|
يـا
مـن
إليـه
مـآل
أمـر
النـاس
|
حقــق
رجـا
المضـطر
قبـل
البـاس
|
|
يـا
بـر
يـا
أللّـه
يـا
ربـاه
يا
|
غوثــاه
مــن
نكـس
ومـن
ارتكـاس
|
|
يـا
راحـم
العبـد
الحقيـر
وجابر
|
العظـم
الكسـير
ومنشـىء
الإحسـاس
|
|
يا
مبدع
النطف
المهينة
في
الحشا
|
يــا
ناسـر
المـوتى
فـي
الأرمـاس
|
|
يـا
سـامع
الصـوت
الخفي
إذا
دعى
|
تحــت
الــثرى
وأســافل
الأســاس
|
|
يـا
نـاظر
الـدر
المهين
إذا
مشى
|
فـي
ظلمـة
الليـل
البهيـر
الغاس
|
|
يــا
عــالم
الحركـات
والسـكنات
|
والخطــرات
والهفــوات
والأنفـاس
|
|
يــا
فـرد
مـن
جـل
عـن
زوج
وعـن
|
ولــد
وعــن
جنــد
وعــن
حــراس
|
|
يـا
كاشـف
الضـر
المهيـن
وسـاتر
|
العيــب
الـذميم
وصـارف
الأنفـاس
|
|
إنـي
قصـدتك
يـا
كريـم
ومـن
يمل
|
لســــوى
علاك
يبـــوء
بـــالإفلاس
|
|
وسـألت
فضـلك
يا
مجيب
يا
جاه
من
|
ألبســته
ثــوب
الكمـال
الكاسـي
|
|
طـه
الشـفيع
المجتـبى
خير
الورى
|
كنــز
المعــالي
ســيد
الــرؤاس
|
|
ألشــائد
العليــا
بأيــدي
قـوة
|
خضـعت
لهـا
الأطـواد
وهـي
رواسـي
|
|
الصــارف
البؤســا
يصـائل
عزمـه
|
خنســت
لهـا
الآسـاد
فـي
الأحبـاس
|
|
الصــائب
الأعـراض
بالسـهم
الـذي
|
تســـديده
أغنــى
عــن
الأقــواس
|
|
مــن
سـبحت
ضـم
الحصـى
فـي
كفـه
|
وبهـــــا
أدر
الشـــــاة
للجلاس
|
|
والبــدر
شـق
لـه
وظللـه
السـحا
|
ب
وجـــاده
بالوابـــل
الرجــاس
|
|
والــذئب
خـاطبه
ونـاحته
الظـبي
|
والــوحش
حيــاه
علــى
اسـتئناس
|
|
والصــلد
لان
لـه
وحييتـه
الصـبا
|
ولأمـــره
دان
الأشـــم
الغاســـي
|
|
والنخـل
جـاءت
نحـوه
تمشـي
علـى
|
ســــاق
بلا
قــــدم
ولا
أمـــراس
|
|
والجــذع
حــن
لــه
بغيـر
تصـنع
|
والفحــل
ذل
لــه
بغيــر
مــراس
|
|
والجـــدل
عـــاد
بكفــه
ســيفا
|
كمـا
انبجسـت
بمـاء
هامـل
بجـاس
|
|
والشــمس
أقفهــا
أرجــع
قرصـها
|
فــي
يــوم
وحـي
وانتظـار
أنـاس
|
|
نسـخ
الشـرائع
شـرعه
أو
مـا
ترى
|
كيـف
الضـحى
تخفـى
سـنا
الأقبـاس
|
|
ولكـم
أرى
أهـل
السـما
مـن
آيـة
|
ولكـم
لـه
مـن
معجـز
فـي
النـاس
|
|
فــــبروحه
وبجســـمه
وبقـــبره
|
وبــــآله
وبصــــحبه
الأكبـــاس
|
|
وبزوجـــه
وببنتـــه
وببعلهـــا
|
وآبنيهمـــا
وبعمـــه
العبـــاس
|
|
وبصـخرة
الـبيت
المقـدس
والخليل
|
وحرمـــة
الســـرداب
والنــبراس
|
|
وبطيبــة
وقبــا
ومكـة
مـع
منـى
|
والخيــف
والجبـل
العلـي
الـراس
|
|
وبالأنبيــا
والرسـل
والأملاك
والأف
|
لاك
والإشـــــــــــــراق
والأغلاس
|
|
وبــــآدم
وبشــــيت
والأســـباط
|
باليسـع
الرضـى
والإشـراق
والأغلاس
|
|
واللــوح
والقلـم
