مـن
وضـاح
حيـرة
فكـر
|
سلســل
الليــل
فـي
سلاسـل
تـبر
|
|
حينمــا
جــنَّ
فاســتفاق
نهـارا
|
|
جــدولته
يــد
مـن
الرعـد
شـلا
|
فلـــذا
غيــر
مســتقيم
تجلــى
|
|
بحلاه
جيـــد
الســـماء
تحلـــى
|
وعلـى
اللـوح
سـورة
النور
أملى
|
|
فاقتبســنا
مـن
آيهـا
الانـوارا
|
|
كلمـــا
لاح
لـــي
بلــفٍّ
ونشــر
|
بعـــد
ترتيبــه
تشــوَّش
فكــري
|
|
فأنــا
والمحيــط
علمــا
بسـري
|
لســت
أدري
وليتنــي
كنـت
أدري
|
|
مـا
الـذي
آنسـته
عينـي
جهـارا
|
|
أهــي
النــار
جمرهــا
متوقــد
|
أم
هــو
النــور
ضــوؤه
متجسـد
|
|
يــا
تـرى
والتمييـز
منـي
صـفد
|
تلك
نار
الكليم
أم
نور
محي
الد
|
|
يــن
غشـى
علـى
الـدجا
فأنـارا
|
|
وعـن
العيـن
قد
جلا
الغين
والعي
|
هـب
حـتى
انجلـى
بـه
ذلـك
الفي
|
|
قلـت
فـي
نعتـه
وقـد
مسني
العيَّ
|
ذاك
محـض
النور
الذي
كان
في
عي
|
|
ن
العمــاء
التجــرَّديِّ
احـورارا
|
|
ذلـك
العقـد
فـي
الجـواهر
مفرد
|
وعليــه
كــل
الخناصــر
تعقــد
|
|
انمــا
فـض
خـاتم
الرسـل
أحمـد
|
ذلــك
الجـوهر
البسـيط
ومـا
أد
|
|
راك
بـالجوهر
البسـيط
اختبـارا
|
|
مـا
علـى
غيـره
اسـتدارت
رحـاه
|
فأرانــا
الــدقيق
مــن
معنـاه
|
|
صــقلت
فــي
يـد
التجلـي
مـراه
|
فلـــك
أطلـــس
محـــا
بصــفاه
|
|
عـن
مرايـا
عين
العقول
اغبرارا
|
|
ظهــرت
ذاتــه
العليــة
مجلــى
|
لجميـــع
الصــفات
قــولا
وفعلا
|
|
فغــدا
فــي
مقــام
آدم
أولــى
|
مظهــر
للاســماء
أظهرهـا
اللـه
|
|
تعــــالى
بنفســــه
اظهـــارا
|
|
هــو
بعــض
الآيـات
فيمـا
تقـرَّر
|
بزغــت
فـي
الآفـاق
اللـه
أكـبر
|
|
بهـــرت
رســـطاليس
والاســكندر
|
حكمـة
للاشـراق
مـن
جـانب
الغـر
|
|
ب
اســـتنارت
فعمــت
الاقطــارا
|
|
علــم
للهــدى
بــه
قـد
هـدينا
|
وســبقنا
الانــام
علمـا
ودينـا
|
|
كيــف
لا
نهتــدي
بــه
ويقينــا
|
ذلـك
الطـور
لـو
رآه
ابـن
سينا
|
|
باشــــاراته
اليـــه
أشـــارا
|
|
أو
رعـى
جـالينوس
تلـك
المراعي
|
ضــاع
بيــن
السـوام
كـل
ضـياع
|
|
ونعـــاه
للفلســـفيين
نـــاعي
|
أو
رأى
افلاطــون
تلـك
المسـاعي
|
|
لمشــى
فــي
ركـابه
أيـن
سـارا
|
|
أو
رآه
مـــتى
حـــواريِّ
عيســى
|
ظنـــه
فــي
تدريســه
أدريســا
|
|
وبســـيماه
خـــاله
الناموســا
|
أو
رأتـه
الأحبـار
أحبـار
موسـى
|
|
لادَّعـت
فيـه
مـا
ادعتـه
النصارى
|
|
عيلـم
العلـم
مـوجه
ليـس
يسـكن
|
بيـن
جنـبيه
عـالم
الكـون
يكمن
|
|
وسـع
الكـل
فهـو
عيـن
التعييـن
|
عـالم
تنطـوي
العـوالم
فـي
كـن
|
|
ه
علاه
ويســــتترن
اســــتتارا
|
|
مـا
معـاني
