|
كلمــا
جــدَّدَ
الشــجيُّ
ادِّكـارَهْ
|
أزعـج
الشـوق
قلبـه
واسـتطارَهْ
|
|
ليـت
شـعري
أَين
استقل
عن
الله
|
و
بنــوه
وكيـف
أَخلـوا
مـزاره
|
|
بعــدما
راوحتهـمُ
صـفوةُ
العـي
|
شِ
وقـالوا
طـوعَ
الهـوى
أَوطاره
|
|
وجـروا
فـي
مطـارد
الأنـس
طلقاً
|
واجتلـوا
مـن
زمـانهم
أَبكـارهْ
|
|
بيـــن
كــأسٍ
وروضــةٍ
وغــدير
|
وســــماعٍ
ولــــذةٍ
وغضـــاره
|
|
أَيــن
حلــوا
فمعشــبٌ
ومقيــلٌ
|
أَو
أَنــاخوا
فــوردةٌ
وبهــاره
|
|
مـن
مليـكٍ
زَفَّـتْ
بحضـرته
الكـأ
|
سَ
قيـانٌ
يعزِفـن
خلـفَ
السـتاره
|
|
ووزيـرٍ
قـد
بـات
يسـترق
اللذا
|
تِ
وهنــا
والليــلُ
مـرخٍ
إِزاره
|
|
وأميــــرٍ
ممنطـــقٍ
بنـــداما
|
ه
وكــأس
الطِّلا
لــديهم
مُـداره
|
|
كـم
فـتى
مـن
بنـي
أميـة
أمسى
|
وخيــولُ
الهــوى
بـه
مسـتطاره
|
|
كيزيــدٍ
وشــأنه
مـع
أبـي
قـي
|
سٍ
ومــا
قـد
عـراه
فـي
عَمّـاره
|
|
ونــداماه
كــابن
جعــدة
والأخ
|
طــل
إِذ
عـاقراه
صـفواً
عقـاره
|
|
وقضــى
ليلــه
مـع
ابـن
زيـادٍ
|
وقــتيب
بــن
مســلمٍ
ونهــارهْ
|
|
وكمــروان
وابنــه
حيـن
واسـى
|
بلــــذاذات
عيشـــه
ســـُمّاره
|
|
نــادمته
أبنــاء
ياليـة
اللا
|
ئي
قضــى
فـي
ربـوعهم
أسـحاره
|
|
وكمثـل
الوليد
ذي
القصف
إذ
كا
|
نَ
يغــب
اصــطباحه
وابتكــاره
|
|
ولــديه
الغَرِيــض
وابـن
سـُرَيْجٍ
|
أُظهــرا
كــل
صــنعةٍ
مختــاره
|
|
مـن
غنـاءٍ
أَلـذ
مـن
نشوة
الكأ
|
س
وأشــهى
مـن
صـبوةٍ
مسـتثاره
|
|
وســليمان
ذي
الفنــوة
إِذ
كـا
|
ن
لنحـو
الذلفاء
يبدي
افترارهْ
|
|
ويزيــد
بــن
خالــدٍ
وأبـو
زي
|
دٍ
نــــديمان
يشـــفيان
أُواره
|
|
بحـديثٍ
يسـتعجل
الـراح
بـالرا
|
ح
ويحتـــث
أنجمـــاً
ســـيَّاره
|
|
إِذ
بمغنــى
سـنان
كـان
يغـالي
|
ويجلِّــــي
يشـــدوه
أكـــداره
|
|
وابن
عبد
العزيز
إِذ
راوح
الكأ
|
س
ووالاه
فــي
زمــان
الإِمــاره
|
|
ويزيــد
المعمــود
إِذ
خـامرته
|
نشــوة
الــراح
ليلـه
ونهـاره
|
|
وســبت
لبــه
حُبابــة
واســته
|
وتـه
حـتى
أبـاح
فيها
اشتهاره
|
|
واســتمالت
بــه
ســَلامة
حــتى
|
أقلــق
الوجــد
فكـره
وأثـاره
|
|
إِذ
ينـاجيه
لحـن
مَعْبَـد
بالشـج
|
و
كمـــا
شــاء
معملاً
أوتــارهْ
|
|
ولكــم
أَلَّــف
الغنــاء
لــديه
|
ضـــرب
عــوَّادةٍ
علــى
زمَّــاره
|
|
وهشــامٍ
إِذ
اســتبد
اختيــاراً
|
بالرســاطون
واسـتلذ
اختيـاره
|
|
مـن
شـرابٍ
ظلـت
أَفـاويه