المـبين
بخطّـه
|
اسـرار
وضـع
الحـرف
فـي
القرطاس
|
|
والصـحف
والألـواح
والكتـب
الـتي
|
مزقـــن
بالأضـــوادجي
الألبـــاس
|
|
والحمــد
والإســرا
وطـه
والضـحى
|
وســبا
ومريــم
والنـاس
والنـاس
|
|
وبآيــة
الكرســي
وآيـات
الشـفا
|
والحفـــظ
والتعويــذ
والأحــراس
|
|
وباسـمك
الأعلـى
المعظم
في
العلى
|
يــا
حـي
يـا
قيـوم
اصـرف
باسـي
|
|
وارحــم
تسلســل
دمعــي
تــذلّلي
|
وخضــوع
قلــبي
والتجــا
أنفـاس
|
|
وآمنــن
علـي
بتوبـة
أمحـو
بهـا
|
ماســود
العصــيان
مــن
أطــواس
|
|
وانظـر
إلـيّ
بعيـن
لطفـك
واكفني
|
شــر
الهــوى
والنفـس
والوسـواس
|
|
واكفـف
أكـف
الضـر
عـن
جسدي
وكد
|
مــن
كــادني
مـن
سـائر
الأجنـاس
|
|
واكشـف
مصـابي
يـا
كريـم
ونجنّـي
|
ممـا
ألاقـي
بالضـنى
وأقاسي
وأزل
|
|
بســر
قميــص
يوســف
مـا
اعـترى
|
بصـري
مـن
الوجـع
الشـديد
الياس
|
|
فلقــد
فقــدت
بـه
جميـل
تصـبري
|
وشــهي
مــأكولي
وطيــب
نعاســي
|
|
وغــدوت
أضــرب
لاضــطراب
حسـابه
|
فــي
بـاطن
الأخمـاس
فـي
الأسـداس
|
|
فاصـرفه
عـن
عجـل
بحولـك
واشفني
|
مــن
حــادث
أعــي
الطــبيب
الآس
|
|
وأزح
غشـا
بصـري
بيعقـوب
الرضـا
|
يـا
مـن
أنـار
البـدر
فـي
الأغلاس
|
|
ومحـا
رسـوم
الشـرك
بالدين
الذي
|
قــد
أثبــت
الأحكــام
بالقسـطاس
|
|
ودعــا
لمــولاه
وأوضــح
للــورى
|
ســبل
الهـدى
بالسـيف
والمـدعاس
|
|
وغـدا
يـرد
فسـاد
أقـوال
العـدا
|
بجلـــي
برهـــان
وصــدق
قيــاس
|
|
وشــفى
عليـا
يـوم
خيـبر
بعـدما
|
قــد
كــان
ذا
رمــد
شـديد
عـاس
|
|
وأعــاد
عيـن
قتـادة
مـن
بعـدما
|
قلعــت
كأحســن
مقلــة
فــي
راس
|
|
ولكـم
شـفى
ووفـى
وعـافى
مبتلـى
|
وأخـــا
مضـــرات
وحلــف
إيــاس
|
|
ولكــم
بعزمتــه
وقـى
مـن
حـادث
|
ولكــم
بــدعوته
كفــى
مـن
بـاس
|
|
فبجــاه
طــه
المصـطفى
لا
تخزنـي
|
يــا
رب
بيــن
أقــاربي
وأناسـي
|
|
فبــه
ســألتك
وهـو
أعظـم
وصـلة
|
لأخــــى
انقطـــاع
مقطـــع
مفلاس
|
|
وبــه
اسـتعنتك
وهـو
أمنـع
عـدة
|
مـــن
عــدة
الأنصــار
والحــواس
|
|
فبجــــاهه
لا
تـــرددن
توســـلي
|
وبسـره
لا
تعكسـن
قياسـا
وليس
قد
|
|
نجيــــــــت
آدم
باســــــــمه
|
مـن
كيـد
إبليـس
الخسـيس
الخـاس
|
|
وكــذا
بـه
نجيـت
نوحـا
إذ
طمـى
|
الطوفــان
فـوق
أصـابع
المقيـاس
|
|
وكــذاك
نجيــت
الخليــل
بنـوره
|
مـن
نـار
أعـداء
الهـدى
الأنجـاس
|
|
وبـه
الذبيـح
أجرتـه
لمـا
ارتضى
|
طوعـــا
لوالــده
بحــز
الــرأس
|
|
فهـو
الشـفيع
ومـن
يلـذ
بجنـابه
|
ينجــو
مــن
الأبعــاد
والأنعــاس
|
|
وهـو
الكريـم
ومـن
ينـخ
بفنـائه
|
