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ادرْ
ذكـر
مـن
أهـوى
رزقـت
وصولا
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ودعنــي
مــن
صــبّ
يخـاف
عـذولا
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وكــررّ
علـى
سـمعي
حـديث
احبـتي
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فــاني
قـديماً
كنـت
فيـه
ثمـولا
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فـوادي
إلـى
الغيد
الحسان
وهبته
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بــأذن
ومنهــنّ
التمســت
قبـولا
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وكان
الهوى
عندي
هو
المغنم
الذي
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ســكلتُ
لــه
بيـن
الأنـام
سـبيلا
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فشـنّف
وشـرّف
يـا
ابن
ودي
مسامعي
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بــذكر
التصــابي
واذهبـن
غليلا
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فـاني
فـتى
افنـى
الغـرام
بقتلي
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والبســني
بعــد
السـقام
نحـولا
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وحـالي
به
حارت
عقول
أولي
النهى
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وامــري
عجيــبٌ
ان
شـرحت
طـويلا
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أهيــم
إلــى
ريـح
الشـمال
لأنـه
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يـــذكرني
عمـــن
احــب
نقــولا
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واصـبو
إلـى
لبنـان
وهـي
مـواطنٌ
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عرفـــت
بهـــا
ظلاًّ
هنــاك
ظليلا
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مراتـــع
غـــزلانٍ
وملعــب
خــرَّدٍ
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وروضــة
إحســانٍ
تطيــب
نــزولا
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بــآل
شــهاب
كمّــل
اللـه
عزهـا
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وشــرّف
منهــا
أربعــاً
وطلــولا
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وبــالجنبلاطيّ
البشــير
تشــامخت
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جبـال
بهـا
تعلـو
المجـرة
طـولا
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فـتى
مـاله
فـي
الـدهر
ثانٍ
وأنه
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أبــو
قاسـمٍ
حـاز
الكمـال
جميلا
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همـامٌ
إذا
مـا
الحرب
شدت
وثاقها
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تــرى
اســداً
للمرهفــات
سـلولا
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يصــول
بقلــبٍ
كالجبــال
ثبـاتهُ
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فيوقــع
فـي
قلـب
العـدو
خمـولا
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يجـود
وفيـض
السـحب
يحسـد
جـوده
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إذا
جـرّ
مـن
بحـر
المكـارم
نيلا
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بـه
شـرفت
مختارة
العزّ
في
الورى
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وبــارو
كهـا
للفضـل
جـاء
دخيلا
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تــذكرنا
جنــات
عــدن
قصــورها
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وانهارهــا
شــيئاً
نــراه
جليلا
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فلا
مثلهــا
عينـي
رأت
ذات
يهجـة
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بأمثالهــا
صــيب
السـخاء
كليلا
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وبــابن
علـيّ
عظـم
اللـه
قـدرها
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واحيـى
لها
اسماً
في
البلاد
فضيلا
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ومســجدها
المعــور
ينبيـك
أنـه
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عـن
الفضـل
فاسأل
أن
أردت
نبيلا
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وشـاهد
بـه
نظمـاً
شجانا
اقتباسه
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لنــدب
روى
لطـف
البـديع
نقـولا
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فـتى
شـاعر
الدنيا
جميعاً
بأسرها
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لـه
الصـعب
يأتي
في
الكلام
ذليلا
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حبــاني
بنظــم
لا
يضــاهى
وأنـه
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حيـاة
لمـن
يبغـي
الحيـاة
تطولا
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مـن
الـترك
فرعٌ
تحسد
العرب
أصله
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علـى
مثـل
هـذا
الطيب
طاب
أصولا
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فحّييـه
عنـي
يـا
ابـن
ودي
تحيـة
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تليــق
وذكــر
أن
بلغــت
قبـولا
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فقـل
ليهـا
الحـب
الذي
حلّ
مهجتي
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رويـــداً
بصـــبٍ
مصــطفيك
خليلا
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تعشــق
بالسـمع
اللطيـف
صـفاتكم
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وهــام
بكـم
وجـداً
وصـار
قـتيلا
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وقد
طال
ما
قد
كنت
رمت
اجتماعكم
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ولـم
ارَ
مـن
هـذا
المـرام
وصولا
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ولكـــنّ
آمــالي
بربــي
وثيقــة
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يســهّل
لـي
نحـو
الحـبيب
سـبيلا
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وانظــر
أهــل
الــدير
والقمــر
|
الـذي
تشـرّفت
أبتـدين
فيه
حلولا
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أميـر
العلا
كهف
الملا
من
غدا
إلى
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جميــع
الـورى
ممـا
تخـاف
كفيلا
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ومن
لي
ارى
ذاك
البشير
الذي
أتى
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علـى
الحمد
والخير
الكثير
دليلا
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منـاءي
أبـو
سـعدى
رجـاءي
وسيدي
|
حبيــبي
لــه
قلـبي
جعلـت
مقيلا
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وافــرح
بـالروح
الأميـن
واشـتفي
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برويــاه
مــن
وجـدٍ
اثـار
غليلا
|
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واغنــم
مـن
انـس
السـمي
بحظـوةٍ
|
وانظــر
اشــياخاً
علــت
وكهـولا
|
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خصوصـاً
مـن
قلـبي
وغايـة
مـأربي
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أبــو
يوسـف
اكـرم
بـذاك
نـزيلا
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وروحـي
حسـين
الفضـل
عـزّ
مقـامه
|
أبــو
غـانم
للخيـر
نـال
حصـولا
|
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وصــاحبنا
مرعــي
الجنـاب
مهـذّب
|
وذاك
مـــرادي
لا
أكــون
غفــولا
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فبلّــغ
نقـولا
الكـل
عنـي
تحيـتي
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وعظــم
اشــتياقي
بكـرةً
واصـيلا
|
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وارجـوك
طـرح
اللـوم
عنـي
لأننـي
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فقيــر
بهــذا
الفـن
زدت
فضـولا
|
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فسـامح
اخـا
الأشـواق
صـالح
صبوة
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يؤمــل
عفــواً
أن
وجــدت
عضـولا
|
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وهـذا
هـو
القصـد
الجميل
فكن
به
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وفيـــاًّ
ودع
قــولاً
يقــال
وقيلا
|
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ودم
فـي
أمـان
الله
ما
قال
عاشقٌ
|
ادر
ذكـر
مـن
اهـوى
رزقـت
وصولا
|
|
وكــررَ
علـى
سـمعي
حـديث
احبـتي
|
ودعنــي
مــن
صــبٍ
يخـاف
عـذولا
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