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فـــرائد
تحكــي
لئال
الصــدف
|
هـي
الغوالي
أين
منها
المشتري
|
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فمــا
أخــو
كنــدة
أو
لبيــد
|
ومــا
جريــر
والــورى
شــهود
|
|
ومــا
أبــو
تمــام
والوليــد
|
والمتنــبي
الشــاعر
المجيــد
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فمـا
اقتفـى
منهـم
مداه
مقتفي
|
وإن
جــروا
جــروا
علـى
تكلـف
|
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فقـل
لمـن
حـاول
غلـواه
إقصـر
|
|
فهــــــذه
قلائد
العقيـــــان
|
علــى
نحــور
الخــرد
الحسـان
|
|
مـا
نالهـا
الجعـدي
والذبياني
|
وطرفــة
العبــدي
ذو
اللســان
|
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بــل
هـي
موشـي
روض
كـل
مـألف
|
بهــا
طــراز
بــرده
المفــوف
|
|
معبــق
أريجهــا
فــي
العقـري
|
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نظمهــا
الرضــي
فــي
زمــانه
|
والمرتضـى
المعلـوم
قـدر
شانه
|
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وصــالح
الأفعــال
فـي
أقرانـه
|
وصــادع
بــالحق
فــي
برهـانه
|
|
مــن
فــارق
برأيــه
المؤتلـف
|
بيــن
الضــلال
والرشـاد
منصـف
|
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ومظهــر
فـي
الـدين
كـل
مظهـر
|
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ســراج
هــذي
الملــة
الوهـاج
|
ومـــاء
مصـــرانها
الثجـــاج
|
|
صــراطها
الواضــح
والمنهــاج
|
ومـــن
بــه
ينقطــع
اللجــاج
|
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وينبـــت
الـــدليل
للمختلــف
|
عــن
الهــدى
وكـل
غـي
ينتفـي
|
|
بنــور
برهــان
هـاداه
الأزهـر
|
|
هــذا
هــو
الحجــة
البيضــاء
|
بــه
تبــاهي
الشـرعة
الغـراء
|
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مــذ
أرضــعته
درهـا
الزهـراء
|
أولـى
بـأن
يهـدي
لـه
الثنـاء
|
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ومــا
عسـى
أقـول
عنـد
النصـف
|
بمــن
أتـى
بهـم
مديـح
الصـحف
|
|
وصــرحت
بــه
مثــاني
الســور
|
|
أمـــا
أبــوه
فــأبو
الأئمــه
|
وجـــدوه
فهــو
شــفيع
الأمــه
|
|
طـــوبى
لمـــن
أملــه
وأمــه
|
لرغبــــةٍ
ونكبــــةٍ
ملمــــه
|
|
مــن
مســتغيث
وعــديم
معتــف
|
يرجـع
فـي
نيـل
المنـى
ويشتفي
|
|
ممــا
يلاقـي
مـن
عظيـم
الضـرر
|
|
فهــو
رضــيعي
فـي
لبـان
الأدب
|
أنــــــا
وإبــــــاه
لأم
وأب
|
|
صـببت
فـي
حـبي
لـه
وهـو
صـبي
|
حـتى
نشـا
فنـال
أعلـى
الرتـب
|
|
لــم
ينحـرف
عنـي
ولـم
أنحـرف
|
عنـــه
لمــال
أو
طلاب
الحــرف
|
|
ولــم
يـرد
عـذري
ولـم
ينعـذر
|
|
بلــوته
فــي
شــدة
وفـي
رخـا
|
فكـان
لـي
خيـر
أخ
صـافي
الأخا
|
|
لــم
يختلـف
وقـاؤه
ولا
السـخا
|
فكـم
بـه
أرغمـت
مـا
قـد
شمخا
|
|
ممـا
عنـا
مـن
دهـري
المعتسـف
|
ومـا
عـدا
مـن
غـدر
أهل
الصلف
|
|
وكــم
بــه
صـرفت
صـرف
الغيـر
|
|
مـا
زال
لـي
منـه
حسـام
قـاطع
|
ونجـم
سـعدٍ
فـي
الزمـان
سـاطع
|
|
وجـــانبٌ
منــه
منيــع
واســع
|
ومـــورد
تحلــو
لــه
مشــارع
|
|
ولــم
يـزل
أنسـي
بـه
ومـألفي
|
بجنبـــه
ومــن
حمــاه
كنفــي
|
|
ونـــاظري
منــه
بــوجه
نضــر
|
|
أيــــامه
أعـــدها
أعيـــاداً
|
ولــم
أخــف
سـنينها
الشـدادا
|
|
إذا
اتخـــذت
جـــوده
عمــاداً
|
لقيتـــه
مــن
عــوزي
ســدادا
|
|
وقربـــه
ســـلامةً
مـــن
دنــفٍ
|
وراحــةً
لـي
مـن
ثقيـل
الكلـف
|
|
فلــم
أزل
منــه
قريـر
النظـر
|
|
مــا