يجلســـه
فــوق
مراتــب
وكــراس
|
|
وهـو
الحـبيب
ومـن
ينـادي
باسمه
|
يعلـو
علـى
طـود
النجـاة
الراسي
|
|
فبجــــاهه
وبنــــوره
وبســـره
|
متــع
حواســي
الخمــس
بالإحسـاس
|
|
واحفـظ
قـواي
بصـحة
مـا
دمـت
في
|
قيـد
الحيـاة
إلـى
آنطفا
مقباس
|
|
وامنــن
بعــود
للحطيــم
وزمـزم
|
والمـــدعى
وســـقاية
العبـــاس
|
|
وتــردد
مــا
بيــن
أجنـا
طيبـة
|
وتطـــوف
بضــريح
خيــر
النــاس
|
|
واجـزل
ثوابي
وأوف
ديني
واعف
عن
|
خطئي
وعـــن
حطـــاي
وعــن
إفلاس
|
|
وأنلنـي
في
الدارين
ما
أرجو
وكن
|
لـي
مؤنسـا
عنـد
ابتغـا
الإينـاس
|
|
وأجـر
مـن
النيـران
جسمي
واكسني
|
فــي
جنــة
الفـردوس
خيـر
لبـاس
|
|
واحفــظ
أميــر
المـؤمنين
ونجـه
|
مــن
كيـد
حاسـده
العـدو
الخـاس
|
|
واعضـده
بالنصـر
العزيـز
وكن
له
|
عونـا
علـى
غـدر
الزمـان
القاسي
|
|
واحنـن
عليـه
واعـف
عنـه
وعـافه
|
واحرسـه
فـي
المحيـى
وفي
الأرماس
|
|
واسـعد
ولـي
العهد
وامنحه
الرضا
|
وامنعــه
ممــا
يختشـى
مـن
بـاس
|
|
وأنلـه
مـا
يرجـوه
فـي
الـدارين
|
واسبل
فوقه
الستر
الحصين
الكاسي
|
|
واحــرس
بنــي
واخـوتي
ومعـارفي
|
مـن
عـض
أنيـاب
الزمـان
القاسـي
|
|
واغفــر
لأشــياخي
وآبــائي
وجـد
|
للمســلمين
بثــوب
جــود
كاســي
|
|
وأجــب
دعـائي
مثـل
مـا
عـودتني
|
كرمـــا
وطهرنــي
مــن
الأدنــاس
|
|
واضــمم
بنـاء
جـوارحي
وجـوانحي
|
واجعـل
علـى
تقـواك
وضـع
أساسـي
|
|
وافــض
علــيّ
مـآثر
الإحسـان
وآذ
|
كرنـي
وإن
كنـت
المـبىء
الناسـي
|
|
واحمـل
علـى
نجـب
النجاة
محاملي
|
واسـرج
وألجـم
بـالتقوى
أفراسـي
|
|
وألــن
شــكيمة
طـرف
قلـبي
علـه
|
ينقــاد
للخيــرات
بعــد
شــماس
|
|
واسـلك
بعقلـي
منهـج
الحـق
الذي
|
بــالحق
أفهمنــي
بــديع
جنــاس
|
|
وأطــر
غــراب
مــآثمي
وجرائمـي
|
وأقـــم
بلبــل
وصــلة
أعراســي
|
|
وأطـل
مناجـاتي
علـى
طـود
الرضا
|
وأنــر
بمصــباح
الهــدى
أغلاسـي
|
|
واجعـــل
شــعار
ابــن
الخلــوف
|
مديـح
من
أرجه
يوم
تطاير
الأطراس
|
|
واختــم
بخيـر
واكفنـي
الملكيـن
|
وارحـم
غربـتي
فـي
ظلمـة
الأرماس
|
|
وامنــن
علــيّ
بتوبـة
فـي
يـثرب
|
مــا
بيــن
إبراهيــم
والعبــاس
|
|
إنـي
سـألتك
بـالحبيب
ومـن
يسـل
|
بالمصــطفى
يعطــى
بغيــر
قيـاس
|
|
فــأدم
صـلاتك
والسـلام
عليـه
مـا
|
هــب
النســيم
معنــبر
الأنفــاس
|
|
وعلــى
النـبيين
الأولـى
والرسـل
|
الأملاك
وأهــل
الاحتبــا
الــرؤاس
|
|
مـا
قـام
فـوق
الغصـن
يـدعو
ربه
|
طيـــر
صـــغت
لـــدعاه
أذن
الآس
|
|
وعلـى
الصـحابة
والقرابـة
كل
ما
|
صـدح
الهـزار
علـى
الفنا
المباس
|