البـديع
أبدى
بيانا
|
كــان
تلخيصــه
لهــا
برهانــا
|
|
ذاك
يــا
ســعد
سـيد
عـز
شـانا
|
ذو
تجــلٍّ
لــه
الــذوات
عيانـا
|
|
تـــتراآى
وعنـــه
لا
تتـــوارى
|
|
مـن
يـراه
لـم
يقـل
يـا
لطيىـء
|
أي
مــرء
جئتــم
بــه
أي
مــرء
|
|
فبمســــباره
المعـــدَّ
لـــبرء
|
ســبر
الممكنــات
حــتى
لشــيء
|
|
لــم
يكـن
ممكنـا
غـدا
مسـبارا
|
|
قلبـه
العـرض
صـدره
صـفحة
اللو
|
ح
وأهـل
الكرسـي
مـن
ذاك
أفتوا
|
|
كـم
عليهـم
أملي
وكم
منه
أملوا
|
خصــه
اللـه
مـن
لـدنه
بمـا
أو
|
|
دع
مــن
ســر
غيبــه
الاقــدارا
|
|
لــو
رآه
الـذي
علـى
قريـة
مـر
|
لـــدرى
أنـــه
بـــذلك
أخــبر
|
|
بـل
برفـع
الجـدار
أولـى
وأجدر
|
لـو
مع
الخضر
كان
حين
أتى
القر
|
|
يــة
مـن
قبلـه
أقـام
الجـدارا
|
|
شــاهد
غــاب
حســه
عــن
وجـود
|
فــي
مجــال
منــزه
عــن
حـدود
|
|
وعلـــى
رغـــم
جاحــد
مطــرود
|
شــهد
اللــه
أنــه
فــي
شـهود
|
|
إن
جــرى
طــرف
طرفـه
لا
يجـارى
|
|
راض
مهــرا
للجــري
غيـر
مـروض
|
بعنـــان
فـــي
كفـــه
مقبــوض
|
|
ولتقطيـــع
بحـــر
كــل
عــروض
|
كــم
علــى
ظهــر
سـابح
بفيـوض
|
|
خـاض
مـن
لجـة
العمـاء
الغمارا
|
|
آخــذا
بــالآراء
عرضــا
وطـولا
|
وكــل
صـعب
منهـا
دعـاه
ذلـولا
|
|
أينمــا
ينتحــي
تــراه
وصـولا
|
فـي
مجـال
الخيـال
أجـرى
خيولا
|
|
لا
يشــق
النهــي
لهــنَّ
غبــارا
|
|
خوضـها
فـي
الحجى
كساها
التحجل
|
فـانبرت
مـن
مرابـط
العقل
ترفل
|
|
وجـــدت
كــل
عزهــا
بالتــذلل
|
ضــمر
تجعــل
الســويداء
مـن
ك
|
|
ل
ضـــمير
لركضـــها
مضـــمارا
|
|
هــنَّ
والعاديــات
جــرد
صـوافن
|
قـل
جعلـن
القلـوب
منـا
معـاطن
|
|
فــإذا
مـا
خطـرن
منهـا
ببـاطن
|
مــا
تعــثرن
بــالخواطر
لكــن
|
|
لخطوراتهـــا
أقـــل
العثــارا
|
|
وقعــت
فــي
سـما
العقـول
هلالا
|
كلمــا
أوقعـت
عليهـا
النعـالا
|
|
ترعـد
الأرض
بـل
تخـاف
اشـتعالا
|
وتمــور
الســماء
مـورا
إذا
لا
|
|
ح
كــــبرق
عنانهـــا
مَّـــوارا
|
|
كـالغواني
مـا
بين
تلك
المغاني
|
تتهــادى
لهــا
الصـهيل
أغـاني
|
|
محــرز
السـبق
كـم
بيـوم
رهـان
|
شــنَّ
غاراتهــا
لنهـب
المعـاني
|
|
فاقتناهـــا
كواعبــا
أبكــارا
|
|
جعــل
اللــه
صــدرنا
مشــروحا
|
بمتــون
أملــي
عليهــا
شـروحا
|
|
كــل
بــاب
منهـا
غـدا
مفتوحـا
|
مــن
فتوحـاته
اسـتفدنا
فتوحـا
|
|
تجعــل
العسـر
بالايـادي
يسـارا
|
|
بعمـــوم
أتـــى
بهــا
وخصــوص
|
فـــي
بنـــاء
مشـــيد
مرصــوص
|
|
كــل
ســفر
منهــا
بثبـت
نصـوص
|
فهـــو
لـــوح
نقـــوش