راعنـي
منـه
صـدود
وجفـا
|
ولا
نبــا
فــي
مــوطنٍ
ولاهفــا
|
|
وفـي
بـودي
وهـو
من
أهل
الوفا
|
وقـد
صـفى
أكـرم
سـكان
الصـفا
|
|
فلـم
أكـن
يومـاً
سـواه
اصـطفى
|
ومــا
ســوى
جنتــه
لـم
أقطـف
|
|
ولــم
أزل
أجنــي
جنـي
الثمـر
|
|
إليـــه
بـــاليعملات
ترتمـــي
|
بكـــل
وضــاح
الجــار
أكــرم
|
|
تنفــي
الحصـا
بخفـا
والمنسـم
|
تـأوي
إلى
البطحاء
مثوى
الحرم
|
|
مــن
تحـت
كـل
ذي
فخـار
أشـرف
|
ملتحــف
مــن
العلــى
بمطــرف
|
|
مـــتزر
مــن
الحجــى
بمــتزر
|
|
بعقـد
إحـرام
الحجيـج
والنـدى
|
مقارنــاً
بجــده
هــدي
الجـدي
|
|
يطـوف
بـالبيت
وكـم
طـاف
لـدى
|
بيـت
نـداه
مـن
يـروح
واغتـدى
|
|
مـــن
متـــف
ببــابه
ومكتــف
|
بجـــود
كفيـــه
ومــن
كتنــف
|
|
ومســــتمير
راغـــب
ومـــتري
|
|
يسعى
إلى
المروة
من
عند
الصفا
|
مليـــاً
للَـــه
شــكراً
ووفــا
|
|
وكـم
رمـى
الجمـار
لمـا
عرفـا
|
ثــم
أتـى
المشـعر
حـتى
وقفـا
|
|
بموقــف
أكــرم
بـه
مـن
موقـف
|
تمحــي
بــه
جــرائم
المقـترف
|
|
ويتقــي
بــه
وقــوف
المحشــر
|
|
وقــــص
شــــعراً
وأحـــل
إلا
|
عــن
النســا
وطــاف
فاسـتحلا
|
|
وبـــــات
ليلات
وشـــــد
رحلاً
|
مـــن
بكـــة
لأهلـــه
فــأهلا
|
|
بقــادم
يقــد
متــن
الصفصــف
|
طــوراً
ويفـري
بطـن
كـن
نفنـف
|
|
علــى
متــون
اليعملات
الضــمر
|
|
بهـــا
وبالســـلائل
العتـــاق
|
تقـــاد
للطعـــان
والســـباق
|
|
مـن
تحـت
خيـر
الخلق
في
الأخلاق
|
ذوي
المعـالي
الغـر
فـي
الآفاق
|
|
نمـــاهم
مدركــة
فــي
خنــدف
|
إلــى
نــزار
فـي
قصـي
الشـرف
|
|
ونـــاظروا
كنانـــة
بالشــرر
|
|
مـن
لا
يزالـوا
في
الفخار
الأول
|
أولــى
الــورى
بكـل
فضـلٍ
أول
|
|
أكــرم
بــه
مــن
مفخـر
متصـل
|
إلــــى
وي
ونــــبي
مرســــل
|
|
ثـم
إلـى
النـور
الذي
لا
ينطفي
|
وغايـة
الفخـر
البعيـد
الطـرف
|
|
قبـــل
وجـــود
آدم
والبشـــر
|
|
بهــم
ومـا
يعـم
مـن
نعمـائهم
|
أقســم
والعظيـم
مـن
أسـمائهم
|
|
ومــا
تـوالى
مـن
نـدى
آلائهـم
|
بـل
قسـماً
بالصـيد
مـن
آبائهم
|
|
فــذا
قصـارى
غيـاة
المسـتحلف
|
ومنتهـــــى
إرادة
المحلــــف
|
|
مــا
فــوقه
عيـن
ولا
مـن
أثـر
|
|
إن
أبـا
المهـدي
من
خير
الورى
|
وخيــر
مـن
أم
إلـى
أم
القـرى
|
|
إذا
جــرى
فــي
غايـة
مفتخـرا
|
جلا
فخلـــى
كــل
ذي
فضــلٍ
ورى
|
|
وفـــاق
كـــل
ناعــلٍ
ومحتــف
|
وإن
رمــى
أصــاب
قلـب
الهـدف
|
|
وقرطــس
الأعلــى
بكــل
مفخــر
|
|
أشــهد
إن
شــاهدت
مـن
صـفاته
|
ســيماء
آبــاه
علــى
ســماته
|
|
مـا
حـال
لا
واللَـه
فـي
حـالاته
|
عــن
العلـى
طبيعـة
مـن
ذاتـه
|
|
بـل
هو
في
كسب
العلى
أجرى
وفي
|
تجنـــب
الـــدني
حــر
ووفــي
|
|
فــه
حــري
ومــن
الغــي
بـري
|
|
المنتمـــــي
لخيــــر
أم
وأب
|
العلـــوي
الفـــاطمي
النســب
|
|
وإن
عـزي
عـزي
إلـى
خيـر
نـبي
|
فهــو
لعمــري
بـذ
كـل
العـرب
|
|
والخلـف
الجـاري
مجـاري
السلف
|
بتالــد
مــن
العلــى
ومطــرف
|
|
كــن
هكــذا
إن
شـئت
أولا
فـذر
|
|
مراتــب
فــي
المجــد
لا
تنـال
|
تعنــو
إلــى
حضيضـها
الجبـال
|
|
مــــن
آلــــه
محمــــد
والآل
|
فهــو
الـذي
انتهـى
لـه
الجلال
|
|
وقــال
للكــرام
عـن
جـري
قـف
|
إلـى
مـدى
مـا
ديـم
يومـاً
فقف
|
|
مـــدى
بعيــد
مــورد
ومصــدر
|
|
أولئكـــم
آبـــائي
الكـــرام
|
والعاصـــمون
حيـــث
لا
عصــام
|
|
بهــــم
تمســــكت
فلا
أضـــام
|
عليهـــم
الصـــلوة
والســـلام
|
|
فـــي
كــل
صــبح
وظلام
مســدف
|
وكلمــا
أطــرب
صــوت
الهتــف
|
|
وبــاكر
الريــاض
صـوب
المطـر
|