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أفـــي
كـــل
يـــومٍ
فــادحٍ
يتجــدد
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ولاعــــج
وجــــدٍ
نــــاره
تتوقـــد
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وهــــم
مقيــــم
للأنـــام
ومقعـــد
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وغـــم
مقيــم
فــي
الكــرام
مؤبــد
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وأمضـــى
حســـام
للرزايـــا
مجــرد
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وأنفـــذ
ســـهم
للمنايـــا
مســـدد
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وفـــي
كـــل
حيــن
للمنيــة
مصــيد
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يصــاد
علـى
رغـم
العلـى
فيـه
أصـيد
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أأحمــد
دهــراً
فيــه
يقصــد
أحمــد
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بســهم
الـردى
عـدواً
وبالسـوء
يقصـد
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أمـــا
ولآلــي
أدمــع
قــد
تنــاثرت
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يجــود
بهــا
طــرف
الفخـار
المسـهد
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لئن
ذاب
جســمي
لوعــةً
واسـتحال
مـن
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جـوى
الحـزن
معاهـا
ميـا
ليـس
يجحـد
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لكـــان
قليلاً
فـــي
رزيـــة
أحمـــد
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بــل
المـوت
وجـداً
بعـد
أحمـد
أحمـد
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فــــتى
كرمـــت
أخلاقـــه
وعلا
بـــه
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إلــى
الغايــة
القصــوى
علاء
وسـؤدد
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قضـى
العمـر
فـي
كسب
المكارم
لم
يكن
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ليشـــغله
عـــن
كســـب
مكرمـــة
دد
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علــى
مثلـه
فليبـك
مـن
كـان
باكيـاً
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فــإن
البكــا
فـي
مثـل
أحمـد
يحمـد
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أينفــذ
كلا
حزننــا
بعــد
مــن
لــه
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مـــآثر
حمــد
ذكرهــا
ليــس
ينفــد
|
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لئن
فقـــــدته
عينــــاً
فجميلــــه
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مـدى
الـدهر
بـاقٍ
في
الورى
ليس
يفقد
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بــه
فتكــت
أيــدي
المنــون
وأنــه
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لصــارمٌ
عــزم
فــي
الخطــوب
مجــرد
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وأعجــب
شــيءٍ
أن
تنــال
يـد
الـردى
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أبيــاً
لــه
فــوق
الســماكين
مقعـد
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فلا
كــان
يــوم
قــام
ناعيــةٌ
إنــه
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لا
شــأم
يــوم
فــي
الزمــان
وأنكـد
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نعـى
العلـم
والمجـد
المؤثـل
إذ
نعى
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فـــتى
كلـــه
علــم
وحلــم
وســؤدد
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أجـــد
لآل
الطهـــر
أحمـــد
حزنهــم
|
بـــرزء
علــى
مــر
الجديــد
يجــدد
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أملحــده
فـي
الـترب
هـل
أنـت
عـالمٌ
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بأنـــك
للشـــمس
المنيـــرة
ملحــد
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فيـا
طـالب
المعـروف
ويـك
اتئد
فقـد
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تعطـــل
نجـــد
المكرمــات
المعبــد
|
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ويا
طامعاً
في
الرشد
أقصر
فقد
قضى
ال
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ذي
هـــو
هـــاد
للبرايـــا
ومرشــد
|
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فللَــه
هخطــب
حزنــه
شــمل
الــورى
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وطـول
جـوى
يطـوي
المـدى
وهـو
سـرمد
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تـداعى
بنـاء
المجـد
مـن
عظـم
هـوله
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وهـــد
لـــه
طـــود
العلاء
الموطــد
|
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واظلــم
نــادي
الفخــر
بعـد
ضـيائه
|
وأقــوى
طــراف
المكرمــات
الممــدد
|
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وقــد
ثلمـت
فـي
الـدين
أعظـم
ثلمـةٍ
|
وأصــبح
منــه
المشــل
وهــو
مبــدد
|
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ولــو
لــم
نسـل
النفـس
عنـه
بولـده
|
لأودى
بهـــا
عبـــء
الأســـى
المتكئد
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فـــإنهم
أحيـــوا
مــآثر
مجــده
ال
|
أثيــل
ومــا
قــد
كـان
أسـس
شـيدوا
|
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فــأكرم
بهــم
مـن
أهـل
بيـت
أكـارمٍ
|
إذا
مــات
منهــم
ســيد
قــام
ســيد
|
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أمهــدي
أهـل
الـبيت
يـا
مـن
أقـامه
|
الإلـــه
منــاراً
للعبــاد
ليهتــدوا
|
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ويـا
ابـن
الرضـي
المرتضي
علم
الهدى
|
ومـــن
جــده
هــادي
الأنــام
محمــد
|
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تعـــز
وإن
عـــز
العـــزاء
لمثلــه
|
وكـن
صـابراً
فـي
اللَـه
فالصـبر
أحمد
|
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فمـا
مـات
مـن
قـد
قمـت
أنـت
بـأمره
|
وإن
كــان
مــن
تحـت
الصـفائح
يلحـد
|
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ولا
يتمــــت
أولاده
بعــــده
وهــــل
|
تعــد
يتــامى
مــن
لهـا
أنـت
مرفـد
|
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فإنــك
أحنــى
مــن
أبيهــم
عليهــم
|
علــــى
أنــــه
ذاك
الأب
المتـــودد
|
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أدام
لهــم
ذو
العــرش
ظلـك
مـا
أوى
|
إلــى
البــدر
نجــم
نــوره
يتوقــد
|
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أأحمــد
أهـل
الـبيت
يـا
مـن
بفضـله
|
أعــاديه
فضــلاً
عــن
مــواليه
تشـهد
|
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ويـا
غائبـاً
عيـن
المكـارم
لـم
تـزل
|
تطلـــع
مـــن
شــوقٍ
إليــه
وترصــد
|
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إلـى
كـم
نرجـي
العـود
منـك
فعـد
به
|
علينــا
حنانــاً
منـك
فـالعود
أحمـد
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ويــاخير
مفقــودٍ
بكتـه
العلـى
دمـاً
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وأصــبح
منهــا
الجفــن
وهــو
مسـهد
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لئن
كنــت
قـد
فـارقت
دنيـاً
نعيمهـا
|
يــزول
وعيشــاً
ليــس
يفتــأ
ينكــد
|
|
فإنـــك
قــد
جــاورت
ربــك
خالــداً
|
بمقعـــد
صـــدقٍ
لا
يـــدانيه
مقعــد
|
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لـــذلك
قــد
أنشــأت
فيــك
مؤرخــاً
|
مقامـك
عنـد
اللَـه
فـي
الخلـد
أحمـد
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