نصـــوص
|
|
أبــرزت
مــن
نصوصــها
الآثـارا
|
|
أســفرت
كـالنجوم
حيـن
اسـتهلت
|
فهــدت
ملــة
عــن
الرشـد
ضـلت
|
|
قـاب
قوسـين
مـن
سما
القرب
حلت
|
كــم
لــه
مــن
تنــزلات
تــدلت
|
|
فــترقت
بهــا
المعـالي
منـارا
|
|
طــوَّق
الخــافقين
طوقــا
مرصـع
|
بلآلــي
الآيــات
يزهــو
ويســطع
|
|
وعلـى
محـور
مـدى
الـدهر
أجمـع
|
دار
فـي
الكائنـات
من
دوره
الاع
|
|
لــى
نطــاق
فاســتوعب
الادوارا
|
|
ولغــــاب
بلا
رحــــاب
للبـــث
|
ولــو
كرمــا
فيـه
مـأوى
لمكـث
|
|
قــد
تمطــى
فصــال
صـولة
ليـث
|
وإلـــى
حيــث
لا
مكــان
لحيــث
|
|
بجنــاحي
عنقــاء
مغــرب
طـارا
|
|
فـي
زوايـا
فصـولها
كـم
خبايـا
|
هــو
منهــا
طلال
تلـك
الثنايـا
|
|
تلـك
يـا
مـن
بها
ملكت
السبايا
|
كتــــب
أم
كتـــائب
لســـرايا
|
|
هـا
المعـاني
الرقاق
صرن
أسارى
|
|
ملئت
طوســـها
لعمـــري
بـــريَّ
|
كافيـــات
عــن
كــل
جــام
رويَّ
|
|
قــم
فقــد
نســمت
بمســك
شـذي
|
نفحـــات
لهـــا
تضـــوع
بــريَّ
|
|
نفــح
النـدِّ
مـن
شـذاها
بخـارا
|
|
كـــم
تلا
فـــي
تــوجه
أســماء
|
فكســا
ختمــه
الوجــوه
ضــياء
|
|
واستفاضــت
مـن
كـل
وجـه
حيـاء
|
رشـــحات
رقــت
وراقــت
بهــاء
|
|
فاســـترقت
بلطفهـــا
أحــرارا
|
|
حضـرة
فـي
تبريزهـا
الشمس
تفضح
|
وببـذل
العرفـان
كـالبحر
تطفـح
|
|
هكــذا
لا
تــزال
تســمو
وتسـمح
|
كم
أفاضت
فيما
ورا
النهر
من
بح
|
|
ر
التجلـــي
فيوضـــه
أنهــارا
|
|
فـالق
الحـب
والنـوى
اللـه
خوَّل
|
ولــه
خالصــا
مــن
اللـب
نـوَّل
|
|
فلهـــذا
تفكهــا
أينمــا
حــل
|
جــاء
فيمــا
بقشـره
أعجـز
الأل
|
|
بــاب
حــتى
بــه
ظللـن
حيـارى
|
|
حــاله
كلــه
إلـى
الحـق
منهـى
|
مـا
علمنـا
مـن
بعضـها
قط
كنها
|
|
فــي
أمــور
كــثيرة
خـص
منهـا
|
ينكـر
المـرء
منـه
أمـرا
فينها
|
|
ه
نهـــاه
فينكـــر
الانكـــارا
|
|
دار
راح
التصــريف
مـن
راحـتيه
|
بعقــــول
زمامهــــا
بيـــديه
|
|
مـن
جميـع
الثغـور
فـي
حـالتيه
|
تنثنــي
عنــه
ثـم
تثنـى
عليـه
|
|
ألســن
تشــبه
الصــحاة
سـكارى
|
|
قيــم
دق
فــي
الفــرائض
بحثـا
|
ووصــيَّ
لـم
ينكـث
العهـد
نكثـا
|
|
مـن
تـراث
لـم
يـرض
نصفا
وثلثا
|
ورث
الانبيــاء
والرســل
ارثــا
|
|
منـه
مـا
أعطـى
الـورى
معشـارا
|
|
خـــاتم
فصـــه
بـــأبهى
حلــيَّ
|
رســـمته
العليــا
بخــط
جلــيٍّ
|
|
لقيـــام
المهــدي
تجــل
علــيَّ
|
بعــده
قــط
مــا
تــرى
لــولي
|
|
فــي
المقــام
المحمـديَّ
قـرارا
|
|
علـــم
مفـــرد
برفــع
منــادى
|
ومريــدا
أضــحى
فأمسـى
