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مـــن
مــرة
أو
مرتيــن
طلقــا
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زوجتـــه
لــه
ارجــوع
مطلقــا
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مـــن
غيــر
عقــد
وبلا
رضــاها
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ولا
رضـــا
وليهـــا
إن
شـــاها
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قبـل
انقضـاء
العـدة
المعلومـة
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وربمـــا
كــانت
بــه
مظلومــة
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فـــإن
يــزد
عــن
ذلــك
الطلاقُ
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فــــواجب
بينهمـــا
الفـــراق
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ولا
تحـــل
لـــه
حــتى
تنكحــا
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زوجــاً
ســواه
وتنــال
الفرحـا
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بـــأن
تــذوق
معــه
العســيلة
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أضـــعف
ربـــي
حيلهــا
حيلــه
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هــذا
وإن
صــاحب
الشــرع
لعـن
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حليلهــا
لاأول
والثــاني
معــاً
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وذاك
تنفيـــــراً
عــــن
الطلا
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عنــد
انتشــار
شــرر
الشــقاق
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ثــم
الــذي
يحلــل
المبتــوته
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عـــروة
دينــه
غــدت
مبتــوته
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لقــد
أتــى
واللــه
شـيئاً
إذا
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تخـــر
منــه
الشــامخات
هــدا
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وتـاه
عـن
نهـج
الهـدى
في
سيره
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وبـــاع
دينــه
بــدنيا
غيــره
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وإن
أرضـــى
النــاس
بالخســار
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مـن
بـاع
ديـن
الحـق
بالـدينار
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جــزاء
مـن
جرأهـم
علـى
الزنـا
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أشــد
فــي
الآخــرة
ممــن
زنـى
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جنــى
جنابــة
وبئس
مــا
جنــى
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قـد
هـدَّ
مـن
دينـه
مـا
كان
بنى
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تـــردُّ
بعــد
بتهــا
اليقينــي
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مـــا
ذاك
إلا
لعـــب
بالـــدين
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ولاعـــــب
بـــــدينه
يزيــــد
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علـــى
الـــذي
فعلـــه
يزيــد
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لا
تكــــترث
بــــه
ولا
تـــالي
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فثـــوب
دينـــه
رثيــث
بــالي
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فليتــق
اللــه
العظيــم
ربــه
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لعلـــه
يغفـــر
فضـــلاً
ذنبــه
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أوفـــى
صـــلاة
وأتمهــا
علــى
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مــن
ذكــره
مـع
ذكـر
ربـه
علا
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وآلــــه
وصــــحبه
الأبطــــال
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أهــل
التقـى
والعلـم
والكمـال
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مـــا
كـــل
ذي
عمامــة
عليــم
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مـــا
كـــل
ذي
قرابــة
حميــم
|
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مـــا
كـــل
ذات
خضــرة
ريــاض
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مـا
كـل
قـاضٍ
فـي
الـورى
عيـاض
|
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مــا
كــل
حــاكم
بحكمــه
عـدل
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مــا
كـل
حلـو
عنـد
ذوقـه
عسـل
|
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مــا
كــل
واعــد
بوعــده
يفـي
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مــا
كـل
شـخص
