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قــم
نحـو
حمـاه
وانصـرفِ
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عــن
بـابٍ
سـواه
ولا
تقـفِ
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وادخـل
روض
الأذكـار
ومـن
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أزهــارِ
الحضـرة
فـاقتطف
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واسـمع
فـوق
الأغصـان
لما
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تبـدي
الورقـاءُ
من
اللهف
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وهــزارُ
الحـال
يجاوبُهـا
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والغصــن
تثنّــى
بـالهيف
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وغـدا
يختـال
بوحـدة
تـو
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حيــد
المحبـوب
المنعطـف
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وإذا
مـا
دار
الكـأس
فكن
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فــي
حانــك
أوّلَ
مغــترف
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واشـرب
واطـرب
لا
تخش
إذاً
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مــن
تبـذيرٍ
أو
مـن
سـرَف
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واشـطح
واشـرح
مـا
تشهدُه
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فــي
مجلاه
وانعــت
وصــف
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وإذا
عربـــدت
فلا
حـــرجٌ
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فالسـكر
يريـحُ
مـن
الكلف
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وإذا
مـا
عـدّت
لصـحوك
قم
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بــالأمر
وبالـذنب
اعـترف
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فالصـفح
مـن
المولى
يُرجى
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لكــن
للعبــد
المعــترف
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واستحضـر
بطـش
القادر
ما
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أحيــاك
ومـن
بلـواه
خـف
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حتّــى
تفنــى
فـي
حضـرته
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كفنــاء
اللام
مــع
الألـف
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وقـل
اللهـمّ
العفـو
لمـن
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أمسـى
بالـذنب
علـى
جُـرُف
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مــولاي
بسـرّ
الجمـع
وجـم
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عِ
الســـرّ
بســرٍّ
منكشــف
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بظهـــورٍ
لاح
لنــا
بــادٍ
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ولشــدّته
قــد
كـان
خفـي
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فظهرت
وأنت
الباطن
في
ال
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ملإ
الأعلــى
لــم
تنكشــف
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وظهــورك
لا
يخفــى
وبـذا
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حيّــرتَ
عقـولَ
ذوي
الشـغف
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يــا
مـن
وسـعَتنا
رحمتُـهُ
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مـذ
كنّـا
فـي
طـور
النُّطَف
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لا
تخلــو
أبحرُهــا
أبـداً
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مــن
مغــترفٍ
أو
مرتشــف
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لا
تخرجنــي
مـن
مركـز
دا
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ئرة
التوحيـد
إلـى
الطرف
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وأذقنــي
لـذّة
توحيـد
ال
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أفعـال
وكـن
بـي
خير
حفي
|
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وكــذلك
توحيــد
الأســما
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وصــفات
الــذات
المتّصـف
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بحقيقتــك
العظمـى
وبمـا
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فـي
كنـز
عماهـا
مـن
تحف
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واصـرف
عنّـي
أسـواء
سـوا
|
ك
بكشـف
الحجـب
مع
السجف
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فالعبــد
ضــعيفٌ
بُنيتُــه
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لســهام
قضــائك
كالهـدف
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والحكمــة
ظــاهرةٌ
أبـداً
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فيمــا
قــدّرت
لكـلّ
صـفي
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والأعمــى
مــن
لا
يبصـرها
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فــي
مؤتلــفٍ
أو
مختلــف
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فبسـرّ
الـذات
وذات
السـر
|
ر
ومـا
أنزلـتَ
مـن
الصحف
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وبجملـة
رسـلك
مَـن
بُعثوا
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لنظــام
الأمــر
المنحـرف
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وببــدر
ســماء
رسـالتهم
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طــه
ذي
الرفعـة
والشـرف
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مــن
زيّنــتَ
الأكـوانَ
بـه
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تزييــن
الــدرّة
للصــدف
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وبــآل
كمـالٍ
مـن
أضـحوا
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ســفناً
لنجــاة
المقـترف
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وبــأنجم
أصــحاب
نســخت
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أنــــوارهمُ
آيَ
الســـَّدف
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وبتـابعِهم
فـي
الخير
ومَن
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هُــم
خيـر
الأمّـة
والسـلف
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وبقطـب
الـدائرة
العظمـى
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لبــدورِ
دجـىً
لـم
تنكسـف
|
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وبفـرد
الـوقت
ووقت
الفر
|
د
بــأفرادٍ
لــم
تنعطــف
|
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وبكـــلّ
ولـــيٍّ
مســـتترٍ
|
بجلال
جمالــــك
مكتنـــف
|
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وبكـــلّ
كئيــبٍ
ذي
ولــهٍ
|
بــك
صــبٍّ
متبــولٍ
دَنِــف
|
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وبأشــعث
أغــبر
ذي
ثـوبٍ
|
خلِـقٍ
لا
يرغـب
فـي
الـترف
|
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وبجــامع
أسـرار
التحقـي
|
ق
بجــامع
قربــك
معتكـف
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يتهجّــــد
ليلاً
ذا
ســـهرٍ
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ويصـوم
نهـاراً
وهـو
وفـي
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وبصــالح
أهـل
الأرض
ومـن
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هـو
فيهـم
كـالروض
الأُنُـف
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وبمــن
طهّــرت
طبــائعَهم
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مــن
وصـمة
طبـع
ذي
جنَـف
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حتّـــى
لحقــوا
بملائكــةٍ
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مـن
قـرب
الـروح
المزدلف
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إلّا
اســتعطفت
علــى
عبـدٍ
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يــدعوك
بمــدمعه
الـذَّرِف
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فهـو
العاصـي
فـي
طـاعته
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وبركـن
التوبـة
لـم
يَطُـف
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لكــن
مــا
زال
لـه
قلـبٌ
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عــن
بابـك
ليـس
بمنصـرف
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فاســتر
بـالحلم
قبـائحَه
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وأبحـه
غـداً
أعلـى
الغُرَف
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وأدم
سـحب
الصـلوات
علـى
|
نـــورٍ
بكمالـــك
متَّصــف
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سـرِّ
الإيجـاد
وغيـثِ
الجـو
|
د
وغــوثِ
الصـبّ
الملتهـف
|
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والآلِ
وكــلِّ
الصــحب
ومَـن
|
بعهــود
شـهودٍ
قـام
يفـي
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مـا
هـبّ
صـبا
الأسحار
وما
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قـد
مـال
الغصن
مع
الهيف
|
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أو
مـا
عمـرُ
اليـافيُّ
شدا
|
قــم
نحـو
حمـاه
وانصـرف
|