مـرادا
|
|
تــرك
الكــون
والفسـاد
فسـادا
|
وإلـى
غيـب
الغيـب
جـاز
فنـادى
|
|
يـا
جميـل
الستراسـبل
الاسـتارا
|
|
إنـــه
والـــذي
دنــا
فتــدلى
|
ذات
عشــق
تقــوم
بـالعرش
حملا
|
|
مــن
هيــولاه
قــد
تصـوَّر
شـكلا
|
حامـل
الرفـرف
الـذي
حمـل
الله
|
|
عليــــه
حـــبيبه
المختـــارا
|
|
نــال
كــل
الغنـى
فمـا
أغنـاه
|
عـن
وجـود
فـي
اللـه
قـد
أفناه
|
|
ذاك
عبـــد
إلــى
غنــى
مــولاه
|
فقـــره
تـــمَّ
فاســتتم
غنــاه
|
|
عــن
ســواه
فلا
يخـاف
افتقـارا
|
|
فرضـــه
والمســنون
أدَّى
ووفــى
|
واســتحب
المنــدوب
حـتى
تصـفى
|
|
خــص
مـن
واجـب
الوجـود
بزلفـى
|
ومــن
اللـه
بالنوافـل
كـم
فـا
|
|
ز
بقـــرب
فاســتوجب
الانظــارا
|
|
حـــرم
للتوحيـــد
عــز
حمــاه
|
إذ
مـن
الغيـر
والسـوى
قد
حماه
|
|
فهــو
دامــت
عيـن
العلا
ترعـاه
|
مـا
لنفـي
السـوى
اسـتعد
سـواه
|
|
لا
ولا
غيـــره
نفـــى
الاغيــارا
|
|
جـــامع
للكيـــان
جــزءا
وكلا
|
كــل
فــرد
منهــا
بــه
يتجلـى
|
|
وعليهــا
منــه
لــك
اللـه
دلا
|
هيكـل
فـي
ناسـوته
اختصـر
الله
|
|
جميـــع
المكوَّنـــات
اختصــارا
|
|
بـــال
للهـــدى
لـــه
وثبــات
|
وعلـــى
الحــق
وقفــة
وثبــات
|
|
ظــــاهرات
وتـــارة
مضـــمرات
|
خلـــوات
مــن
بعــدها
جلــوات
|
|
علمتـــه
الاظهـــار
والاضــمارا
|
|
عــالم
الــذرَّ
إذ
أجـاب
بسـرعه
|
ملقيـا
نحـو
دعـوة
الـرب
سـمعه
|
|
ذلــك
الحـبر
شـرَّف
اللـه
وضـعه
|
نقطـة
البـاء
من
بلى
كان
في
عه
|
|
د
ألســــت
فأيـــد
الاقـــرارا
|
|
كعبــة
الــبيت
قــابلته
بليـن
|
إذ
رأتـــه
لهــا
أجــلَّ
قريــن
|
|
ذلـك
الركـن
ذو
المقـام
المكين
|
ألمنــادي
يـا
قبلـتي
قـابليني
|
|
بســـجود
فقـــابلته
اختيــارا
|
|
لجـــة
بعــد
لجــة
خــاض
ليلا
|
ونهــارا
تســيل
بالسـفح
سـيلا
|
|
طافــح
الشــطح
ليـس
يرقـب
إلا
|
لجـج
الاسـتغراق
فـي
لي
مع
الله
|
|
تعــالى
كـم
خـاض
منهـا
غمـارا
|
|
ســـاحة
العفــو
للخلائق
أفســح
|
وهــي
أنجــى
للعـالمين
وأنجـح
|
|
مـا
تـرى
مـن
لنـا
المحجة
أوضح
|
كـم
أرانـا
مـن
وسع
دائرة
الرح
|
|
مــة
مــن
فيـه
أطمـع
الكفـارا
|
|
كــل
مــا
لا
يــراه
بيـن
يـديه
|
حاضــرا
يطلــب
الحضــور
لـديه
|
|
مرجــع
الكــل
إن
نظــرت
إليـه
|
هـــو
قطــب
للعــارفين
عليــه
|
|
فلــك
العــارفين
بــالله
دارا
|
|
عنـه
سـل
صـدر
الـدين
كيف
شفاه
|
حيــن
وصــى
اسـحق
أعنـى
أبـاه
|
|
ذاك
للملــة
الحنيفــة
يـا
هـو
|
شـــيخها
الاكـــبر
الــذي
بعلاه
|
|
قـد
علا
صـدرها
الكـبير
