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هتـف
القمـري
فـي
الـروض
وغنـى
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وانثنــى
يشـرح
أشـواق
المعنـى
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ورقـى
غصـناً
وأملـى
فـي
الهـوى
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ما
شجى
قلبي
ولم
أفهم
منه
معنى
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ذكــر
الصــب
بأهــل
المنحنــى
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فصـــبا
نحــوهم
شــوقاً
وحنــا
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لـــم
يكــن
ذكــري
لنســيانهم
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كيــف
أنســاهم
وحاشــا
وأنــى
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ســـكنوا
قلـــبي
فلا
أنســـاهم
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كيـف
ينسى
القلب
من
فيه
استكنا
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تضــرب
الأمثــال
بـي
فـي
حبهـم
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وبمثلــي
فــي
هــواهم
يتغنــى
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يـا
نسـيم
الـروض
قـف
لي
ريثما
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تحمــل
الأخبــار
للأحبــاب
عنـا
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ســلهم
هــل
ذكـروا
عيشـاً
مضـى
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نلــت
فيــه
منهــم
مـا
أتمنـى
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والليـــالي
همهـــا
خـــدمتنا
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فـــإذا
قلنــا
تــأنى
تتــأنى
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خولتنـــا
كـــل
معنـــى
حســن
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وســقتنا
خمرهــا
دنــاً
فــدِنَّا
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ثـــم
جســـت
طربــاً
أوتارهــا
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وتغنـت
فـي
الهـوى
لحنـاً
فلحنا
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وكــذا
الأقــدار
تــأتي
بالـذي
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تطلــب
الأنفــس
مـن
ثمـة
وهنـا
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لـو
أنـادي
الريـح
لا
تفـزع
مـن
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أعيـن
الأزهـار
فـي
الأغصان
جفنا
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مـر
فـي
الـروض
ولـم
تشـعر
بـه
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وســرى
ســراً
ومـا
أيقـظ
وسـنا
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واســتفاقت
تنفــض
الطــل
وقـد
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ســألت
أيـن
نسـيم
الـروض
منـا
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مــاله
مــا
أســقط
الطــل
ولا
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حـــرك
الأغصــان
حــتى
تتثنــى
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أي
أيـــام
لنـــا
قــد
ســلفت
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جمعــت
وصــفين
إحسـاناً
وحسـنا
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لــم
نــزل
فــي
عيشــة
راضـية
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فلمـاذا
الـدهر
بعـد
الجود
ضنا
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طــاوع
العــاذل
فيمــا
رامــه
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وعلينـا
قـد
غـدا
عينـاً
وأذنـا
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وريــاح
الــبين
فيمــا
عصــفت
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فأطارتنــا
وقــد
كنــا
وكنــا
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فرقتنـــــا
همــــة
عاليــــة
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للــذي
بــان
وعنــه
نحـن
بنَّـا
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فــارق
الأوطــان
والإِخــوان
فـي
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طلــب
العليـا
والعيـش
المهنـا
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هكــذا
المجــد
لمــن
يرتــاده
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لا
ينــال
المجــد
شــخص
يتمنـى
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ملـــك
يمنـــن
بالمــال
فقــد
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ألـــف
المــن
ولا
يعــرف
منــا
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كــم
أفــادت
يــده
مــن
هبــة
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ولَكَــمْ
مـن
سـائل
أغنـى
وأقنـى
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وحليــم
لــو
درى
الجـاني
بمـا
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يجتنــي
مــن
حلمـه
كـان
تجنـى
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طـــاب
آبـــاء
وأبنــاء
ويــا
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حبــذا
مــن
طـاب
آبـاء
وإبنـا
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وهـو
فـي
العلـم
إمـام
فاسـتفد
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مـا
تشـا
مـن
علمـه
فنـاً
ففنـا
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ليــس
يعيــي
ذهنــه
بحــث
وإن
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كـان
قد
أعيا
أولي
العلم
وأعنى
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فهـو
بحـر
العلـم
والجـود
فَـرِدْ
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بحــره
مغترفــاً
مــن
أي
معنـى
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وإمـــام
ليـــس
يــدني
قــدره
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إن
طلبنــا
منــه
أن
لا
يتكنــى
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فــالكنى
مبتــدعات
لــم
يكــن
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سـيد
الأشـراف
فـي
الإِسـلام
يكنـى
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إنمــا
إســمك
يكفيــك
الكنــى
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فهـو
مـن
كـل
الكنى
أعلى
وأسنى
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وإليــك
النظــم
وافــى
قـائلاً
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إنهــم
إن
يقرعــوني
لـن
أطنـا
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