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أســرفن
فـي
هجـري
وفـي
تعـذيبي
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وأطلــن
موقــف
عــبرتي
ونحيـبي
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وأبيـن
يـوم
الـبين
وقفـة
سـاعة
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لــوداع
مشــغوف
الفــؤاد
كئيـب
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للــه
عهــد
الظـاعنين
وغـادروا
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قلـــبي
رهيــن
صــبابة
ووجيــب
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غربــت
ركــائبهم
ودمعــي
سـافح
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فشـــرقت
بعــدهم
بمــاء
غــروب
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يـا
ناقعـاً
بـالعتب
غلـة
شـوقهم
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رحمــاك
فـي
عـذلي
وفـي
تـأنيبي
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يســـتعذب
الصــب
الملام
وإننــي
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مــاء
الملام
لــدي
غيــر
شــروب
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مـا
هـاجني
طـرب
ولا
اعتاد
الجوى
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لـــولا
تـــذكر
منـــزل
وحــبيب
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أهفــو
إلـى
الأطلال
كـانت
مطلعـاً
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للبــدر
منهــم
أو
كنــاس
ربيـب
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عبثـت
بهـا
أيـدي
البلـى
وترددت
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فــي
عطفهــا
للــدهر
أي
خطــوب
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تبلـــى
معاهــدها
وإن
عهودهــا
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ليجــدها
وصــفي
وحســن
نســيبي
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وإذا
الـــديار
تعرضــت
لمــتيم
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هزتــه
ذكراهــا
إلــى
التشـبيب
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إيــه
عـن
الصـبر
الجميـل
فـإنه
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ألــوى
بــدين
فــؤادي
المنهـوب
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لـم
أنسـها
والـدهر
يثنـي
صـرفه
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ويغـــض
طرفـــي
حاســد
ورقيــب
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والــدار
مونقــة
محاسـنها
بمـا
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لبســت
مــن
الأيــام
كــل
قشـيب
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يـا
سـائق
الأظعـان
يعتسـف
الفلا
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ويواصـــل
الأســـآد
بالتـــأويب
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متهافتــاً
عــن
رحــل
كـل
مـذلل
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نشــوان
مــن
أيــن
ومــس
لغـوب
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تتجــاذب
النفحــات
فضــل
ردائه
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فــي
ملتقاهــا
مـن
صـباً
وجنـوب
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إن
هـام
مـن
ظمـإ
الصـبابة
صحبه
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نهلــوا
بمــورد
دمعـه
المسـكوب
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أو
تعــترض
مسـراهم
سـدف
الـدجى
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صـدعوا
الـدجى
بغرامـه
المشـبوب
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فــي
كـل
شـعب
منيـة
مـن
دونهـا
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هجــر
الأمــاني
أو
لقــاء
شـعوب
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هلا
عطفــت
صــدورهن
إلــى
الـتي
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فيهـــا
لبانــة
أعيــن
وقلــوب
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فتــؤم
مـن
أكنـاف
يـثرب
مأمنـاً
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يكفيــك
مــا
تخشـاه
مـن
تـثريب
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حيـــث
النبــوة
أيهــا
مجلــوة
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تتلــو
مــن
الآثــار
كــل
غريـب
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ســر
عجيــب
لــم
يحجبـه
الـثرى
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مــا
كــان
سـر
اللـه
بـالمحجوب
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إنــي
دعوتــك
واثقــاً
بإجـابتي
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يــا
خيــر
مــدعو
وخيــر
مجيـب
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قــرت
فـي
مـدحي
فـإن
يـك
طيبـاً
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فبمــا
لـذكرك
مـن
أريـج
الطيـب
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مـاذا
عسـى
يبغي
المطيل
وقد
حوى
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فــي
مــدحك
القــرآن
كـل
مطيـب
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يــا
هـل
تبلغنـي
الليـالي
زورة
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تــدني
إلــي
الفــوز
بـالمرغوب
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أمحــو
خطيئاتــي
بإخلاصــي
بهـا
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وأحـــط
أوزاري
وإصـــر
ذنــوبي
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فـي
فتيـة
هجـروا
المنى
وتعودوا
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إنضـــاء
كـــل
نجيبــة
ونجيــب
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يطـوي
صـحائف
ليلهـم
فـوق
الفلا
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مــا
شـئت
مـن
خبـب
ومـن
تقريـب
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إن
رنــم
الحــادي
بـذكرك
رددوا
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أنفـــاس
مشــتاق
إليــك
طــروب
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أو
غــرد
الركــب
الخلـي
بطيبـة
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حنــوا
لمغناهــا
حنيــن
النيـب
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ورثـوا
اعتسـاف
البيد
عن
آبائهم
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إرث
الخلافــة
فــي
بنــي
يعقـوب
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الطــاعنين
الخيــل
وهـي
عـوابس
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يغشــى
مثــار
النقـع
كـل
سـبيب
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والواهــبين
المقربــات
صـوافناً
|
مــن
كــل
خــوار
العنـان
لعـوب
|
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والمــانعين
الجــار
حـتى
عرضـه
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فـي
منتـددى
الأعـداء
غيـر
معيـب
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تخشــى
بــوادرهم
ويرجـى
حلمهـم
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والعــز
شــيمة
مرتجــى
ومهيــب
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سـائل
بـه
طـامي
العباب
وقد
سرى
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تزجيــه
ريــح
العـزم
ذات
هبـوب
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تهـــديه
ســهب
أســنة
وعــزائم
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يصــدعن
ليــل
الحـادث
المرهـوب
|
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حـتى
انجلـت
ظلـم
الضـلال
بسـعيه
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وسـطا
الهـدى
بفريقهـا
المغلـوب
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يا
بن
الألى
شادوا
الخلافة
بالتقى
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واســتأثروك
بتاجهــا
المغصــوب
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جمعــوا
لحفـظ
الـدين
أي
منـاقب
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كرمــوا
بهــا
فـي
مشـهد
ومغيـب
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للــه
مجــدك
طارفــاً
أو
تالـداً
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فلقــد
شــهدنا
منهـن
كـل
عجيـب
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كـم
رهبـة
أو
رغبـة
بـك
والعلـى
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تقتـــاد
بــالترغيب
والــترهيب
|
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لا
زلــت
مســروراً
بأشــرف
دولـة
|
يبـدو
الهـدى
مـن
أفقها
المرقوب
|
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تحيـي
المعـالي
غاديـاً
أو
رائحاً
|
وحديــد
ســعدك
ضــامن
المطلـوب
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