الكبارا
|
|
حيـث
ربـاه
وهـو
قـد
كـان
طفلا
|
برشـــاد
فــأوتى
الحكــم
كهلا
|
|
إن
مــن
يقلــب
الحقــائق
فعلا
|
كـان
قلبـا
للصـدر
والصدر
لولا
|
|
ذلـك
القلـب
مـا
حـوى
الاسـرارا
|
|
صــادر
الــواردات
حيـن
تقاضـت
|
دينهـــا
واســتباحها
فتراضــت
|
|
غرقــت
فــي
تيـاره
حيـن
خاضـت
|
كـم
علـى
قلـب
ذلـك
الصدر
فاضت
|
|
واردات
لا
تعــــرف
الاصــــدارا
|
|
خيـر
عصـر
مـا
فيـه
للـراح
عصر
|
كعـروس
تجلـى
لهـا
العقـل
مهـر
|
|
والــذي
زفهــا
لنـا
وهـي
بكـر
|
هـو
شـيخ
الحان
الذي
اعتصرت
رو
|
|
ح
المعـاني
فـي
راحتيه
اعتصارا
|
|
صـاح
هـذي
الخمر
التي
قيل
عنها
|
انهــا
تــأمر
العقــول
وتنهـى
|
|
ان
مـن
فـي
أذى
القذى
لم
يشنها
|
فـي
أوانـي
الحـروف
أفـرغ
منها
|
|
خندريســـا
مروَّقـــا
وعقـــارا
|
|
طبعتـــه
يــد
التصــرف
طبعــا
|
قابــل
الانفعــال
ذاتـا
وطبعـا
|
|
مـذهب
فـي
التلوين
لم
يبق
نوعا
|
حـاز
فرقـا
مـن
بعـد
جمع
وجمعا
|
|
بعــد
فــرق
فاسـتجمع
الاطـوارا
|
|
لجنــى
ســدرة
المنـى
مـدَّ
كفـا
|
يــترجى
طــوبى
لـه
منـه
قطفـا
|
|
وعليــه
الرضــوان
ينفـح
عرفـا
|
فـي
جنـان
التوحيـد
سـرَّح
طرفـا
|
|
فـاجتنى
مـن
أنوارهـا
النـوَّارا
|
|
بقــدامى
الاقــدام
لــم
يتـأخر
|
طـار
يبغـي
من
حضرة
القدس
محضر
|
|
أجــدل
فوققنــة
العــرش
وكــر
|
ولـه
البـاز
للمطـار
مـن
الفـر
|
|
ش
إلـى
العـرش
كـم
خـواف
أعارا
|
|
جبـــل
راســـخ
يفــاخر
يــذبل
|
ولـــواء
جلالـــه
فـــي
تأثــل
|
|
ذاك
شـيخ
الكـل
المحكم
في
الكل
|
علـم
الشـرق
مظهـر
الحـق
رب
ال
|
|
فتــق
والرتــق
قـوَّة
واقتـدارا
|
|
كاليمـــاني
بصـــدره
مســـتقرَّ
|
لجميــع
الاسـرار
مـا
فيـه
ذكـر
|
|
بشـــباه
والامـــر
للــه
أمــر
|
قــدَّس
اللــه
ســره
فهــو
ســر
|
|
بمعــــانيه
قـــدَّس
الاســـرارا
|
|
فــاخر
العـرب
فيـه
حيـا
فحيـا
|
جــدَّه
حيــث
طــاب
ميتـا
وحيـا
|
|
فكســا
الفخــر
حاتمــا
وعـديا
|
حــاتمي
النجــار
أكســب
طيــا
|
|
فــوق
ذاك
النجـار
منـه
نجـارا
|
|
بفنــا
هالــة
المريـدين
مبـدر
|
وبــوجه
الســفار
للــه
مســفر
|
|
لـم
يكلـف
بالخسـف
لا
زال
مقمـر
|
بـدر
تـمَّ
قـد
سـار
في
فلك
العر
|
|
فــان
ســيرا
ولا
يخــاف
سـرارا
|
|
أصــبحت
حالكـات
تلـك
الليـالي
|
مشـــرقات
بنـــوره
المتلالـــي
|
|
فلــك
واســع
المســاحة
عــالي
|
ضـاق
ذرعـا
عنـه
ذراع
المعـالي
|
|
فكســاه
مــن
المعــاني
سـوارا
|
|
هبنـي
بالشـعر
في
المحافل
أصدع
|
وبنظمــي
كــل
الفــرائد
أجمـع
|
|
ومقـامي
فـي
النعـت
للاوج
