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مهــج
القلــوب
سـلكت
أحسـن
مسـلك
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ســبل
العيــون
فكنــت
أول
مهلــك
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مهمـا
جـرت
بظبـا
الفـراق
دموعنـا
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فــوق
الخــدود
فمالهـا
مـن
ممسـك
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أسـواعد
الـدهر
اسـعدي
أو
فـارجعي
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اولا
فكــــوني
لا
علــــي
ولا
لـــك
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اخلقــت
ظاميــة
الفـؤاد
بحيـث
ان
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حمــر
المــدامع
غيرهـا
لـم
يـروك
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ان
كنــت
ضــاربة
لصــفحك
موعــدا
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فــالموت
اقــرب
موعـدا
مـن
صـفحك
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أظبـا
المنـون
كفـاك
سـفك
دمائنـا
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ان
قـد
أصـاب
فرنـدك
الحسـن
الزكي
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خنــت
العهــود
ومــا
وفيـت
بذمـة
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فهـل
العهـود
مضـت
علـى
أن
تسـفكي
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اللّــه
مــا
نـوح
الحمـام
ببـالغي
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نوحــا
ولا
صــوب
الغمــام
بمـدركي
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انـا
لا
ابـالي
بعـدما
قضـت
النـوى
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فتــك
الزمـان
بنـا
وان
لـم
يفتـك
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مــا
كنـت
قبلـك
للزمـان
اذا
جنـى
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اشــكو
وبعـدك
قـد
قضـى
ان
اشـتكي
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هتكــت
ســتور
مـدامعي
عـن
صـونها
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أتــرى
فــديتك
انهــا
لــم
تهتـك
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كــم
حركــت
كــف
المصـائب
سـاكنا
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ممـــن
فـــداك
بســـاكن
ومحـــرك
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لـو
كـان
نسك
البين
أن
يرضى
الفدا
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عمــن
أحــبّ
لكــان
احســن
منســك
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وفـــديت
روحـــي
دونـــه
بتــذلل
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وأعــز
مــن
روحـي
فـدا
لـم
أملـك
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أيــد
المنــون
أخـذت
منـي
واحـدا
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مــاذا
عليــك
بمهجـتي
لـو
تشـركي
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فلعلـــك
تمضـــين
مـــا
أحببتــه
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ولربقمـــا
فــاز
الفــتى
بلعلــك
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أبنــي
لــويّ
مــا
عسـى
أن
تفعلـي
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واليــوم
قــوض
فيــه
كافــل
عـزك
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قـد
دكـدك
الهضـب
المصـاب
فزلزلـت
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والنســف
اثــر
تزلــزل
المتدكـدك
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قــل
للشـريعة
ان
نـأى
عـن
عينهـا
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مــن
كــان
ارسـاها
بمـن
تستمسـكي
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قــل
للعلــوم
وانهــا
اشـجى
حشـا
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عهــدا
وفيــت
اذا
قضــيت
بشــجوك
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قــد
كنــت
نـثر
لئالىـء
حـتى
اذا
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قبضــت
عليــك
يــداه
احسـن
نظمـك
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وسـل
السـحائب
يـوم
اذ
وكفـت
حيـا
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مـن
ذا
رأيـت
علـى
النـدى
اذ
كفـك
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ان
ضـــلّت
الوفــاد
قــال
تــودداً
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ولقـد
انـار
لهـا
مناهجهـا
اسـلكي
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مـا
بالهـا
بقيـت
وقـد
مـات
الرجا
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يـاكم
أقـول
لهـا
اقتفـي
أولـى
لك
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ابنـــاءه
قســما
بجمــر
حشاشــتي
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وبجمرهــا
غيــر
البكـا
لـم
يـدرك
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انـي
أقـول
لـك
اصـبري
ولـو
اننـي
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أجـد
المنـى
بسـواك
قلـت
لك
اتركي
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ســـعيا
علــى
اعلاك
أيتهــا
العلا
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رغمــا
ملكــت
لغيــر
شـاكر
سـعيك
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اتريـــن
انــك
مــا
يعــز
طلابــه
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لنفوســهم
مــا
كــان
اســوء
ظنـك
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فهــم
محمــد
الرضــا
المهــدي
اب
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راهيــم
احمــدها
محمـد
ذو
الفطـن
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ان
كنــت
واطئة
علــى
هـام
السـها
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وتشــامخت
فخــرا
بــذا
مـن
مثلـك
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أن
تســألي
عنــه
رقــى
او
ترتجـي
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ان
تعلمــي
مــاذا
لقــي
أعلمتــك
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أقصــى
الرجـاء
قضـى
بـه
مـذارخوا
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لعلى
الجنان
قدار
تقى
الحسن
الزكي
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