العـط
|
ر
بـــه
ذات
نفحـــةٍ
ســـيَّاره
|
|
والوليـد
المليك
إِذ
واصل
الكا
|
سـات
واللهـو
جهـده
واقتـداره
|
|
واغتــدى
فــي
تهتــكٍ
ومجــونٍ
|
كــان
يجنــي
قطــوفه
وثمـاره
|
|
ومنــاه
ذكــرى
ســليمى
لوجـدٍ
|
ظــل
يــذكي
لهيبـه
واسـتعاره
|
|
إِذ
يغنيـه
مالـكُ
بـن
أبي
السم
|
ح
وعمـرو
الـوادي
فينفي
وقاره
|
|
ولكـم
خفـف
ابـن
عائشـة
اللـح
|
ن
لـــه
فاســتخفه
واســتطارهْ
|
|
وابـن
ميَّـادة
بـن
أبـرد
والقا
|
ســم
كانــا
يحثحثــان
عقـاره
|
|
بنــدامٍ
ألــذ
مــن
زورة
الـحِ
|
بِّ
وأبهـى
مـن
روضـةٍ
فـي
قراره
|
|
وبُذَيْـــحٌ
أتــى
بــأمر
عجــاب
|
إِذ
تـولى
علـى
القـرود
الإِماره
|
|
ويزيـد
المليـك
إِذ
كـان
يهـوى
|
صـوت
حـدو
الحـداة
في
كل
تاره
|
|
وتغنـى
الركبـان
مـذ
كان
منشا
|
ه
البوادي
حتى
اعترته
الحضاره
|
|
وكمــروان
ذي
الفتــوة
إِذ
كـا
|
ن
يــوالي
فــي
غبطـة
أسـفاره
|
|
فيـرى
اللهلـو
والسـماع
منـاه
|
ويــرى
الحــرب
قطبـه
ومـداره
|
|
وكـآل
العبـاس
إِذ
كان
عبد
الل
|
ه
يقضــي
طـوع
المنـى
أَوطـارهْ
|
|
كـم
غـدا
ليلـة
الثلاثاء
والسب
|
ت
يــوالي
الغبـوق
بالقرقـاره
|
|
وابـن
صفوان
في
الندامى
يعاطي
|
ه
كـؤوس
الحـديث
خلـف
الستاره
|
|
ولــديهم
أبــو
دلامــة
طــوراً
|
يصـــطفيه
ويجتلـــي
أشــعاره
|
|
وتحسـَّى
منصـورهم
من
وراء
النس
|
ك
راحـاً
والـى
عليهـا
استتاره
|
|
حـل
منـه
ابـن
جعفـرٍ
في
نداما
|
ه
محلاًّ
إِذ
كـان
يبلـو
اعتشـاره
|
|
فيــراه
فيهــم
ظريفـاً
أديبـاً
|
لســناً
حاذقــاً
لطيـف
الإِشـاره
|
|
ثــم
كــان
المهـديُّ
يجلـس
للأن
|
س
فيصـــفي
لشـــربه
أوطــاره
|
|
وفُلَيْــح
العـوراء
يشـدو
لـديه
|
فيســـنِّي
حنينـــه
وادكـــارهْ
|
|
ولــديه
تـرب
الغنـاء
أبـو
إِس
|
حــق
يشــدو
بصــنعةٍ
ومهــاره
|
|
ثـم
كان
الهادي
إِذا
حاول
الشر
|
ب
وغنــى
ابــن
جـامعٍ
مختـاره
|
|
يتـولّى
النِّـدام
عيسـى
بـن
دأبٍ
|
بكــؤوسٍ
مــن
الحــديث
مُـداره
|
|
ويفيـض
ابـن
مُصـْعَبٍ
في
نثير
ال
|
قـول
مـن
حيـث
ينتقـي
أبكـاره
|
|
وتحسـَّى
الرشـيد
فـي
ديـر
مُـرَّا
|
ن
علــى
كــل
تلعــةٍ
وقــراره
|
|
مـن
مـدامٍ
حكـتْ
رهابنـةُ
الـدي
|
ر
بهــا
فــي
بهــارةٍ
جُلّنـاره
|
|
وعلــى
ضـرب
زَلْـزَلٍ
كـان
برصـو
|
مــا
لــديه
مواصــلاّ
مزمــاره
|
|
ثـم
كـان
الأميـن
يمـرح
من
لذا
|
تـــه
فـــي
أَعِنَّـــةٍ
مَـــوّارهْ
|
|
إِذ