يرفـع
|
أترانــي
هيهــات
أدرك
مـن
نـع
|
|
ت
علا
ذلــك
المقــام
القصــارى
|
|
كـل
فكـري
عـن
درك
بعـض
مزايـا
|
حضــرة
ربهــا
أبــرَّ
البرايــا
|
|
هــو
بحــر
وذي
نعــوتي
ركايـا
|
كيـــف
يســتوعب
الكلام
ســجايا
|
|
ه
وهـل
ينـزح
الركـاء
البحـارا
|
|
كــل
ليــل
أصــبو
وكــل
نهـار
|
لمــزار
أعظــم
بــه
مـن
مـزار
|
|
وأفــدي
مــا
سـار
للشـام
سـار
|
بـــأبي
ثاويــا
بــذات
قــرار
|
|
منعــت
سـاكن
العـراق
القـرارا
|
|
أيهـا
المشـتكي
مـن
الوزر
ثقلا
|
زره
إن
رمـــت
أن
تخفـــف
حملا
|
|
وبأعتـــاب
بـــابه
حـــط
رحلا
|
كــل
مـن
زار
قـبره
خفـف
اللـه
|
|
تعـــالى
عـــن
ظهــره
الاوزارا
|
|
بـــــاذخ
طأطـــــأ
العلا
لعلاه
|
ملجــأ
الكائنــات
تحــت
لـواه
|
|
مــدَّ
ظلا
ضــافي
الاديــم
تــراه
|
كــم
حمــى
نــازلا
بكهـف
حمـاه
|
|
مسـتجيرا
بـه
إذا
الـدهر
جـارا
|
|
وكــأين
مــن
ســيد
صـار
عبـدا
|
لأيــاد
لــه
مــن
البحـر
أنـدى
|
|
جــاء
مســترفدا
فــأولاه
رفـدا
|
كعلــي
الرضـا
الـوزير
المفـدى
|
|
بكبــار
الملــوك
كســرى
ودارا
|
|
آصــفي
التـدبير
مـن
لـم
يهنـه
|
جلبــه
للاعتــاب
بـل
لـم
يشـنه
|
|
مــع
أن
التســخير
يؤخــذ
عنـه
|
جـــذبته
لســفح
قيســون
منــه
|
|
جـذابات
تـدعو
البـدار
البدارا
|
|
حــرف
جــرَّ
شـم
العرانيـن
قـرِّت
|
بعلا
ذروة
لـــــه
واســـــتقرت
|
|
وإليهـا
مـن
جسـمنا
الـروح
فرَّت
|
كمــن
المغنــاطيس
فيهـا
فجـرَّت
|
|
ملكـــا
قــاد
عســكرا
جــرارا
|
|
جبــل
هــائل
المهابــة
راســي
|
جـاز
فـي
الارتفـاع
حـد
القيـاس
|
|
ذو
وقـار
لـو
وازنتـه
الرواسـي
|
مــا
لـه
فـي
جلالـه
مـن
مواسـي
|
|
طــاش
ميزانهــا
وخفــت
عيـارا
|
|
كفــه
مــن
هواطـل
السـحب
أروى
|
وحمــاه
كهــف
الطريــد
ومـأوى
|
|
فــاق
كـل
الصـدور
سـرا
ونجـوى
|
ذلـك
أسـخى
الملـوك
كفـا
وأقوى
|
|
جلــدا
منهمــو
وأحمــى
ذمـارا
|
|
حيــدر
للابطــال
يكفــي
ويكفـل
|
وحســام
غــراره
قــط
مــا
فـل
|
|
فــي
علاه
مهمـا
تشـا
أبـدا
قـل
|
أسـد
اللـه
غيرة
الله
سيف
الله
|
|
يــبرى
بــذي
الفقـار
الفقـارا
|
|
شــرَّف
الخــافقين
شـرقا
وغربـا
|
فــتراآى
أمضـى
البـواتر
غربـا
|
|
وعلــى
الفرقـتين
عجمـا
وعربـا
|
شــهرته
أيــدي
المهيمـن
عضـبا
|
|
فغــدا
أعظـم
السـيوف
اشـتهارا
|
|
راكــب
الهـائلات
فـي
يـوم
ذعـر
|
ســالك
الموحشـات
مـن
كـل
قفـر
|
|
والخطيـــر
الــذر
بكــرَّ
وفــر
|
يمتطـــي
عزمــه
عظــائم
أمــر
|
|
وخطيــر
مــن
يركــب
الاخطــارا
|
|
خـــاطبته
أم
العلا
عــن
