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كـل
مـا
فـي
البلاد
مـن
أموال
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ليـــس
إلاّ
نتيجـــة
الأعمــال
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أن
يطِـب
فـي
حياتنـا
الأجتمـا
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عيّــة
عيــش
فالفضـل
للعمّـال
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وإذا
كــان
فــي
البلاد
ثـراء
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فبفضـــل
الأنتــاج
والأبــدال
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نحــن
خَلـق
المُقـدَّرات
وفيهـا
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لا
حيــاة
للعاطــل
المكســال
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عنـدنا
اليـوم
للحيـاة
نظـام
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قــد
حــوى
كـل
باطـلٍ
ومُحـال
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حيـث
يسـعى
الفقيـر
سعي
أجير
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لغنـــيّ
مســـتأثر
بـــالغلال
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فـترى
المُكـثرين
فـي
طيب
عيش
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أرغـــدته
لهـــم
يــد
الأقلال
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وترى
الغائصين
في
البحر
أمسى
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لســواهم
مـا
أخرجـوا
مـن
لآل
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وتـرى
المُعسـرين
فـي
كـل
أرض
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كعبيــد
والموســِرين
مــوالي
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أكــثر
النـاس
يكـدحون
لقـوم
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قعـدوا
فـي
قصـورهم
والعَلالـي
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واحـد
فـي
النعيـم
يلهو
وألف
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فـــي
شــقاء
وأبــؤس
واعتلال
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حالــة
فـي
معاشـنا
أسـلكتنا
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طُرُقــات
المخاتــل
المحتــال
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فترانــا
بعضـاً
لبعـض
لبِسـنا
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مـن
خياناتنـا
مُسـوك
الثعالي
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تلــك
عـادٌ
مسـتهجنات
ورثنـا
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هـا
قديماً
من
العصور
الخوالي
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فـإلى
كـم
نشـقى
وحتـام
نبقى
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هكـــذا
فــي
عَمايــة
وضــلال
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إنمــا
الحــق
مـذهب
الأشـترا
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كيّــة
فيمــا
يختـصّ
بـالأموال
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مـذهب
قـد
نحـا
إليـه
أبو
ذرٍّ
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قــديماً
فــي
غــابر
الأجيـال
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ليس
فرض
الزكاة
في
الشرع
إلا
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خُطــوة
نحـو
مبتغـاه
العـالي
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مبـــدأ
ذو
مقاصــد
ضــامنات
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مــا
لأهـل
الحيـاة
مـن
آمـال
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موصـلات
إلـى
السعادة
في
العي
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ش
هـوادٍ
إلـى
طريـق
التعـالي
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ليـس
للمـرء
أن
يعيـش
بلا
كـدٍّ
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وإن
كــان
مـن
عظـام
الرجـال
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كـل
مجـدُ
يبنـى
علـى
غير
سعيٍ
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فهــو
مجــد
مهــدّد
بـالزوال
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ليـس
قدر
الفتى
من
العيش
إلاّ
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قـدر
انتـاج
سـعيه
المتـوالي
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مـــا
رءوس
الأمــوال
إلا
أداة
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للمســاعي
كالحبــل
للأحمــال
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مثـل
شـدّ
الأحمـال
شدّ
المساعي
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ودنانيرنــا
لهــا
كالحبــال
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صاح
ماذا
تُجدي
الدنانير
لولا
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همــم
الـدائبين
فـي
الأشـغال
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أفتــأتي
مـن
الطعـام
بـديلاً
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أفتُغنــى
عــن
كســوة
ونعـال
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حاجــة
المــرء
أكلـةٌ
وكسـاء
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وسـوى
ذاك
بسـطة
فـي
الكمـال
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أن
للعيــش
حَومـة
فـي
وغاهـا
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لا
تحـــق
الحيـــاة
للبطّــال
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أنهـا
مثـل
حومة
الحرب
ما
دا
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رت
رَحاهــا
إلاّ
علــى
الأبطـال
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وسـوى
الحِـذق
مـا
بها
من
سلاح
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وسـوى
الكـدّ
مـا
بها
من
قتال
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بطـل
الحـرب
مثلـه
بطـل
السع
|
يِ
ومنـه
الأعمـال
مثـل
الصيال
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ونشــاط
منـه
لـبيض
المسـاعي
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مثـل
أشـراعه
لسـمر
العـوالي
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أيهــا
العـاملون
أن
أتحـاداً
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بينكــم
مرخـص
لكـم
كـل
غـال
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مـا
لعيـش
تشـكون
منـه
سَقاماً
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بســـوى
الأتحـــاد
مــن
ابلال
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فليكــن
بعضـكم
لبعـض
نصـيراً
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ومُعينــاً
لــه
علـى
كـل
حـال
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وإذا
قلـت
أنكـم
أنتـم
النـا
|
س
جميعــاً
فلا
أكـون
المُغـالي
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فـأعلموا
دائبيـن
غيـر
كسالى
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وأرقُبوا
ما
به
ستأتي
الليالي
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ثـم
قولوا
معي
مقالاً
رفيع
الصَ
|
وْت
فلتحـــي
زمــرة
العُمّــال
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