ترامــى
بحــب
كــوثر
حـتى
|
ســكن
الحــب
قلبـه
واسـتخاره
|
|
ولــديه
مُخــارقٌ
فــي
المغنـي
|
ن
وبَــذْل
الكــبيرة
المهتـاره
|
|
والحسـين
الخليـع
ينـثر
عقـداً
|
مـن
نـدامٍ
يشـف
تحـت
العبـاره
|
|
ويــزف
ابــن
هـانيءٍ
للفكاهـا
|
ت
كؤوسـاً
مـن
الهـوى
مسـتعاره
|
|
وأدار
المـــأمون
أكــواب
راحٍ
|
شعشـع
القصـر
نورُهـا
واستناره
|
|
حيــث
علويــة
المغنــي
واسـح
|
ق
يزفــان
فـي
الـدجى
أَقمـاره
|
|
حيــث
يحيـى
بـن
أَكثـمٍ
يتـولى
|
بســطه
وابــن
طــاهرٍ
أسـمارهْ
|
|
وعُرَيْــبٌ
مــع
القيــان
تغنــي
|
ه
بصـــوتٍ
تخيـــرتْ
أشـــعاره
|
|
وابـن
هـرون
كـان
يـألف
إِبـرا
|
هيــم
شـوقاً
ويسـتلذ
اعتشـاره
|
|
واغتدى
الواثق
المقدَّم
في
الشع
|
ر
علـــى
الكــأس
معملاً
أدواره
|
|
إِذ
تــولى
بــأمره
مهـج
الخـا
|
دم
عنـــد
اصــطباحه
إِســكاره
|
|
واغتـدى
أحمـد
النـديم
على
شر
|
ط
بنـي
اللهـو
ناشـراً
أخبـاره
|
|
وانثنـى
الفتح
ينتحي
من
أحادي
|
ث
الهــوى
ممتعــاته
وقصــاره
|
|
فتنتـــه
فريــدةٌ
وعلــى
قــد
|
ر
الهـوى
يخلـع
المحـب
وقـارهْ
|
|
وأبو
الفضل
كان
يغدو
على
الرا
|
ح
مبيـــدا
لُجَيْنـــه
ونُضــَاره
|
|
حيـث
كـان
الكشحيّ
يأخذ
عرض
ال
|
قــول
فيمــا
أحبــه
واختـاره
|
|
وزُنــامٌ
بــالزمر
يعـزف
طـوراً
|
وبنــانٌ
بــالعود
تضـرب
تـاره
|
|
ويغنـي
عمـرو
بـن
بانـة
والطب
|
ل
عليـه
سـلمان
يبـدي
اقتداره
|
|
وأبــو
جعفــرٍ
أزاح
اغتنامــاً
|
مــعْ
يزيـد
المهلـبي
اسـتتاره
|
|
وغــدا
المسـتعين
يحـرق
للنـد
|
مــان
بــالمن
نــده
وصــُواره
|
|
ثـم
هـام
المعـتز
بـابن
بُغـاءٍ
|
عنــدما
شــام
وجهــه
وعـذارهْ
|
|
وانثنـى
ابن
القصَّار
طوراً
يغني
|
ه
يحـــذقٍ
مرقصـــاً
طنبـــاره
|
|
فينـــاجيه
بــالهوى
وينــاغي
|
ه
ويــذكي
بيـن
الأضـالع
نـاره
|
|
وبـدا
المهتدي
فكان
اصطناع
ال
|
عــرف
والجــود
سـمته
وشـعاره
|
|
وأنـاخ
ابـن
جعفـرٍ
في
مدار
ال
|
قصــف
والعـزف
نافيـاً
أكـداره
|
|
ومنـاه
فـي
الشـدو
شـدو
غريـب
|
كلمـا
اعتـاده
الهوى
واستثاره
|
|
واحتسـى
دَرَّة
الكروم
أبو
العبا
|
س
والـــدَّجْنُ
يســـتدر
قُطــاره
|
|
نـادمته
أبنـاء
حمـدون
واسـته
|
واه
بـدرٌ
حيـن
اجتلـى
إِبـداره
|
|
ورَذاذٌ
موقِّــــــعٌ
بغنــــــاءٍ
|
ينتحيـــه
بصـــنعةٍ
مختـــاره
|
|
واغتـدى
المكتفـيُّ
يمـرح
والصُّو
|
لــيُّ
يــروي
بربعــه
أشــعارهْ
|
|
وأبـو