تــراض
|
أمـرك
الامـر
فـاقض
مـا
أنت
قاض
|
|
يـا
لعمـرو
مـن
صائب
الفكر
ماض
|
فـي
الملمـات
يستشـير
المواضـي
|
|
ومصــيب
مـن
للمواضـي
استشـارا
|
|
هــو
يــوم
الصـدام
عنـتر
عبـس
|
وبزهــد
الحطــام
مثــل
أويــس
|
|
ولــدى
الانتقـام
مـن
غيـر
لبـس
|
طــرد
حلـم
فلـو
رآه
ابـن
قيـس
|
|
لغــدا
أحنـف
الحلـوم
اضـطرارا
|
|
ليـــس
إلا
فــي
مــاله
تفريــط
|
وعـــن
الجــود
مــاله
تثــبيط
|
|
كفـــه
وافــر
العطــاء
بســيط
|
بحــر
جــود
بالمكرمــات
محيـط
|
|
كــم
وردنــا
عبــابه
الزخـارا
|
|
فصــدرنا
والكــل
أوقــر
صـدرا
|
مـــن
لآل
بهـــا
نقلــد
نحــرا
|
|
ونثرنــا
مــراود
الفكـر
نـثرا
|
فحبانـــا
درَّا
نظمنــاه
شــعرا
|
|
بعلـــي
الرضـــا
علا
مقـــدارا
|
|
شــرَّف
اللــه
أهــل
جلـق
إذ
أو
|
دع
فيهــم
مــن
علا
لـذرى
الجـو
|
|
أو
بــدعا
ونحـن
أولـى
بـه
لـو
|
شــرَّفتنا
ألوكــة
لحمــى
الـزو
|
|
راء
وافــت
تيهــا
تجـرَّ
الازارا
|
|
كــل
نبــض
بأنمـل
اللطـف
جسـت
|
وبأشـــجان
كـــل
قلــب
أحســت
|
|
كســيت
حلــة
الجمــال
وأكســت
|
لـو
رأتهـا
عيـن
الفـرزدق
أنست
|
|
ه
علــى
حبــه
الشــديد
نـوارا
|
|
تلــك
عفــراء
عـروة
بـن
خـزام
|
وبصــدق
المقــال
مثــل
حــذام
|
|
فهـــي
معصــومة
بنفــس
عصــام
|
بنـــت
فكـــر
تقلــدت
بنظــام
|
|
فاســتقلت
زهـر
النجـوم
نثـارا
|
|
تســـتمد
الآراء
مـــن
معناهــا
|
بيــد
الفكــر
زئبقــا
لمراهـا
|
|
سـل
قـروح
الصـور
عـن
مومياهـا
|
تلــك
اكســير
جــابر
كيمياهـا
|
|
جــبرت
مــن
قلوبنـا
الانكسـارا
|
|
صــعدت
كلمــا
تصــوَّب
فــي
صـح
|
ن
فـؤادي
مـن
السـقام
وقـد
صـح
|
|
وبعيـن
الرضـا
لـك
الحـال
نشرح
|
كـم
لمحنـا
من
نور
كبريتها
الاح
|
|
مـر
مـا
زادنـا
بهـا
استبصـارا
|
|
فـي
جيـوب
الجنـوب
مـن
لك
الري
|
لحيـاة
القلـوب
قـد
أودعـت
مـي
|
|
فشـممنا
ما
ينعش
الميت
في
الحي
|
ونشـقنا
مـن
مسـكها
الاذفر
الفي
|
|
يــاح
فــي
طيبـه
شـذى
معطـارا
|
|
فتنقـــل
بهــا
فغــن
التنقــل
|
بالــذي
يشــرب
الســلافة
يجمـل
|
|
ذكرهــا
بـاللهى
إذا
مـرَّ
يعسـل
|
شــقه
شــقت
المــرائر
فـي
حـل
|
|
و
أداهـــا
إذ
كرَّرتــه
مــرارا
|
|
ومـن
العتـب
كـم
أذابـت
جمـودا
|
مــن
فــؤاد
ولـو
حكـى
جلمـودا
|
|
وبلطــف
إذ
لــم
نــوف
وعــودا
|
ذكرتنــا
ومــا
نســينا
عهـودا
|
|
فـــإذابت
قلوبنـــا
تـــذكارا
|
|
بعكــاظ
الوفــاء
رمنـا
لحوقـا
|
وإليهــا
ســاق
المشـوق
مشـوقا
|
|
كــي
نــؤدَّي
مـن
الـولاء
حقوقـا
|
فأقامنــا
لمقعـد
العـذر
سـوقا
|