بالكفـاف
يكتفـي
|
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مــا
كـل
واحـد
يفـي
بمـا
وعـد
|
مــا
غيــر
ربنـا
عليـه
يعتمـد
|
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مــا
كــل
نطفــة
تكــون
علقـة
|
مــا
كــل
صــفر
وحديــد
حلقـة
|
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مــا
كــل
مــاء
دافــق
يُصــوَّر
|
مــا
كــل
قلــب
بالهـدى
ينـور
|
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اســـمع
وعِ
قــولي
ولا
تعصــيني
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واطلــب
العلــم
ولــو
بالصـين
|
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ماكـــل
مـــاءٍ
صـــفاء
يشــرب
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مــا
كــل
عبـد
بالسـياط
يضـرب
|
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مـا
كـل
وادٍ
فـي
الجبـال
لعلـع
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مــا
كــل
مخضـر
الحشـيش
يقلـع
|
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مـا
كـل
صـوت
فـي
الهـواء
يسمع
|
مــا
كـل
سـامع
يعـي
مـا
يسـمع
|
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ماكــل
ســامع
يعــي
مـا
يسـمع
|
مـا
كـل
نجـم
فـي
السـماء
يلمع
|
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مـــا
كــل
إنســان
يعــد
رجلا
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مـا
كـل
نظـم
فـي
القريـض
زجلا
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مـا
كـل
مَـن
كـان
من
الناس
فتى
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مـا
كـل
مطلـوب
علـى
الفور
أتى
|
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مـا
كـل
شـخص
فـي
الأنـام
طـاهر
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مـا
كـل
مـن
يـدعى
طبيبـاً
ماهر
|
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مـا
كـل
أنـثى
فـي
الإنـاث
اسما
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إلا
الــتي
تكــون
فينــا
أسـمى
|
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مــا
كــل
ذي
خـف
يكـون
راحلـة
|
مــا
كــل
بحـر
تسـتجير
سـاحله
|
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مــا
كــل
مــا
تســمعه
يقــال
|
مــا
كــل
عــثرة
بــدت
تقــال
|
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مــا
كـل
حلـو
عنـد
ذوقـه
عسـل
|
فــاقنع
بـه
وعـن
سـواه
لا
تسـل
|
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إلا
إذا
مــا
كــان
تمــر
طيبـة
|
يــا
ليـت
منـه
كـل
يـوم
ويبـة
|
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مــــا
كــــل
قــــول
يقبـــل
|
مــــا
كــــل
مـــدعو
يقبـــل
|
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مــــا
كــــل
صــــيد
يؤكـــل
|
مـــــا
كـــــل
وال
يعـــــزل
|
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مــــا
كــــل
قــــاضٍ
يعـــدل
|
مــــا
كــــل
جــــانٍ
يقتـــل
|
|
مــــا
كــــل
مقــــتٍ
يســـأل
|
مــــا
كــــل
ثــــوب
يســـبل
|
|
مــــا
كــــل
صــــعب
يســـهل
|
مــــا
كــــل
صــــوف
يفتـــل
|
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مـا
كـل
ذي
خـف
مـن
الإبـل
جمـل
|
مــا
كــل
إنسـان
يليـق
للعمـل
|
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مــن
نــام
والجــوع
لـه
ضـجيع
|
فمـــا
لـــه
نـــوم
ولا
هجــوع
|
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بئس
الضجيع
الجوع
جاء
في
الخبر
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عـن
خيـر
خلـق
الله
خير
من
خبر
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ليــس
العمــى
إلا
عمـى
القلـوب
|
عـــن
واجــب
للــه
أو
منــدوب
|
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ليــس
العمــى
إلا
عمـى
القلـوب
|
عمَّـــا
بأهلهــا
مــن
العيــوب
|
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أبــا
ليلــى
أراك
وأنــت
حــي
|
بمــا
اوصــيت
لـي
أضـحكت
سـني
|
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فلمــا
جــاء
وقـت
قضـاء
بحقـي
|
تغيــر
فــي
بنيِّــك
كــل
ظنــي
|
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فقـــدمها
أمامــك
يــا
إمــام
|
لتحظـــى
بالســرور
وبــالتهني
|
|
ولا
يخفــاك
مــا
جُبلــت
عليــه
|
نفــوس
النــاس
مــن
شــح
وظـن
|
|
لا
تشــرهن
فـي
الشـرب
والطعـام
|
فـــإنه
مـــن
عــادة
الطغــام
|
|
ســاداتنا
قـالوا
لنـا
البطنـة
|
تـذهب
مـن
قلـب
الـذكي
الفطنـة
|
|
كـــانت
مناديــل
أولــي
الأحلام
|
بعــد
الطعــام
أخمــص
الأقـدام
|