الفضـل
كـان
يرتع
من
رو
|
ق
صــباه
فــي
جــدَّةٍ
ونضــاره
|
|
حـرق
الند
والكبا
الرطب
والعن
|
بــر
مســتمتعاً
وعـاف
ادخـاره
|
|
وأقـام
الراضـي
يفـرق
مـا
بـي
|
ن
النـدامى
فـي
كـل
وقت
نثاره
|
|
رب
كــأسٍ
لــه
بقبــة
شـاذِكْلا
|
وفـــي
حجــرة
الرخــام
أداره
|
|
ونعيــمٍ
والاه
فــي
حجــرة
الأُتْ
|
رُجِّ
والمــاء
قـد
أثـار
بخـاره
|
|
ليـت
شـعري
أيـن
استقل
بنو
بر
|
مـك
مـن
بعد
ما
تولوا
الوزاره
|
|
حيـن
كـانت
أيـامهم
غـرر
العي
|
ش
وكـــانت
أَكفهـــم
مــدراره
|
|
والــوزير
المهلــبي
ومـا
نُـوِّ
|
ل
وابـن
العميـد
تـرب
الصداره
|
|
وكـذا
الصـاحب
بـن
عبَّـاد
حيَّـا
|
ه
وحيـــا
نظـــامه
ونثـــاره
|
|
بـل
وأيـن
السـراة
من
آل
حمدا
|
ن
ومـا
قـد
تخولـوا
في
الإَمارهْ
|
|
أيـن
أهـل
العـراق
والفرس
ممن
|
رفهـوا
عيشـهم
وخاضـوا
عَمـاره
|
|
أيـن
مـن
بات
رافعاً
لبني
الله
|
و
الملميــن
بالتحايـا
عمـاره
|
|
أيـن
مـن
راح
والمجاسـد
تـزدا
|
ن
عليـــه
بـــأعين
النظَّــاره
|
|
طـــوقته
المخــانق
البرميــا
|
ت
فكـانت
بيـن
الظـراف
شـعاره
|
|
وتـردتْ
منـه
العواتـق
بالمندي
|
ل
مـــذ
راح
عاقـــداً
زنــاره
|
|
توجـــوا
رأســـه
بإِكليــل
آسٍ
|
وأنـــاطوا
بجيـــده
تِقْصــاره
|
|
وعلــى
الأذن
منـه
ريحانـة
مـن
|
أَذْرُيــونٍ
كمــن
يــروم
سـراره
|
|
أيـن
مـن
كان
جانبُ
الزهو
مينا
|
سـاً
لـديه
والعيـش
يندى
غضاره
|
|
ينتحـي
مُنْتَحَـى
المـروءات
طلقاً
|
فـي
لـذاذاته
ويبـدي
افـتراره
|
|
وتــرى
عنــده
مزمَّلــة
المــا
|
ء
وخيـش
النسـيم
يعلـو
جـداره
|
|
وســحاب
البخــور
يهطــل
منـه
|
مـاء
ورد
يزجـي
النسـيمُ
قطاره
|
|
أيـن
مـن
كـان
فـي
فضاء
من
ال
|
غوطـة
قـدماً
يجلـي
بها
أبصاره
|
|
أيـن
مـن
بـات
ناعماً
في
مغاني
|
شــِعب
بَــوّان
ناشــقاً
أزهـاره
|
|
أيـن
مـن
أطلـق
النواظر
في
صُغْ
|
د
ســمرقند
واجتلــى
أنــواره
|
|
أيــن
مــن
حـلَّ
بالابُلَّـة
قـدما
|
وجلا
فـــي
رياضـــها
أفكــاره
|
|
أيـن
مـن
بـات
بالسَّماوة
في
مئ
|
نـــاف
روضٍ
ينشـــه
أســـراره
|
|
بنســيمٍ
يحــل
فــي
غلــس
الأس
|
حــار
عــن
جيـب
نـوره
أزراره
|
|
حيـث
تنـدى
مباسـم
الزهـر
فيه
|
وتَلَقَّـــــى
أنفاســـــه
زُوَّاره
|
|
فسـقتْ
عهـد
مـن
مضى
أَدمع
المز
|
ن
وجـــادتْ
بصـــوبها
آثــاره
|
|
مـا
سـرتْ
نسـمة
الصـباح
بـروضٍ
|
عبقــــريٍّ
فهيَّجـــتْ
أطيـــاره
|