|
قــام
صـدق
الـولا
بهـا
سمسـارا
|
|
مـن
لنـا
فـي
نـزول
حضـرة
قـدس
|
عنــد
نفــس
فــداؤها
كـل
نفـس
|
|
لننــادي
فــي
كــل
مطلـع
شـمس
|
علــوي
العرفـان
يـا
مـن
بحـدس
|
|
لـم
يـزده
كشـف
الغطاء
اختبارا
|
|
قـد
نظمنـا
الثنـا
عليـك
بسـمط
|
وربطنــا
عقــد
الــولا
أيَّ
ربـط
|
|
وجعلنــا
الوفــا
جــزاء
لشـرط
|
منـك
بعـد
الرضـا
رمينـا
بسـخط
|
|
ان
لبــس
غيــر
الوفـاء
شـعارا
|
|
وهــدينا
إلــى
الضــلال
وتيــه
|
كبنــي
اســرائيل
فـي
التشـبيه
|
|
ودهينــا
بعــوق
مــا
نبتغيــه
|
وابتلينـا
بفـوق
مـا
نحـن
فيـه
|
|
ان
خلعنـا
سـوى
الجفـاء
وثـارا
|
|
أو
حللنـا
دارا
سـواك
بهـا
حـل
|
أو
سـألنا
شـيئا
ومـن
ضـل
يسأل
|
|
أو
وردنـا
حاشـا
أياديـك
منهـل
|
أو
حضـرنا
مـن
بعـد
حضرتك
العل
|
|
يــاء
مغنــى
أو
اتخـذناه
دارا
|
|
بابهــــا
بــــاب
حطـــة
بعلاه
|
حازمــا
جــاز
فيــه
كـل
منـاه
|
|
أنـت
يـا
مـن
رضـا
الالـه
رضـاه
|
لســـوى
بابـــك
العلـــيَّ
ذراه
|
|
ربمــا
أورث
الحضــور
احتضـارا
|
|
كنـت
بالشـعر
قد
أهنت
ابن
هاني
|
وصــرعت
بــه
صــريح
الغــواني
|
|
وأنــا
اليــوم
تعلمـون
بشـاني
|
بـان
فكـري
عـن
ابتكار
المعاني
|
|
يـوم
بنتـم
ومنبـع
الشـعر
غارا
|
|
حيــث
غبتـم
عنـي
وأنتـم
بـدور
|
غبـت
عنـي
بكـم
فمـا
لـي
حضورض
|
|
زال
عــن
خــاطري
لمعنـى
خطـور
|
ليـت
شـعري
مـن
ضـل
عنـه
شـعور
|
|
كيــف
يقـوى
ان
ينشـد
الاشـعارا
|
|
وهــو
مـن
يـوم
هجركـم
بغـداذا
|
تــرك
النظــم
والقريـض
جـذاذا
|
|
مـا
دعتنـي
نفسـي
وتـدعو
لماذا
|
غيــر
ان
الأمــر
المطـاع
لهـذا
|
|
قــد
دعـاني
لمـا
أتـى
تكـرارا
|
|
فتقــــدَّمت
للثنــــا
أتعـــرَّض
|
ويراعــى
مــن
روعــه
يتقضــقض
|
|
وتقحمـــت
مــن
أســامة
مربــض
|
فتجشــمت
أنظـم
المـدح
فـي
حـض
|
|
رة
مـولى
منـه
اكتسـبت
الفخارا
|
|
هــو
كنـز
للعـز
ان
رمـت
كنـزا
|
وهـو
حـرز
للمجـد
ان
شـئت
حرزا
|
|
فـزت
فينظـم
مـدح
عليـاء
فـوزا
|
دام
عــزا
لمــن
يحــاول
عــزا
|
|
ووقــارا
لمــن
يــروم
وقــارا
|
|
هكــذا
لايــزال
يهــديه
نظمــا
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وهـو
يـولي
نـثرا
من
المال
جما
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ليــراه
للحمــد
بــدأ
وختمــا
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مـا
همـي
بالـدموع
طـرف
ومهمـا
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شـام
برقـا
مـن
الشـآم
استنارا
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